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	<title>न्यायपालिका - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>106.207.203.237: /* भारतीय न्यायपालिका */</title>
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		<updated>2021-03-01T17:06:06Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;span class=&quot;autocomment&quot;&gt;भारतीय न्यायपालिका&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{वैश्वीकरण|date=अगस्त 2015}}&lt;br /&gt;
{{राजनीति साइडबार}}&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;न्यायपालिका&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (Judiciary या judicial system या judicature) किसी भी [[जनतंत्र]] के तीन प्रमुख अंगों में से एक है। अन्य दो अंग हैं - [[कार्यपालिका]] और [[व्यवस्थापिका]]। न्यायपालिका, संप्रभुतासम्पन्न राज्य की तरफ से [[कानून]] का सही अर्थ निकालती है एवं कानून के अनुसार न चलने वालों को दण्डित करती है। इस प्रकार न्यायपालिका विवादों को सुलझाने एवं अपराध कम करने का काम करती है जो अप्रत्यक्ष रूप से समाज के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। [[शक्तियों का पृथक्करण|शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धान्त]] के अनुरूप न्यायपालिका स्वयं कोई नियम नहीं बनाती और न ही यह कानून का क्रियान्यवन कराती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सबको समान न्याय सुनिश्चित करना न्यायपालिका का असली काम है। न्यायपालिका के अन्तर्गत कोई एक सर्वोच्च न्यायालय होता है एवं उसके अधीन विभिन्न न्यायालय (कोर्ट) होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय न्यायपालिका==&lt;br /&gt;
{{मुख्य|भारत की न्यायपालिका}}&lt;br /&gt;
भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका का शीर्ष [[सर्वोच्च न्यायालय]] है, जिसका प्रधान [[प्रधान न्यायाधीश]] होता है। [[सर्वोच्च न्यायालय]] को अपने नये मामलों तथा उच्च न्यायालयों के विवादों, दोनो को देखने का अधिकार है। भारत में 25 [[उच्च न्यायालय]] हैं, जिनके अधिकार और उत्तरदायित्व [[सर्वोच्च न्यायालय]] की अपेक्षा सीमित हैं। न्यायपालिका और [[व्यवस्थापिका]] के परस्पर मतभेद या विवाद का सुलह [[राष्ट्रपति]] करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== राज्य न्यायपालिका === &lt;br /&gt;
राज्य न्यायपालिका में तीन प्रकार की पीठें होती हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;एकल&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; जिसके निर्णय को उच्च न्यायालय की डिवीजनल/खंडपीठ/[[भारत का उच्चतम न्यायालय|सर्वोच्च न्यायालय]] में चुनौती दी जा सकती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;खंड पीठ&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; 2 या 3 जजों के मेल से बनी होती है जिसके निर्णय केवल [[भारत का उच्चतम न्यायालय|उच्चतम न्यायालय]] में चुनौती पा सकते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;संवैधानिक/फुल बेंच&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; सभी संवैधानिक व्याख्या से संबधित वाद इस प्रकार की पीठ सुनती है इसमे कम से कम पाँच जज होते हैं&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== अधीनस्थ न्यायालय === &lt;br /&gt;
इस स्तर पर सिविल आपराधिक मामलों की सुनवाई अलग अलग होती है इस स्तर पर सिविल तथा सेशन कोर्ट अलग अलग होते है इस स्तर के जज सामान्य भर्ती परीक्षा के आधार पर भर्ती होते है उनकी नियुक्ति राज्यपाल राज्य मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर करता है&amp;lt;br /&amp;gt; &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;फास्ट ट्रेक कोर्ट&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; – ये अतिरिक्त सत्र न्यायालय है इनक गठन दीर्घावधि से लंबित अपराध तथा अंडर ट्रायल वादों के तीव्रता से निपटारे हेतु किया गया है&amp;lt;br /&amp;gt;ये अतिरिक्त सत्र न्यायालय है इनका गठन दीर्घावधि से लंबित अपराध तथा अंडर ट्रायल वादों के तीव्रता से निपटारे हेतु किया गया है&amp;lt;br /&amp;gt; इसके पीछे कारण यह था कि वाद लम्बा चलने से न्याय की क्षति होती है तथा न्याय की निरोधक शक्ति कम पड जाती है जेल में भीड बढ जाती है 10 वे वित्त आयोग की सलाह पर केद्र सरकार ने राज्य सरकारों को 1 अप्रैल 2001 से 1734 फास्ट ट्रेक कोर्ट गठित करने का आदेश दिया अतिरिक्त सेशन जज याँ उंचे पद से सेवानिवृत जज इस प्रकार के कोर्टो में जज होता है इस प्रकार के कोर्टो में वाद लंबित करना संभव नहीं होता है हर वाद को निर्धारित स्मय में निपटाना होता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
* [[भारत की न्यायपालिका]]&lt;br /&gt;
* [[सर्वोच्च न्यायालय]]&lt;br /&gt;
* [[भारत का संविधान]]&lt;br /&gt;
* [[लोक अदालत]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20120204074324/http://adaalat.in/ अदालत] (वेबसाईट)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20100102233557/http://prabhasakshi.com/ShowArticle.aspx?ArticleId=091116-115140-160010 न्याय का बाजार] (दीनानाथ मिश्र)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20160305122736/http://vichitra-vichitra.blogspot.com/2011/01/blog-post_2449.html न्यायपालिका पर भीतरी आघात] (एस शंकर)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राजनीति]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:समाजशास्त्र]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:विधि]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:न्यायपालिकाएँ|*]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>106.207.203.237</name></author>
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