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	<title>बधिर शिक्षा - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<updated>2019-03-02T13:37:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;current events add kiya&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{आधार}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Deaf students at Kayieye school Kenya.jpg|right|thumb|300px|केन्या में बहरे बच्चों की एक कक्षा]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;बधिर शिक्षा&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (Deaf education) से अभिप्राय उन विद्यार्थियों की शिक्षा से है जो भिन्न-भिन्न स्तर की [[बधिरता]] से प्रभावित हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बधिर बालक दो प्रकार के होते हैं। प्रथम श्रेणी में उनको रखा जा सकता है जो नितांत बधिर होते हैं। इनमें तनिक भी श्रवणशक्ति नहीं होती इसलिए शब्दों को न सुनने के कारण वे उच्चारण भी नहीं कर पाते क्योंकि भाषा का सीखना अनुकरण पर अधिक निर्भर होता है। दूसरे प्रकार के बधिर वे होते हैं जिनकी श्रवणशक्ति इतनी कमजोर होती है कि वे साधारण बातचीत नहीं सुन सकते किंतु [[श्रवणयंत्र]] की सहायता से सुन सकते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्जित बधिरता के कुछ सामान्य कारण होते हैं। इसको समझने के लिए कानों की बनावट के विषय में जानना आवश्यक है सामान्य रूप से कानों के तीन भाग होते हें : १. बाह्यकर्ण २. मध्यकर्ण तथा ३. आंतरिक कर्ण। बाह्यकर्ण के कारण केवल एक प्रतिशत बधिर होते हैं जो खाज, फोड़े फुंसी या जलने के कारण केवल प्रभावित होता है। मध्यकर्ण की खराबी से उत्पन्न हुई बधिरता के मुख्य कारण हैं, कान बहना, स्कारलेट फीवर (लाल बुखार), चेचक, निमोनिया इत्यादि। मध्यकर्ण के कारण ४५ प्रतिशत बधिरता होती है। इन सबके अतिरिक्त कान के स्नायुतंतुओं की खराबी के कारण भी बधिरता होती है। इन स्नायुतंतुओं का हानि पहुँचानेवाले कारण गर्दनतोड़ बुखार, मियादी ज्वर होते हैं। कभी कभी चोट लगने से भी बहरापन हो जाता है।&lt;br /&gt;
1st March 2019&lt;br /&gt;
इंडियन साइन लेंग्वेज डिक्शनरी में दूसरे संस्करण में 6000 शब्द सम्मिलित किया गया ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शिक्षाप्रणाली==&lt;br /&gt;
इस समय संसार में बधिरों की शिक्षा के लिए अनेक प्रणालियाँ हैं। सर्वोत्तम प्रणाली कौन सी है, इस विषय पर लोगों में मतभेद है। &amp;#039;अमेरिकन ऐनल्ज़ ऑव द डेफ़&amp;#039; के अनुसार शिक्षा की विभिन्न प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं :&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;मौखिक प्रणाली&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (ओरल मेथड)- बोलकर समझाना तथा लिखना शिक्षा के मुख्य उद्देश्य हैं। पाठ्यक्रम के प्रारंभिक भाग में सर्वत्र बधिरों के प्राय: प्रत्येक स्कूल में प्राकृतिक संकेतों का प्रयोग करने दिया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;हस्त प्रणाली&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (मैनुअल मेथड)- संकेत हस्त, वर्णमाला तथा लिखना इन तीनों का प्रयोग शिक्षा देने के लिए किया जाता है। मुख्य उद्देश्य मानसिक विकास में तथा लिखित भाषा के प्रयोग एवं अर्थ समझने में सहायता पहुंचाना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;हस्त वर्णमाला प्रणाली&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (मैनुअल अल्फ़ाबेट मेथड)- हस्त वर्णमाला तथा लिखना प्रधान साधन है जिनका प्रयोग विद्यार्थियों को शिक्षा देने में किया जाता है। बोलना तथा बोलकर समझना ये दोनों बातें सभी बधिर बच्चों को, जहाँ यह प्रणाली प्रचलित है, सिखाई जाती हैं।&lt;br /&gt;
  &lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;श्रवण प्रणाली&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (ओरीकुलर मेथड)- अर्द्ध बधिर विद्यार्थियों की श्रवण शक्ति का प्रयोग यथासंभव अधिकाधिक किया जाता है। उनको मुख्यतया वाणी, श्रवण शक्ति तथा लिखने की सहायता से शिक्षा दी जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;मिश्रित प्रणाली&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (कंबाइंड सिस्टम)- बोलना और बोलकर समझना बहुत महत्वपूर्ण समझा जाता है। किंतु मानसिक विकास तथा भाषा की प्रवृत्ति को और भी महत्वपूर्ण समझा जाता है। विश्वास है कि कुछ अवस्थाओं में इन दोनों चीजों को हस्त तथा हस्त वर्णमाला प्रणाली द्वारा सर्वोत्तम रूप में अग्रसर किया जा सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जहाँ तक परिस्थितियाँ सहायक होती हैं, प्रत्येक विद्यार्थी के लिए उसकी व्यक्तिगत प्रवृत्ति के अनुसार ही प्रणाली चुनी जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सार्वजनिक जीवन में उचित स्थान ग्रहण करने के लिए बधिरों के लिए यह आवश्यक है कि अपनी वाणी का विकास करें, भाषा सीखें और होठों की हरकत समझें। अत: इन तीनों गुणों का विकास करने का अवसर प्रत्येक बधिर बच्चे को देना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि मौखिक प्रणाली तथा सुनने में सहायक यंत्रों के द्वारा विद्यार्थी उन्नति कर सकें तो उनकी शिक्षा के लिए संकेतों तथा हस्त प्रणाली का प्रयोग नहीं करना चाहिए। किंतु यदि विद्यार्थी की उससे कुछ उन्नति होती न दिखाई पड़े तो उसे अच्छा नागरिक बनाने के लिए संकेतों तथा हस्त वर्णमाला का उपयोग करना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[सांकेतिक भाषा]]&lt;br /&gt;
*[[बधिरता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:शिक्षा]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:अपंगता]]&lt;/div&gt;</summary>
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