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	<title>टर्बाइन - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>imported&gt;अनुनाद सिंह: /* इन्हें भी देखें */</title>
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		<updated>2020-11-03T17:57:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;span class=&quot;autocomment&quot;&gt;इन्हें भी देखें&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[चित्र:Dampfturbine Montage01.jpg|thumb|right|220px| सिमेन्स (Siemens) की टर्बाइन जिसका आवरण खोल दिया गया है]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;टर्बाइन&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; एक घूर्णी (rotary) [[इंजन]] है जो किसी [[तरल]] की गतिज या/तथा स्थितिज उर्जा को ग्रहण करके स्वयं घूमती है और अपने शॉफ्ट पर लगे अन्य यन्त्रों (जैसे [[विद्युत जनित्र]]) को घुमाती है। [[पवन चक्की]] (विंड मिल्) और [[जल चक्की]] (वाटर ह्वील) आदि टर्बाइन के प्रारम्भिक रूप हैं। विद्युत शक्ति के उत्पादन में टर्बाइनों का अत्यधिक महत्व है। गैस, भाप और जल से जलनेवाले टरबाइन एक दूसरे से भिन्न होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;गैस कम्प्रेशर&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; या [[पम्प]] भी [[टर्बाइन]] जैसा ही होता है पर यह टर्बाइन के उल्टा कार्य करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== टरबाइन का विकास एवं सिद्धान्त ==&lt;br /&gt;
[[Image:Turbines impulse v reaction.png|right|thumb|350px|]]&lt;br /&gt;
टरबाइन में कम से कम एक [[रोटर असेम्बली]] होती है जो इसका गतिमान पुर्जा एक या एक से अधिक ब्लेडों के साथ शाफ्ट या ड्रम के साथ इस मशीन को चलाता है। ब्लेड पर तरल पदार्थ या अन्य पदार्थ दबाव डालता है जिससे रोटर या घूर्णी चलती है। यह चाल और रोटर घूर्णी को गतिज ऊर्जा प्रदान करती है। गैस, भाप और जल टर्बाइन में आमतौर पर ब्लेड के आसपास एक आवरण होता है जो द्रव की मात्रा को नियंत्रित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शब्द &amp;quot;[[टरबाइन]]&amp;quot; 1822 में फ्रेंच खनन इंजीनियर क्लाउड बर्डीन (Burdin) ने [[लैटिन]] &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;टर्बो&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; शब्द ( = [[भंवर]]) से गढ़ा था। इसका उल्लेख एक संस्मरण में उन्होने किया था जो रायल साइंस अकादमी पेरिस को प्रस्तुत किया गया था। क्लाउड बर्डीन के एक पूर्व छात्र बेनोइट फ़ोर्नेरोन (Fourneyron) ने पहली व्यावहारिक [[जल टरबाइन]] का निर्माण किया था। [[भाप टरबाइन]] के आविष्कार का श्रेय ब्रिटिश इंजीनियर सर चार्ल्स पार्सन्स (1854-1931) को, [[प्रतिक्रिया टरबाइन]] के आविष्कार के लिए और स्वीडिश इंजीनियर गुस्टाफ डे लैवाल (1845-1913) को, [[आवेग टरबाइन]] के आविष्कार के लिए दिया जाता है आधुनिक भाप टर्बाइन प्रायः एक ही इकाई में प्रतिक्रिया और आवेग का उपयोग होता है। आम तौर पर प्रतिक्रिया और आवेग की डिग्री इसकी परिधि ब्लेड की जड़ में अलग-अलग होती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब अगर [[टरबाइन]] की कार्यप्रणाली की बात करें तो यह [[न्यूटन के गति नियम|न्यूटन के तीसरे गति नियम]] के अधार पर काम करती है। यानी प्रत्येक क्रिया पर, विपरीत प्रतिक्रिया होती है। इसी तरह टरबाइन का प्रोपेलर काम करता है। प्रोपेलर में लगा स्पाइंडल हवा या पानी पर दबाव बनाता है। इसी दबाव की वजह से प्रोपेलर टरबाइन को पीछे की ओर धक्का मारता है, जिससे वह चलती है। आमतौर पर टरबाइन को एक जगह रख दिया जाता है, ताकि जब भी पानी उससे होकर गुजरे तो टरबाइन के हर ब्लेड पर पड़ने वाले दबाव से वह चल पड़े. हवा या पानी के टरबाइन के साथ एक ही नियम लागू होता है। जितना अधिक पानी या हवा का प्रवाह होगा, टरबाइन उतनी तेज गति से चलेगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कार्यकारी द्रव (वर्किंग फ्लुइड) में [[दबाव ऊर्जा]] और [[गतिज ऊर्जा]] शामिल हैं। द्रव संपीडित या असंपीडित किया जा सकता है। कई भौतिक सिद्धांतों के आरोपण द्वारा टर्बाइनों को इस ऊर्जा को इकट्ठा करने के लिये नियोजित किया जाता है। आवेग टर्बाइनों में उच्च वेग तरल या गैस जेट के प्रवाह का उपयोग रोटर ब्लेड की दिशा बदलने के लिए किया जाता है। परिणामस्वरूप आवेग टरबाइन &lt;br /&gt;
घूमती है और गैस या द्रव धीमी गति से बाहर निकल जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== टर्बाइनों का वर्गीकरण ==&lt;br /&gt;
=== कार्यकारी माध्यम के अनुसार ===&lt;br /&gt;
; सम्पीड्य तरल (compressible fluids)&lt;br /&gt;
* [[गैस टरबाइन]]&lt;br /&gt;
* [[भाप टरबाइन]]&lt;br /&gt;
* [[पवन टरबाइन]] (wind turbine)&lt;br /&gt;
* [[टर्बोजेट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
; असंपीड्य तरल (Incompressible fluids)&lt;br /&gt;
* [[जल टरबाइन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== माध्यम के गति की दिशा के अनुसार ===&lt;br /&gt;
* [[त्रिज्य टरबाइन]] (radial turbine)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[अक्षीय टरबाइन]] (axial turbine)&lt;br /&gt;
:* [[कप्लान टरबाइन]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* स्पर्शरेखीय टरबाइन &lt;br /&gt;
:* [[टेस्ला टरबाइन]]&lt;br /&gt;
:* [[पेल्टन टरबाइन]]&lt;br /&gt;
:* [[फ्रांसिस टरबाइन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== उपयोग के आधार पर ===&lt;br /&gt;
* औद्योगिक टरबाइन&lt;br /&gt;
* ऊर्जा टरबाइन&lt;br /&gt;
* उड्डयन टरबाइन&lt;br /&gt;
* प्रोपेलर टरबाइन&lt;br /&gt;
* कर्षण टरबाइन (turbine traction)&lt;br /&gt;
* सहायक टरबाइन ( auxiliary turbine)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गैस टरबाइन ==&lt;br /&gt;
{{मुख्य|गैस टरबाइन}}&lt;br /&gt;
इस शब्द की विभिन्न परिभाषाएँ दी जाती हैं। विस्तृत परिभाषा के अनुसार गैस टरबाइन वह [[मूल चालक]] (prime mover) है जिसके संपूर्ण उष्मीय चक्र में कार्यकारी तरल गैसीय अवस्था में ही बना रहता है एवं जिसके सभी यंत्रांगों की गति परिभ्रमी होती है। संकीर्ण परिभाषा के अनुसार इस शब्द का प्रयोग सिर्फ उस मुख्य टरबाइन अंग के लिये किया जाता है जिसका माध्यम गरम वायु होती है। कुछ विद्वानों के मतानुसार गैस टरबाइन वह यंत्र है जिसमें प्रवाह प्रक्रम अविरत रहता है एवं शक्ति टरबाइन द्वारा प्राप्त होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जल टरबाइन या जलचक्र ==&lt;br /&gt;
{{मुख्य|जल टरबाइन}}&lt;br /&gt;
उन मूल चालक यंत्रों (prime movers) को कहते हैं जो जलराशि में निहित स्थितिज ऊर्जा को यांत्रिक कार्य में परिवर्तित कर देते हैं। पनचक्कियाँ विभिन्न प्रकार से बनाई जाने पर भी बड़ी ही सरल प्रकार की युक्तियाँ (devices) हैं, जिनका प्रयोग प्रागैतिहासिक काल से ही शक्ति उत्पादन करने के लिए होता चला आया है। समय समय पर आवश्यकताओं तथा परिस्थितियों से प्रेरित होकर लोगों ने इनमें अनेक सुधार किए, अत: जल टरबाइन भी पनचक्की का ही विकसित रूप है। पिछली अर्धशताब्दी से तो इनका इतना उपयोग बढ़ गया है कि इनके द्वारा लगभग सभी सभ्य देशों में जगह जगह, छोटे बड़े अनेक जल-विद्युच्छक्ति-गृह बनाए जाने लगे। इस कारण सुदूर जलहीन देहातों में भी बड़े सस्ते भाव पर बिजली प्राप्त होने लगी और नाना प्रकार के उद्योग धंधों के विकास को प्रत्साहन मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== भाप टरबाइन ==&lt;br /&gt;
{{मुख्य|भाप टरबाइन}}&lt;br /&gt;
भाप टरबाइन (Steam Turbine) एक मूलचालक (prime mover) है, जिसमें [[भाप]] की उष्मा-ऊर्जा को [[गतिज उर्जा]] में परिवर्तित कर, उच्च गतिशील भाप को एक घूर्णक (rotor) पर बँधे हुए बहुत से फलकों पर टकराया जाता है, जिससे फलक परिभ्रमण करते हैं एवं इससे कार्य होता है। अन्योन्यगतिक (reciprocating) भाप इंजन में भाप की स्थैतिक (statical) दाब द्वारा पिस्टन पर कार्य किया जाता है। यद्यपि इंजन में भाप पिस्टन के साथ चलती है, फिर भी इंजन की क्रिया में भाप की गतिज उर्जा का प्रभाव नगणय है। भाप टरबाइन में भाप इंजन की अपेक्षा उच्चतर गति मिल सकती है और गतिसीमा भी बड़ी हा सकती है। टरबाइन के पुर्जों का संतुलन अच्छा रहता है। भाप की समान मात्रा एवं समान अवस्था में भाप टरबाइन भाप इंजन से अधिक शक्ति पैदा कर सकता है। भाप इंजन से कुछ वर्ष काम लेने के बाद भाप की खपत बढ़ जाती है, परंतु टरबाइन में ऐसी अवस्था नहीं आती पृथ्वी पर के सभी मूल चालकों में भाप टरबाइन सबसे अधिक टिकाऊ होता है। टरबाइन से सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इससे घूर्णक गति सीधे प्राप्त होती है, जबकि भाप इंजन में अन्योन्यगति से घूर्णक गति प्राप्त करने के लिए अलग से उपादान का व्यवहर करना पड़ता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[वाष्पित्र]] (बॉयलर) में भाप का जनन उच्च दाब एवं अधिताप (superheat temperature) पर होता है। जब यह भाप टरबाइन के पास पहुँचती है, उस समय इसमें अधिक मात्रा में उष्मा ऊर्जा होती है और इसकी दाब भी इतनी अधिक होती है कि यह निम्नदाब तक प्रसारित हो सकती है। परंतु उस समय इसकी गतिज उर्जा नगण्य होती है। अत: भाप कुछ कार्य कर सके इसके पहले इसकी उष्मा ऊर्जा को गतिज उर्जा में परिवर्तित किया जाता है। यह परिवर्तन, अच्छी तरह अभिकल्पित उपकरण में, भाप को विस्तारित करने से होता है। भाप का प्रसार या तो एक ही क्रिया में पूर्ण किया जाता है, या विभिन्न क्रियाओं में। इसका अर्थ यह होता है कि उष्मा ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए बहुत से स्थिर उपकरण व्यवहार में लाए जाते हैं और प्राय: दो स्थिर उपकरणों के बीच एक गतिमान उपकरण लगा रहता है। स्थिर उपकरण में प्राप्त गतिज ऊर्जा को उसके बाद बँधे हुए गतिमान उपकरण के ऊपर कार्य करने के लिये लगाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[गणकीय तरल यांत्रिकी]] (Computational Fluid Mechanics / CFD)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20080905082503/http://www.du.edu/~jcalvert/tech/fluids/turbine.htm Turbine introductory math]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20190707095635/http://a330.over-blog.com/ Turbines jet powered 1/16 scale Airbus A330]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20080918213457/http://www.howstuffworks.com/turbine3.htm Turbine working process]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20130615103249/http://hindi.indiawaterportal.org/node/37999 मंगल सिंह का मंगल कार्य]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:ऊर्जा]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:यान्त्रिकी]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;अनुनाद सिंह</name></author>
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