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	<title>परिवर्तिनी एकादशी - अवतरण इतिहास</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोतहीन|date=अगस्त 2012}}&lt;br /&gt;
{{ज्ञानसन्दूक त्योहार &lt;br /&gt;
| त्योहार_के_नाम = परिवर्तिनी एकादशी&lt;br /&gt;
|चित्र = &lt;br /&gt;
|शीर्षक = परिवर्तिनी एकादशी व्रत &lt;br /&gt;
|आधिकारिक_नाम = परिवर्तिनी एकादशी व्रत&lt;br /&gt;
|अन्य नाम = &lt;br /&gt;
|अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], भारतीय प्रवासी&lt;br /&gt;
|उद्देश्य = सर्वकामना पूर्ति&lt;br /&gt;
|आरम्भ = &lt;br /&gt;
|तिथि = भाद्रपद शुक्ल एकादशी&lt;br /&gt;
|दीर्घ-प्रकार = &lt;br /&gt;
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|तिथि२००६ = सभी [[एकादशी]]&lt;br /&gt;
|तिथि२००७ = &lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[हिन्दू धर्म|हिंदू]] धर्म में [[एकादशी]] का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब [[अधिक मास|अधिकमास]] या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। यह एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। इस दिन कृष्ण जी का जलवा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पौराणिक कथा==&lt;br /&gt;
[[युधिष्ठिर]] कहने लगे कि हे भगवान! [[भाद्रपद]] [[शुक्ल पक्ष|शुक्ल]] एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। तब भगवान [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] कहने लगे कि इस पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष को देने वाली तथा सब पापों का नाश करने वाली, उत्तम वामन एकादशी का माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ तुम ध्यानपूर्वक सुनो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। अत: मोक्ष की इच्छा करने वाले मनुष्य इस व्रत को अवश्य करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, [[विष्णु]] सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान के वचन सुनकर युधिष्ठिर बोले कि भगवान! मुझे अतिसंदेह हो रहा है कि आप किस प्रकार सोते और करवट लेते हैं तथा किस तरह राजा बलि बलि को बाँधा और वामन रूप रखकर क्या-क्या लीलाएँ कीं? चातुर्मास के व्रत की क्या ‍विधि है तथा आपके शयन करने पर मनुष्य का क्या कर्तव्य है। सो आप मुझसे विस्तार से बताइए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! अब आप सब पापों को नष्ट करने वाली कथा का श्रवण करें। त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य था। वह मेरा परम भक्त था। विविध प्रकार के वेद सूक्तों से मेरा पूजन किया करता था और नित्य ही ब्राह्मणों का पूजन तथा यज्ञ के आयोजन करता था, लेकिन [[इन्द्र|इंद्र]] से द्वेष के कारण उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताओं को जीत लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्देश्य ==&lt;br /&gt;
इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{हिन्दू पर्व-त्यौहार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कृति]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू त्यौहार]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:धार्मिक त्यौहार]]&lt;br /&gt;
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