<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE</id>
	<title>तुरतुरिया - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE&amp;action=history"/>
	<updated>2026-08-25T04:28:19Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.43.6</generator>
	<entry>
		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE&amp;diff=3401&amp;oldid=prev</id>
		<title>imported&gt;चक्रबोट: ऑटोमैटिड वर्तनी सुधार</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE&amp;diff=3401&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2021-05-05T16:46:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;ऑटोमैटिड वर्तनी सुधार&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&amp;lt;br /&amp;gt;[[छत्तीसगढ़]] अपनी पुरातात्विक सम्पदा के कारण आज [[भारत]] ही नहीं विश्व में भी अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। यहां के 15000गांवो में से 1000ग्रामो में कही न कही प्राचीन इतिहास के साक्ष्य आज भी विध्यमान है जो कि [[छत्तीसगढ]] के लिए एक गौरव की बात है। इसी प्रकार का एक प्राकृतिक एवं धार्र्मिक स्थल [[रायपुर जिला]] से 84 किमी एवं बलौदाबाजार जिला से 29 किमी दूर कसदोल तहसील से १२ किमी दूर प०ह्०न्० ४ बोरसी से ५किमी दूर और् [[सिरपुर]] से 23 किमी की दूरी पर स्थित है जिसे &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;तुरतुरिया&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; के नाम से जाना जाता है। उक्त स्थल को सुरसुरी [[गंगा]] के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थल प्राकृतिक दृश्यो से भरा हुआ एक मनोरम स्थान है जो कि पहाडियो से घिरा हुआ है। इसके समीप ही &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;बारनवापारा अभ्यारण&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; भी स्थित है। तुरतुरिया बहरिया नामक गांव के समीप बलभद्री नाले पर स्थित है। जनश्रुति है कि [[त्रेतायुग]] में महर्षि [[वाल्मीकि]] का [[आश्रम]] यही पर था और लवकुश की यही जन्मस्थली थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस स्थल का नाम &amp;#039;&amp;#039;तुरतुरिया&amp;#039;&amp;#039; पडने का कारण यह है कि बलभद्री नाले का जलप्रवाह चट्टानो के माध्यम से होकर निकलता है तो उसमे से उठने वाले बुलबुलो के कारण तुरतुर की ध्वनि निकलती है। जिसके कारण उसे तुरतुरिया नाम दिया गया है। इसका जलप्रवाह एक लम्बी संकरी सुरंग से होता हुआ आगे जाकर एक जलकुंड में गिरता है जिसका निर्माण प्राचीन ईटों से हुआ है। जिस स्थान पर कुंड में यह जल गिरता है वहां पर एक [[गाय]] का मोख बना दिया गया है जिसके कारण जल उसके मुख से गिरता हुआ दृष्टिगोचर होता है। [[गोमुख]] के दोनो ओर दो प्राचीन प्रस्तर की प्रतिमाए स्थापित है जो कि विष्णु जी की है इनमे से एक प्रतिमा खडी हुई स्थिति में है तथा दूसरी प्रतिमा में [[विष्णु|विष्णुजी]] को [[शेषनाग]] पर बैठे हुए दिखाया गया है। कुंड के समीप ही दो वीरो की प्राचीन पाषाण प्रतिमाए बनी हुई है जिनमे क्रमश: एक वीर एक सिंह को तलवार से मारते हुए प्रदर्शित किया गया है तथा दूसरी प्रतिमा में एक अन्य वीर को एक जानवर की गर्दन मरोडते हुए दिखाया गया है। इस स्थान पर [[शिवलिंग]] काफी संख्या में पाए गए हैं इसके अतिरिक्त प्राचीन पाषाण स्तंभ भी काफी मात्रा में बिखरे पडे है जिनमे कलात्मक खुदाई किया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ शिलालेख भी यहां स्थापित है। कुछ प्राचीन [[बुद्ध|बुध्द]] की प्रतिमाए भी यहां स्थापित है। कुछ भग्न मंदिरो के अवशेष भी मिलते हैं। इस स्थल पर बौध्द, [[वैष्णव]] तथा [[शैव]] धर्म से संबंधित मूर्तियो का पाया जाना भी इस तथ्य को बल देता है कि यहां कभी इन तीनो संप्रदायो की मिलीजुली [[संस्कृति]] रही होगी। ऎसा माना जाता है कि यहां बौध्द विहार थे जिनमे बौध्द भिक्षुणियो का निवास था। [[सिरपुर]] के समीप होने के कारण इस बात को अधिक बल मिलता है कि यह स्थल कभी बौध्द संस्कृति का केन्द्र रहा होगा। यहां से प्राप्त [[शिलालेख|शिलालेखो]] की [[लिपि]] से ऎसा अनुमान लगाया गया है कि यहां से प्राप्त प्रतिमाओ का समय 8-9 वी [[शताब्दी]] है। आज भी यहां [[स्त्री]] पुजारिनो की नियुक्ति होती है जो कि एक प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा है। [[पूष]] माह में यहां तीन दिवसीय [[मेला]] लगता है तथा बडी संख्या में श्रध्दालु यहां आते हैं। धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थल होने के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी यह स्थल [[पर्यटन|पर्यटको]] को अपनी ओर आकर्षित करता है। &lt;br /&gt;
[[चित्र:[[File:Ruined old temple in Turturia.jpg|Ruined old temple in Turturia]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[छत्तीसगढ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:पर्यटन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:धर्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:छत्तीसगढ़]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;चक्रबोट</name></author>
	</entry>
</feed>