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	<title>तौहीद - अवतरण इतिहास</title>
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	<updated>2026-08-21T16:17:21Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>2405:205:C961:9C5D:59CE:26B7:63C5:3DA8: थोड़ा बेहतर</title>
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		<updated>2020-08-22T23:01:14Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;थोड़ा बेहतर&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{इस्लाम}}&lt;br /&gt;
एक [[ख़ुदा]] को मानना​​ [[इस्लाम]] का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसी का नाम तौहीद है, हजरत मुहम्मद [सल्ल०] दीन-ए-इस्लाम के आखरी पैग़म्बर हैं। अल्लाह तआला ने हर कौम और हर जगह अपने सन्देश वाहक यानि पैगम्बर भेजे हैं, इस्लामिक धारणा के अनुसार  हजरत मुहम्मद [सल्ल०] इस सिलसिले की आखरी कड़ी हैं, अन्य धर्मो में बाद में कई पैगम्बर माने जाते हैं। आदम [अलै०] ने तौहीद यानि एक ख़ुदा को मानना​​ और अल्लाह की ज़ात व उसकी सिफात में किसी को शरीक न करने की शिक्षा दी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे जैसे ज़माना तरक्की करता चला गया वैसे वैसे अब्राहमी पंथों के पैगम्बर नयी नयी शिक्षाएँ लाते गए मगर बुनियादी शिक्षाएँ यानि [एक ख़ुदा को मानना​​ और अल्लाह की ज़ात व उसकी सिफात में किसी को शरीक न करना] हर पैगम्बर ने बतायीं और उस पर अमल करने की शिक्षा दीं और खुद भी उन पर अमल करके दिखाया ऐसा इस्लाम के अनुयायिओं का मानना है। दुनियावी चीजें मनुष्य, पशु, दृश्य प्रकृति, सब उसकी पैदा की हुई हैं। ईश्वर एकमात्र और उसका कोई साझी नहीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== शहादत ==&lt;br /&gt;
शहादत रखने का मतलब है कि बंदा मन भाषा से यह स्वीकार करे कि इस ब्रह्मांड का निर्माता और मालिक सिर्फ अल्लाह है, वह सब पर फ़ाइक है, वह किसी की औलाद है न उसकी कोई औलाद है। केवल वही पूजा के योग्य है। किसी और के लिए इससे बढ़कर महिमा और रिफअत और शान-ए-किबरियाई की कल्पना भी कठिन है। वही सर्वशक्तिमान है और किसी को कोई शक्ति नहीं। उसका इरादा इतना शक्तिशाली और ग़ालिब है कि उसे संसार में सब मिलकर भी मगलूब नहीं कर सकते। उसकी शक्तियां और तसरफ़ात सीमा गिनती से बाहर हैं। क़ुरआन-ए-हकीम में है: &amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;big&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;إِنَّمَا اللّهُ إِلَـهٌ وَاحِدٌ سُبْحَانَهُ أَن يَكُونَ لَهُ وَلَدٌ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَات وَمَا فِي الأَرْضِ وَكَفَى بِاللّهِ وَكِيلاًO (النساء، 4 : 171)&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; &amp;lt;/big&amp;gt;&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
अनुवाद: &amp;#039;&amp;#039;बेशक अल्लाह ही ईकता ईश्वर है, वह मुक्त है कि इसके लिए कोई औलाद हो, (सब कुछ) उसी का है जो स्वर्ग में है और जो कुछ ज़मीन में है और अल्लाह का कार निर्माता होना काफी है।&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{इस्लामी विषय}}&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{इस्लामी आधार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:इस्लाम]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:इस्लाम के पाँच मूल स्तंभ]]&lt;/div&gt;</summary>
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