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	<title>धनतेरस - अवतरण इतिहास</title>
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		<updated>2021-05-16T03:24:45Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B527&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/रोहित साव27&quot;&gt;रोहित साव27&lt;/a&gt; के अवतरण 5014939पर वापस ले जाया गया  (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=WP:TW&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;WP:TW (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;ट्विंकल&lt;/a&gt;)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{ज्ञानसन्दूक त्योहार &lt;br /&gt;
| त्योहार_के_नाम = धनतेरस&lt;br /&gt;
|चित्र = Godofayurveda.jpg&lt;br /&gt;
|शीर्षक = धनतेरस व्रत &lt;br /&gt;
|आधिकारिक_नाम = धनतेरस व्रत&lt;br /&gt;
|अन्य नाम = &lt;br /&gt;
|अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], भारतीय प्रवासी&lt;br /&gt;
|उद्देश्य = &lt;br /&gt;
|आरम्भ = &lt;br /&gt;
|तिथि = [[कार्तिक]] [[कृष्ण पक्ष]] की [[त्रयोदशी]] &lt;br /&gt;
|दीर्घ-प्रकार = &lt;br /&gt;
|तारीख़ = &lt;br /&gt;
|तिथि२००६ =&lt;br /&gt;
|तिथि२००७ = &lt;br /&gt;
|तिथि२०१९ = [[२५ अक्तूबर]], [[२०१९]]&lt;br /&gt;
|अनुष्ठान = &lt;br /&gt;
|उत्सव = &lt;br /&gt;
|समान पर्व= &lt;br /&gt;
|type =&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
[[कार्तिक]] माह (पूर्णिमान्त) की [[कृष्ण पक्ष]] की [[त्रयोदशी]] तिथि के दिन [[समुद्र मन्थन|समुद्र-मंन्थन]] के समय [[धन्वन्तरि|भगवान धन्वन्तरि]] अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;धनतेरस&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; या &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;धनत्रयोदशी&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; के नाम से जाना जाता है। [[भारत सरकार]] ने धनतेरस को &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=http://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/story/878764.html |title=धन्वंतरी जयंती राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस घोषित |access-date=27 अक्तूबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171017145921/http://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/story/878764.html |archive-date=17 अक्तूबर 2017 |url-status=dead }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[आगम (जैन)|जैन आगम]] में धनतेरस को &amp;#039;धन्य तेरस&amp;#039; या &amp;#039;ध्यान तेरस&amp;#039; भी कहते हैं। [[महावीर|भगवान महावीर]] इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये [[दीपावली]] के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रथा==&lt;br /&gt;
धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में [[अमृत]] से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन [[धन]] (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर लोग [[धनिया]] के [[बीज]] खरीद कर भी घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://www.india.com/hindi-news/faith-hindi/dhanteras-2020-date-time-dhanteras-kab-hai-will-be-celebrated-on-this-day-know-subh-muhurat-puja-vidhi-or-story-4198149/|title=Dhanteras 2020 Date &amp;amp; Timing: आज या कल, किस दिन मनाया जाएगा धनतेरस , जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि|last=Desk|first=India com Hindi News|website=India News, Breaking News, Entertainment News {{!}} India.com|language=hi|access-date=2020-11-12}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनतेरस के दिन [[चाँदी|चांदी]] खरीदने की भी प्रथा है; जिसके सम्भव न हो पाने पर लोग चांदी के बने बर्तन खरीदते हैं। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह [[चन्द्रमा]] का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में सन्तोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह [[स्वास्थ्य|स्वस्थ]] है, सुखी है, और वही सबसे धनवान है। भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के [[देवता]] भी हैं। उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है। लोग इस दिन ही [[दीपावली]] की रात [[लक्ष्मी]], [[गणेश]] की पूजा हेतु [[मूर्ति]] भी खरीदते हैं। हालाकि यह सब लोकवेद है, जिसका हमारे पवित्र ग्रंथो में कहीं भी वर्णन नहीं है। [[श्रीमद्भगवद्गीता]] अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 में इसे शाश्त्र विरुध्द साधना कहा गया है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web|url=https://news.jagatgururampalji.org/dhanteras-2020-hindi/|title=Dhanteras 2020 Hindi: जानिए धनतेरस से जुड़ी आमधारणा व अंधविश्वास के बारे में|date=2020-11-12|website=S A NEWS|language=en-US|access-date=2020-11-12}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है। इस प्रथा के पीछे एक [[लोककथा]] है। कथा के अनुसार किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था। दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा। राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने [[गंधर्व विवाह|गन्धर्व विवाह]] कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा। परन्तु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा। यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे, उसी समय उनमें से एक ने यम देवता से विनती की- हे यमराज! क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए। दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यम देवता बोले, हे दूत! अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है, इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं, सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीपमाला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== धन्वन्तरि ==&lt;br /&gt;
[[धन्वन्तरि]] देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं, इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। धनतेरस के सन्दर्भ में एक लोक कथा प्रचलित है कि एक बार [[यमराज]] ने यमदूतों से पूछा कि प्राणियों को [[मृत्यु]] की गोद में सुलाते समय तुम्हारे मन में कभी दया का भाव नहीं आता क्या। दूतों ने यमदेवता के भय से पहले तो कहा कि वह अपना कर्तव्य निभाते है और उनकी आज्ञा का पालन करते हें परन्तु जब यमदेवता ने दूतों के मन का भय दूर कर दिया तो उन्होंने कहा कि एक बार राजा हेमा के ब्रह्मचारी पुत्र का प्राण लेते समय उसकी नवविवाहिता पत्नी का विलाप सुनकर हमारा हृदय भी पसीज गया लेकिन विधि के विधान के अनुसार हम चाह कर भी कुछ न कर सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक दूत ने बातों ही बातों में तब यमराज से प्रश्न किया कि अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है क्या। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए यम देवता ने कहा कि जो प्राणी धनतेरस की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगन में यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं। इस दिन लोग यम देवता के नाम पर व्रत भी रखते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धनतेरस के दिन दीप जलाकर भगवान धन्वन्तरि की पूजा करें। भगवान धन्वन्तरि से स्वास्थ और सेहतमंद बनाये रखने हेतु प्रार्थना करें। चांदी का कोई बर्तन या लक्ष्मी गणेश अंकित चांदी का सिक्का खरीदें। नया बर्तन खरीदें जिसमें दीपावली की रात भगवान श्री गणेश व देवी लक्ष्मी के लिए भोग चढ़ाएं। कहा जाता है कि [[समुद्र मन्थन]] के दौरान भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, यही वजह है कि धनतेरस को भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है । धनतेरस दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;https://m.livehindustan.com/astrology/story-happy-dhanteras-2018-send-these-wishes-and-sms-images-and-dhanteras-shayari-to-your-friends-2251786.html&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[आयुर्वेद]]&lt;br /&gt;
*[[समुद्र मन्थन|समुद्र मंथन]]&lt;br /&gt;
*[[अश्विनीकुमार (पौराणिक पात्र)|अश्विनीकुमार]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{आयुर्वेद}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{हिन्दू पर्व-त्यौहार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कृति]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू त्यौहार]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;PQR01</name></author>
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