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	<title>पदार्थ - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;संजीव कुमार: 223.189.187.89 (Talk) के संपादनों को हटाकर रोहित साव27 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<updated>2021-08-15T18:25:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/223.189.187.89&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/223.189.187.89&quot;&gt;223.189.187.89&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:223.189.187.89&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:223.189.187.89 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B527&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:रोहित साव27 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;रोहित साव27&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{एक स्रोत|date=अप्रैल 2020}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Drop closeup.jpg|अंगूठाकार]]&lt;br /&gt;
[[रसायन विज्ञान]] और [[भौतिक शास्त्र|भौतिक विज्ञान]] में &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;पदार्थ&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (matter) उसे कहते हैं जो स्थान घेरता है व जिसमे [[द्रव्यमान]] (mass) होता है। पदार्थ और [[ऊर्जा]] दो अलग-अलग वस्तुएं हैं। [[विज्ञान]] के आरम्भिक विकास के दिनों में ऐसा माना जाता था कि पदार्थ न तो उत्पन्न किया जा सकता है, न नष्ट ही किया जा सकता है, अर्थात् पदार्थ अविनाशी है। इसे [[द्रव्य की अविनाशिता का नियम|पदार्थ की अविनाशिता का नियम]] कहा जाता था। किन्तु अब यह स्थापित हो गया है कि पदार्थ और [[ऊर्जा]] का परस्पर परिवर्तन सम्भव है। यह परिवर्तन [[अल्बर्ट आइंस्टीन|आइन्स्टीन]] के प्रसिद्ध समीकरण &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;E=m*c&amp;lt;su &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; के अनुसार होता है।&lt;br /&gt;
पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती हैं।&lt;br /&gt;
पदार्थ की मुख्य अवस्थाएं हैं - [[ठोस]], [[द्रव]] तथा [[गैस]]। इसके अतिरिक्त कुछ विशेष परिस्थितियों में पदार्थ [[प्लाज़्मा (भौतिकी)|प्लाज्मा]], अतितरल &lt;br /&gt;
(सुपरफ्लुइड), &lt;br /&gt;
अतिठोस आदि अन्य अवस्थायें भी ग्रहण करता है।2&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिभाषा ==&lt;br /&gt;
पदार्थ की आम परिभाषा है कि &amp;#039;कुछ भी&amp;#039; जिसका कुछ-न-कुछ वजन (Mass) हो और कुछ-न-कुछ &amp;#039;जगह घेरती&amp;#039; (Volume) हो उसे पदार्थ कहते है। उद्धरण के तौर पर, एक [[मोटरवाहन|कार]] जिसका वजन होता है और वह जगह भी घेरती है उसे पदार्थ कहेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पदार्थ के कणों की विशेषताएँ ==&lt;br /&gt;
पदार्थ के कणों की विशेषताये-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* पदार्थ के कण बहुत छोटे होते हैं। &lt;br /&gt;
* पदार्थ के कणों के बीच स्थान होता है। &lt;br /&gt;
* पदार्थ के कण निरंतर घूमते रहते हैं। &lt;br /&gt;
* पदार्थ के कण एक दूसरे को आकर्षित करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पदार्थ की अवस्थाएं ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पदार्थ तीन अवस्थाओं- [[ठोस]], [[द्रव]] और [[गैस]] में पाये जाते हैं। ताप और दाब की दी गई निश्चित परिस्थितियों में, कोइ पदार्थ किस अवस्था में रहेगा यह पदार्थ के कणों के मध्य के दो विरोधी कारकों [[अंतराआण्विक बल]] और [[ऊष्मीय ऊर्जा|उष्मीय ऊर्जा]] के सम्मिलित प्रभाव पर निर्भर करता है।&lt;br /&gt;
अंतराआण्विक बलों की प्रवृत्ति अणुओं (अथवा परमाणुओं अथवा आयनों) को समीप रखने की होती है, जबकि उष्मीय ऊर्जा की प्रवृत्ति उन कणों को तीव्रगामी बनाकर पृथक रखने की होती&lt;br /&gt;
है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;ReferenceA&amp;quot;&amp;gt;रसायनशास्त्र, भाग-१, (कक्षा १२), एनसीईआरटी, नई दिल्ली, पृष्ठ-२&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== ठोस ===&lt;br /&gt;
[[File:Solid state of matter.png|thumb|पदार्थ की ठोस अवस्था]]&lt;br /&gt;
ठोस में, कण बारीकी से भरे होते हैं। ठोस के कणों में आकर्षण बल (Force of attaraction) आधिक होने के कारण इनका निश्चित आकार और आयतन होता है। ठोस के कुछ आम उद्हरण - जैस पत्थर, ईट, बॉल, कार, बस आदि।&amp;lt;ref name=&amp;quot;ReferenceA&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== द्रव === &lt;br /&gt;
द्रव में कणों के मध्य बन्धन ठोस की तुलना में कम होती है अतः कण गतिमान होते हैं। इसका निश्चित आकर नहीं होता मतलब इसे जिस आकार में ढाल दो उसी में ढल जाता है लेकिन इसका आयतन निश्चित होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== गैस ===&lt;br /&gt;
गैस में कणों के मध्य बन्धन ठोस और द्रव की तुलना में कम होती है अतः कण बहुत गतिमान होते हैं। इनका न तो निश्चित आकार (Shape) और न ही निश्चित आयतन (Volume) होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन ==&lt;br /&gt;
[[File:पदार्थ की बदलती अवस्थाए.PNG|thumb|पदार्थ की बदलती अवस्थाए]]&lt;br /&gt;
पदार्थ तीन भौतिक अवस्था में रह सकते है :- ठोस अवस्था, द्रव अवस्था और गैस अवस्था। &lt;br /&gt;
उदाहरण के तौर पर, पानी बर्फ के रूप में ठोस अवस्था में रह सकता है, पानी के रूप में द्रव अवस्था में रह सकता है और भाप के रूप में गैस अवस्था में रह सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==भारतीय दर्शन में पदार्थ==&lt;br /&gt;
भारत के विभिन्न दर्शनकारों ने पदार्थों की भिन्न-भिन्न संख्या मानी है। [[अक्षपाद गौतम|गौतम]] ने 16 पदार्थ माने, [[वेदान्त दर्शन|वेदान्तियों]] ने चित् और अचित् दो पदार्थ माने, [[रामानुज]] ने उनमें एक &amp;#039;ईश्वर&amp;#039; और जोड़ दिया। [[सांख्य दर्शन|सांख्यदर्शन]] में 25 तत्त्व हैं और [[मीमांसा दर्शन|मीमांसकों]] ने 8 तत्त्व माने हैं। वस्तुतः इन सभी दर्शनों में ‘पदार्थ’ शब्द का प्रयोग किसी एक विशिष्ट अर्थ में नहीं किया गया, प्रत्युत उन सभी विषयों का, जिनका विवेचन उन-उन दर्शनों में है, पदार्थ नाम दे दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{reflist}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[पदार्थ की अवस्थाएँ]]&lt;br /&gt;
* [[द्रव्य की अविनाशिता का नियम|पदार्थ की अविनाशिता का नियम]]&lt;br /&gt;
* [[पदार्थ विज्ञान]]&lt;br /&gt;
* [[पदार्थवाद]]&lt;br /&gt;
* [[पदार्थ (भारतीय दर्शन)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भौतिकी]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:पदार्थ]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;संजीव कुमार</name></author>
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