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	<title>गैस टर्बाइन - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;Saroj Uprety: 2409:4043:2E82:B360:1F1:31C6:E2D8:A7EF (वार्ता) के 1 संपादन वापस करके InternetArchiveBotके अंतिम अवतरण को स्थापित किया (ट्विंकल)</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/2409:4043:2E82:B360:1F1:31C6:E2D8:A7EF&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/2409:4043:2E82:B360:1F1:31C6:E2D8:A7EF&quot;&gt;2409:4043:2E82:B360:1F1:31C6:E2D8:A7EF&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:2409:4043:2E82:B360:1F1:31C6:E2D8:A7EF&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:2409:4043:2E82:B360:1F1:31C6:E2D8:A7EF (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;वार्ता&lt;/a&gt;) के 1 संपादन वापस करके InternetArchiveBotके अंतिम अवतरण को स्थापित किया (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=WP:TW&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;WP:TW (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;ट्विंकल&lt;/a&gt;)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[चित्र:Turboprop.png|300px|right|thumb|एक प्रकार की गैस टर्बाइन और उसके विभिन्न भाग : A-प्रोपेलर, B-गीयर, C-कंप्रेसर, D-ज्वालक (कंबस्टर), E-टर्बाइन, F-निकास]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;गैस टर्बाइन&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (gas turbine) एक प्रकार का [[अंतर्दहन इंजन]] है जो घूमने के लिए आवश्यक [[ऊर्जा]] ज्वलनशील गैस के प्रवाह से प्राप्त करता है और इसी कारण इसे &amp;#039;दहन टर्बाइन&amp;#039; (combustion turbine) भी कहा जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=http://books.google.co.in/books?id=IjOZXwp0izsC&amp;amp;pg=PA44&amp;amp;lpg=PA44&amp;amp;dq&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=dMqGyBkQwd&amp;amp;sig=1C9HhR4BoRnz5jeZhr1OummsCI0&amp;amp;hl=en&amp;amp;sa=X&amp;amp;ei=f1ZvT_2WLY_IrQfrp5CgDg&amp;amp;sqi=2&amp;amp;ved=0CDQQ6AEwAg#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%97%E0%A5%88%E0%A4%B8-%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8%20%20&amp;amp;f=false{{!}} |title=पृष्ठ क्रमाँक ४६-४७ बाल ज्ञान- विज्ञान एन्साइक्लोपीडिया संचार-परिवहन &amp;amp;#91;&amp;amp;#91;आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰&amp;amp;#93;&amp;amp;#93; 978-81-85134-54-3 |access-date=1 दिसंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130120113613/http://books.google.co.in/books?id=IjOZXwp0izsC&amp;amp;pg=PA44&amp;amp;lpg=PA44&amp;amp;dq&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=dMqGyBkQwd&amp;amp;sig=1C9HhR4BoRnz5jeZhr1OummsCI0&amp;amp;hl=en&amp;amp;sa=X&amp;amp;ei=f1ZvT_2WLY_IrQfrp5CgDg&amp;amp;sqi=2&amp;amp;ved=0CDQQ6AEwAg#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%97%E0%A5%88%E0%A4%B8-%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8%20%20&amp;amp;f=false{{!}} |archive-date=20 जनवरी 2013 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt; चूंकि टरबाइन की गति घूर्णी (रोटरी) होती है, यह विद्युत जनित्र को घुमाने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। [[यूएसए]] की लगभग ९० प्रतिशत विद्युत ऊर्जा भाप टरबाइनों के सहारे ही पैदा की जाती है (१९९६)। भाप टरबाइन की दक्षता अन्य [[ऊष्मा इंजन|ऊष्मा इंजनों]] से अधिक होती है। अधिक दक्षता भाप के प्रसार के लिए कई चरणों का प्रयोग करने से प्राप्त होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;गैस टरबाइन&amp;#039; की विभिन्न परिभाषाएँ दी जाती हैं। विस्तृत परिभाषा के अनुसार गैस टरबाइन वह मूल चालक (prime mover) है जिसके संपूर्ण उष्मीय चक्र में कार्यकारी तरल गैसीय अवस्था में ही बना रहता है एवं जिसके सभी यंत्रांगों की गति परिभ्रमी होती है। संकीर्ण परिभाषा के अनुसार इस शब्द का प्रयोग सिर्फ उस मुख्य टरबाइन अंग के लिये किया जाता है जिसका माध्यम गरम वायु होती है। कुछ विद्वानों के मतानुसार गैस टरबाइन वह यंत्र है जिसमें प्रवाह प्रक्रम अविरत रहता है एवं शक्ति टरबाइन द्वारा प्राप्त होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== संक्षिप्त इतिहास ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:John Barber&amp;#039;s gas turbine.jpg|right|thumb|250px|जॉन बार्बर की टर्बाइन का रेखाचित्र (उनके पेटेंट से लिया गया)]]&lt;br /&gt;
प्रथम गैस टरबाइन की निर्माणतिथि अभी तक अज्ञात है किंतु 130 ई. पू. के [[मिस्र]] में हीरो ने टरबाइन के सदृश एक ऐसे यंत्र का निर्माण किया था जो गरम वायु की सहायता से चलता था। संभवत: प्रथम ज्ञात गैस टरबाइन का निर्माण सन्‌ 1550 ई. में हुआ एवं इसका निर्माता [[लियोनार्डो दा विंशी]] था। यह यंत्र चिमनी के पास रखा जाता था और इससे होकर चिमनी की गैस ऊपर जाती थी। इस यंत्र के द्वारा बहुत कम शक्ति प्राप्त होती थी, जिसका उपयोग [[मांस]] को भूनने के लिए बने हुए पात्र को चलाने के लिए किया जाता था। गैस टरबाइन का सर्वप्रथम पेटेंट [[इंग्लैंड]] में जॉन बारबर ने 1791 ई. में कराया था। आश्चर्य की बात तो यह है कि उसका बनाया गैस टरबाइन आधुनिक विकसित सिद्धान्त पर आधारित पाया गया है। उसके बाद जॉन डाबेल ने 1808 ई. में दूसरा पेटेंट इंग्लैंड में ही कराया। 1837 ई. में [[पेरिस]] में ब्रेसन ने एक ऐसे टरबाइन का पेटेंट कराया, जिसमें सभी आवश्यक कल पुर्जे थे। उच्च शक्ति वाले गैसे टरबाइन का निर्माण 1872 ई0 में स्टोल्ज ने किया था, जो बहुपद (multi-stage) अभिक्रिया टरबाइन एवं बहुपद अक्षीय-प्रवाह संपीडक (Arial Flow Compressor) द्वारा युक्त था। उस समय वैज्ञानिकों को [[वायुगतिकी]] (Aerodynamics) का ज्ञान कम था, जिससे दक्ष संपीडक का निर्माण संभव नहीं था। संपीडक की डिजाइन सुचारू रूप से न किए जाने के कारण अनेक हानियाँ होती हैं, जिनके कारण टरबाइन द्वारा प्राप्त कार्य का अधिकांश भाग संपीडक को चलाने में ही खर्च हो जाता है और बहुत ही कम शक्ति उपलब्ध होती है। दहनकक्ष की डिजाइन एवं निर्माण भी अधिक विकसित नहीं हो पाया था। अनुसंधानकर्ताओं को इन समस्याओं के सिवाय उपयुक्त निर्माण सामग्री की विकट समस्या का भी सामना करना पड़ता था। इन्हीं सब कारणों से प्रारंभिक गैस टरबाइन सफल नहीं हो पाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अमरीका में इस टरबाइन का प्रथम [[पेटेंट]] चार्ल्स कर्टिस ने 1895 ई. में कराया था। यह टरबाइन और सभी टरबाइनों से अच्छा प्रमाणित हुआ। उस समय तक वैज्ञानिकों का ध्यान इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो चुका था। इसके बाद अनेक तरह की डिजाइन के गैस टरबाइन बनाए गए, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं: 1905 ई0 में फ्रांस में अर्मेगंड और लेमाल द्वारा निर्मित प्रथम बहुपद अपकेंद्रीसंपीडक-युक्त गैस टरबाइन, 1905 ई. में डॉ॰ होल्जवर्थ द्वारा निर्मित स्थिर आयतन टरबाइन, 1908 ई0 में फ्रांस में कर्बोडीन द्वारा निर्मित आवेग (impulse) टरबाइन, 1913 ई. में बिशाँफ द्वारा निर्मित विस्फोट प्रकार का टरबाइन तथा 1914 ई. में बिशॉफ द्वारा निर्मित स्थिर-दाब टरबाइन।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उपर्युक्त डिजाइनों के अलावा और भी विभिन्न डिजाइनों के टरबाइनों का विकास होता रहा है। वैज्ञानिकों के अथक प्रयास के फलस्वरूप आज गैस टरबाइन की नींव पक्की हो गर्ह है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गैस टरबाइन की उष्मागतिकी (Thermodynamics)==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Brayton cycle.svg|right|thumb|300px| &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;ब्रेसन चक्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (Brayton cycle)]]&lt;br /&gt;
वास्तव में गैस टरबाइन एक [[अन्तर्दहन इंजन]] ही है। इसमें एक सबसे पहले एक घूर्णी संपीडक (rotating compressor) होता है, उसके बाद ज्वलन कक्ष होता है और अन्त में एक टरबाइन। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गैस टरबाइन का काम करने का सिद्धान्त भाप शक्ति संयंत्र के काम करने के सिद्धान्त से मिलता-जुलता है। अन्तर बस इतना है कि यहाँ भाप के स्थान पर हवा का उपयोग होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायुमंडल से [[वायु]] संपीडक में प्रवेश करती है, जहाँ इसका संपीड़न (कम्प्रेशन) होता है। संपीडित वायु को दहनकक्ष में लाया जाता है, जिसमें [[ईंधन]] की सहायता से वायु गरम की जाती है। दहन कक्ष से निकलकर गरम वायु टरबाइन में जाती है एवं इस यंत्र के द्वारा कार्य करती है। कार्य करने के बाद वायु बाहर निकल जाती है।&lt;br /&gt;
आदर्श गैस टर्बाइन से गुजरने वाली गैसों पर तीन ऊष्मागतिक प्रक्रियाएँ की जाती हैं, ये हैं- &lt;br /&gt;
# समऐन्ट्रॉपिक संपीडन (isentropic compression)&lt;br /&gt;
# समदाबिक ज्वलन (isobaric combustion)&lt;br /&gt;
# समऐन्ट्रॉपिक प्रसार (isentropic expansion)&lt;br /&gt;
इन तीनों को मिलाकर &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;ब्रेसन चक्र&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (Brayton cycle) कहलाता है। &lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
[[दहन]] करने की दो प्रणालियाँ व्यवहार में लाई जाती हैं :&lt;br /&gt;
*(1) स्थिर दाब तथा &lt;br /&gt;
*(2) स्थिर आयतन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इन दो प्रणालियों में स्थिर दाब चक्र अच्छा पाया गया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गैसे टरबाइन में व्यवहृत उष्मागतिकी चक्र हैं : &lt;br /&gt;
*(1) खुला चक्र तथा &lt;br /&gt;
*(2) बंद चक्र&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रथम प्रकार के चक्र में वायुमंडल से ताजी वायु संपीडक में प्रवेश करती एवं टरबाइन में कार्य करने के बाद वायुमंडल में ही निष्कासित हो जाती है, किंतु दूसरे प्रकार के चक्र में बाहर से ताजी वायु नहीं आती है, वरन्‌ उसी वायु या गैस का बारंबार परिवहन होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
टरबाइन की दक्षता को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरण व्यवहार में लाए जाते हैं, जिनमें निम्नलिखित मुख्य हैं : &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== उष्मा विनिमयित्र (Heat Exchanger)===&lt;br /&gt;
[[चित्र:Схема конд ПТУ.JPG|right|thumb|300px|संघनित्र सहित भाप टरबाइन तथा अन्य अवयव &amp;lt;br&amp;gt;1. बायलर 2. भाप पाइप 3. भाप टरबाइन 4. शाफ्ट 5. विद्युत जनित्र 6. संघनित्र 7. ठण्डे जल के नल 8. पाइप 9. पम्प]]&lt;br /&gt;
संपीडक से निकलकर संपीडित वायु इसमें एक ओर से प्रवेश करती है एवं दूसरी ओर से टरबाइन द्वारा निष्कासित गैस प्रवेश करती है। गैस संपीड़ित वायु से अधिक गरम होती है। इसीलिये ताप गैस से संपीड़ित वायु में प्रवेश करता है तथा संपीडित वायु और भी गरम हो जाती है। संपीडित वायु के अधिक गरम होने से दहनकक्ष में ईधंन की कम आवश्यकता होती है। इससे संपूर्ण संयंत्र की दक्षता बढ़ जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== अंत:शीतलक (Intercooler)===&lt;br /&gt;
संपीड़न के कार्य में कुछ भी कमी होने से उपलब्ध शक्ति की वद्धि हो जाती है, जिससे संयंत्र की दक्षता बढ़ जाती है। संपीड़न के कार्य को कम करने के लिये वायु निम्न दाब संपीड़क में संपीड़ित होकर अंत:शीतलक (देखें चित्र 3) में प्रवेश करती है, जहाँ उसका ताप कम करके उसको उच्च दाब संपीड़क में पुन: संपीड़ित होने के लिये भेजा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== पुनस्तापक (Reheater) ===&lt;br /&gt;
प्रथम टरबाइन में कार्य करने के बाद गैस पुनस्तापक (देखें चित्र 4) में प्रवेश करती है, जहाँ इसे पुनस्तापित किया जाता है। पुनस्तापक से निकलकर गैस द्वितीय टरबाइन में कार्य करने के लिये प्रवेश करती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गैस टरबाइन के मुख्य अंग ==&lt;br /&gt;
ये निम्नलिखित हैं : &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== संपीड़क ===&lt;br /&gt;
गैस टरबाइन में दो प्रकार के संपीड़क लगाए जाते हैं, अक्षप्रवाह एवं अपकेद्रिक। अक्षप्रवाह संपीड़क का व्यवहार पहले बहुत ही कम होता था, किंतु पिछले कुछ वर्षों में वायुगतिकी विज्ञान का विकास होने से इस तरह के संपीड़क का डिजाइन सरल हो गया है एवं इसकी दक्षता भी बढ़ गई है। औद्योगिक गैस टरबाइन में इस प्रकार के संपीड़क का अधिक व्यवहार होता है, क्योंकि इसके द्वारा उच्च दाब अनुपात एवं उच्च दक्षता की प्राप्ति होती है। अपकेंद्रिक संपीड़क हल्का होने के कारण वायुयान में अधिक व्यवहृत होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== दहनकक्ष ===&lt;br /&gt;
जैसा ऊपर बताया जा चुका है, इस कक्ष में ईधंन की सहायता से संपीड़ित वायु को गरम किया जाता है। इस अंग की डिज़ाइन अत्यंत नाजुक एवं जटिल होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== टरबाइन ===&lt;br /&gt;
इसके द्वारा कार्य प्राप्त होता है। टरबाइन की सहायता से संपीड़क को चलाया जाता है, जिससे टरबाइन में प्राप्त कार्य का कुछ भाग संपीड़क को चलाने में खर्च हो जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसीलिये, उपलब्ध शक्ति = टरबाइन द्वारा प्राप्त कार्य - संपीड़क में खर्च किया हुआ कार्य&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== गैस टरबाइन की सामग्री ===&lt;br /&gt;
गैस टरबाइन की उष्मीय दक्षता टरबाइन में कार्य करनेवाले गैसे के प्रवेशताप पर निर्भर करती है। यह ताप जितना अधिक होगा दक्षता उतनी ही अधिक होगी, किंतु गैस के ताप को बढ़ाने के पहले टरबाइन के फलकों के लिए व्यवहृत सामग्री में भी उस ताप पर कार्य करने की क्षमता होती चाहिए। इस क्षेत्र में गहन अनुसंधान हुए हैं एवं बहुत तरह की नई नई सामग्रियों का विकास हुआ है। ये सामग्रियाँ उच्च ताप एवं उच्च प्रतिबल (stress) की विषम अवस्थाओं में भी सुचारु रूप से कार्य कर पाती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== परिभ्रमक फलक शीतलन ===&lt;br /&gt;
नई नई निर्माण सामग्रियों के विकास के साथ ही गैस टरबाइन की उष्मीय दक्षता को बढ़ाने का दूसरा तरीका गरम पुर्जों को ठंडा करना है। परिभ्रमक पर शोधन कार्य हो रहे हैं। खोखले फलकों का निर्माण किया गया है एवं इन्हें संपीड़क द्वारा वायु भेजकर ठंडा किया जाता है। इस तरह से फलकों के साथ ही साथ परिभ्रमक भी ठंडा होता रहता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गैस टरबाइन में व्यवहृत ईंधन ==&lt;br /&gt;
गैस टरबाइन में प्राय: सभी प्रकार के ईंधन व्यवहृत होते हैं। पतले तेल को जलाने में कोई कठिनाई नहीं होती। गाढ़े तेल को जलाने के लिये विशेष प्रकार के प्रसाधन की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस प्रकार के तेल को जलाते समय अग्रलिखित समस्याओं का सामान करना पड़ता है-&lt;br /&gt;
: तेल में विद्यमान ठोस कणों का दक्षतापूर्वक दहन, टरबाइन फलकों पर राख कर जमा होना तथा टरबाइन फलकों एवं अन्य पुर्जों को तेल के क्षारण प्रभाव से बचाना।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गैस टरबाइन की उपयोगिता ==&lt;br /&gt;
गैस टरबाइन मूलचालक (prime mover) है। यह परिभ्रमी (rotary) प्रकार का यंत्र है इसीलिये पश्चाग्र (reciprocating) मूलचालकों की अपेक्षा इसमें घर्षणहानि बहुत ही कम होती है। गैस टरबाइन की यांत्रिक दक्षता 95 से 97 प्रतिशत तक होती है, जब की अंतर्दहन इंजन की दक्षता 80 से 85 प्रतिशत तक ही हो पाती है। गैस टरबाइन का संतुलन अच्छा रहता है, जिससे इसमें कंपन कम होता है। अन्यान्य मूल चालकों की तुलना में यह दीर्घायु होता है। विद्युत उत्पादन के सिवाय लोकोमोटिव (locomotive), रेल के इंजन, मोटरगाड़ी, जलयान, वायुयान आदि के मूल चालक के रूप में इसका व्यवहार किया जाता है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Turbine generator systems1.png|center|500px|thumb|गैस टरबाइन, उससे जुड़ा हुआ विद्युत जनित्र तथा अन्य अवयवों का योजनामूलक चित्र]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गैस टरबाइन की समस्याएँ ==&lt;br /&gt;
गैस टरबाइन की उष्मीय दक्षता अब भी कम ही होती है। यद्यपि गैस टरबाइन युक्त यंत्र की चाल की दिशा बदलने के लिए बहुत तरह के उपसाधन निकाले गए हैं तथापि यह सुगमतापूर्वक बदली नहीं जा सकती। गैस टरबाइन स्वत:प्रवर्ती (self-starting) मूलचालक नहीं है। इसके अलावा एक समस्या यह भी है कि गैस टरबाइन की दक्षता, शक्ति की माँग के कम होने से, कम हो जाती है। परंतु ये समस्याएँ असाध्य नहीं हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* {{dmoz|/Science/Technology/Energy/Devices/Internal_Combustion_Engines/Gas_Turbine/}}&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20190405104609/http://www.terrafirmajets.co.uk/]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20101231113229/http://www.techzoom.net/papers/innovation_in_civil_jet_aviation_2006.pdf Technology Speed of Civil Jet Engines]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20100721181002/http://web.mit.edu/aeroastro/faculty/labs.html MIT Gas Turbine Laboratory]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20090411143933/http://www.memagazine.org/backissues/membersonly/october97/features/turbdime/turbdime.html MIT Microturbine research]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20081225002742/http://www.energy.ca.gov/distgen/equipment/microturbines/microturbines.html California Distributed Energy Resource guide - Microturbine generators]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20080616043527/http://travel.howstuffworks.com/turbine.htm Introduction to how a gas turbine works from &amp;quot;how stuff works.com&amp;quot;]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20071016062506/http://www.soton.ac.uk/~ge102/Jet.html Aircraft gas turbine simulator for interactive learning&amp;quot;]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:गैस टर्बाइन| ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:यान्त्रिकी]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:वैमानिक अभियान्त्रिकी]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:विकिपरियोजना वैमानिकी]]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Saroj Uprety</name></author>
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