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	<title>बाल्कन युद्ध - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;अनुनाद सिंह २० मार्च २०२१ को १५:२९ बजे</title>
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		<updated>2021-03-20T15:29:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[चित्र:GuerrasBalcánicasSituaciónPrebélica1912.svg|right|thumb|300px|बाल्कन युद्धों के पूर्व (सन १९१२ ) की स्थिति]]&lt;br /&gt;
[[चित्र:Balkan League poster.png|right|thumb|300px|बाल्कन लीग का प्रचारात्मक पोस्टर]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;बाल्कन युद्ध&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; से आशय सन् १९१२ और १९१३ में [[बाल्कन प्रायदीप]] में हुए दो युद्धों से है। बाल्कन के प्रथम युद्ध में चार बाल्कन राज्यों ने [[तुर्क साम्राज्य]] को हरा दिया था। दूसरे बाल्कन युद्ध [[बुल्गारिया]] और प्रथम बाल्कन युद्ध के पाँच देशों (सर्बिया, यूनान, रुमानिया, मांटीनीग्रो और रोमानिया) के बीच हुआ था। इसमें बल्गारिया की बड़ी मानहानि हुई और उसे कई क्षेत्रों से हाथ धोना पड़। ये दोनों युद्ध [[तुर्की साम्राज्य]] के लिए घातक सिद्ध हुए और उसे अपने अधिकांश यूरोपीय क्षेत्र से हाथ धोना पड़ा। ये युद्ध [[पहला विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]] के महत्वपूर्ण कारणों में से एक कारण माने जाते हैं। &amp;lt;ref&amp;gt;[https://en.wikipedia.org/wiki/Balkan_Wars#CITEREFHall2000 Hall 2000].&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रथम बाल्कन युद्ध==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Balkan troubles1.jpg|right|thumb|300px|जर्मनी, फ्रांस, रूस, आस्ट्रिया-हंगरी, और ब्रिटेन बाल्कन के साम्राज्यवादी तथा राष्ट्रवादी तनाव रूपी &amp;#039;सिमसिमाते हंडे&amp;#039; के ढक्कन को बन्द रखने (सामान्य यूरोपीय युद्ध को रोकने) का प्रयास करते हुए । १९१२ और १९१३ में वे इसमें सफल रहे किन्तु १९१४ में नहीं।]] &lt;br /&gt;
जर्मनी, फ्रांस, रूस, ऑस्ट्रिया-हंगरी, और ब्रिटेन में हो रहे एक सामान्य यूरोपीय युद्ध को रोकने के लिए बाल्कन में साम्राज्यवादी और राष्ट्रवादी तनावों से सिहर हंडा पर ढक्कन रखने के लिए प्रयास किया गया। वे 1912 और 1913 में सफल रहे , लेकिन 1334 में असफल हो गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सन् 1912 में [[रूस]] और [[फ़्रान्स|फ्रांस]] में यह समझौता हो गया कि यदि [[बाल्कन|बाल्कन प्रायद्वीप]] के प्रश्न पर [[जर्मनी]] अथवा [[ऑस्ट्रिया]] रूस से युद्ध करेंगे तो फ्रांस रूस के साथ रहेगा। फ्रांसीसी सहायता का आश्वासन मिल जाने पर बाल्कन प्रायद्वीप में रूस बेरोक टोक हस्तक्षेप करने लगा। रूस के उकसाने पर चार बाल्कन राज्यों ने मिलकर सन् 1912 में गुप्त रूप से एक समझौता किया। ये राज्य थे [[यूनान]], [[बल्गेरिया]], [[मांटीनीग्रो]] तथा [[सर्विया]]। इस समय [[तुर्की|टर्की]] निर्बल हो गया था और वहाँ आंतरिक अशांति फैली हुई थी। बाल्कन राज्यों के समझौते का उद्देश्य यह था कि वे टर्की से युद्ध करके उसके शासन को यूरोप से समाप्त कर दें, इसके बाद जीते हुए क्षेत्रों को आपस में बाँट लें। [[मैसीडोनिया]] पर इन राज्यों की लोलुप दृष्टि विशेष रूप से थी। इसलिए इस समझौते में यह भी स्पष्ट कर लिया गया था कि टर्की की पराजय के पश्चात् मैसीडोनिया के प्रदेशों को किस प्रकार विभक्त किया जाएगा। यह निश्चित हो गया था कि मैसीडोनिया का प्रमुख भाग [[बलगेरिया]] को दिया जाएगा तथा [[अल्बानिया]], [[सर्विया]] को दे दिया जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह समझौता हो जाने पर बाल्कन राज्यों ने एक बहाना लेकर टर्की के विरुद्ध 17 अक्टूबर 1912 को युद्ध की घोषणा कर दी। इन राज्यों का कहना था कि मैसीडोनिया में ईसाइयों के साथ बड़ा क्रूर अत्याचार हो रहा है। अत: वे मैसीडोनिया को टर्की के घृणित शासन से मुक्त करना चाहते हैं। उन्होंने टर्की से मैसीडोनिया में सुधार करने को कहा पर टर्की के इन्कार करने पर युद्ध प्रारंभ हो गया। तुर्की सेना बुरी तरह हार गई और बाल्कन राज्यों को आशातीत सफलता मिली। मॉटीनीग्रो तथा सर्विया की सेनाओं ने अल्बानिया पर अपना अधिकार कर लिया। यूनानी सेनाओं ने एड्रियानोपल के प्रसिद्ध दुर्ग को तुर्कों से छीन लिया। बलगेरियन सेना थे्रस पर आक्रमण करके प्रमुख तुर्क सेना पर विजय प्राप्त करती हुई [[कांस्टैटिनोपल]] के बहुत निकट पहुँच गई। इस समय टर्की के सामने एक ही रास्ता था। उधर यूरोप के अन्य राज्य टर्की की दशा पर चिंतित हो रहे थे। उन्होंने हस्तक्षेप करके टर्की तथा बाल्कन राज्यों में एक अस्थायी संधि करवा दी। तत्पश्चात् दोनों पक्षों के प्रतिनिधि स्थायी संधि करने के लिए लंदन में एकत्रित हुए। बाल्कन राज्यों की संधि की शर्तें टर्की के लिए बड़ी मँहगी थीं। उनको स्वीकार करने पर टर्की का यूरोप से अस्तित्व ही मिट जाता। इस पर [[युवा तुर्क आन्दोलन|तरुण तुर्क दल]] के नेतृत्व में तुर्को ने पुनः युद्ध छेड़ दिया। इस बार तुर्कों की और बुरी तरह हार हुई और वे अपने तीन और बड़े दुर्गों से हाथ धो बैठे। हताश होकर टर्की के सुल्तान ने संधि का प्रस्ताव किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक बार पुन: दोनों पक्षों के प्रतिनिधि 1913 में संधि करने के लिए [[लंदन]] में एकत्रित हुए। 30 मई सन् 1913 को [[लन्दन की संधि]] हो गई जिसके द्वारा प्रथम बाल्कन युद्ध समाप्त हो गया। [[पेरू (पक्षी)|टर्की]] को क्रीट तथा अन्य यूरोपीय क्षेत्रों से वंचित कर दिया गया और [[उस्मानी साम्राज्य|ऑटोमन साम्राज्य]] केवल [[कांस्टैंटिनोपल]] तथा उसके आसपास के कुछ भाग तक ही सीमित रह गया। परन्तु इस प्रकार छीने गए प्रदेशों का आपस में बँटवारा करने के संबंध में बाल्कन राज्यों में परस्पर मतभेद हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== द्वितीय बाल्कन युद्ध ==&lt;br /&gt;
यह कहना जरा कठिन है कि द्वितीय बाल्कन युद्ध का उत्तरदायित्व किस पर था। इसमें संदेह नहीं कि इस युद्ध में [[ऑस्ट्रिया]] तथा [[इटली]] जैसे बड़े देशों का हाथ था। बाल्कन युद्धों से पूर्व जो समझौता हुआ था उसके अनुसार सर्बिया को अल्बानिया मिल जाना चाहिए था। पर ऑस्ट्रिया किसी मूल्य पर सर्बिया के अधीन अल्बानिया नहीं होने देना चाहता था। इसका कारण यह था कि बोस्निया तथा हर्ज़ेगोविना की आबादी मुख्य: यूगोस्लाव तथा सर्बों की थी। सर्बिया के साथ मिलकर ये प्रदेश एक शक्तिशाली यूगोस्लाव राज्य का निर्माण करना चाह रहे थे। यदि ऐसा हो जाता तो सर्बिया की शक्ति बढ़ जाती जो ऑस्ट्रिया के लिए अहितकर थी। फिर, अल्बानिया पर अधिकार प्राप्त करने से सर्बिया की पहुँच एड्रियाटिक तक हो जाती। वास्तव में ऑस्ट्रिया की दृष्टि स्वयं अल्बानिया को एक पृथक् राज्य घोषित करवा दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अल्बानिया के पृथक् अस्तित्व के फलस्वरूप मैसीडोनिया का विभाजन और भी दुष्कर प्रतीत होने लगा। अब सर्बिया ने यह इच्छा प्रकट की कि अल्बानिया न मिलने पर उसे मैसीडोनिया में अधिक भाग मिलना चाहिए। पर इस संबंध में सर्बिया तथा बलगेरिया परस्पर सहमत न हो सके। जब यह मामला शांतिपूर्वक न सुलझ सका तब दोनों शक्तियों ने बलप्रयोग करने का निश्चय किया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
29 जून 1913 का बलगेरिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। इस युद्ध को &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;द्वितीय बाल्कन युद्ध&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; की संज्ञा दी जाती है। इस युद्ध में यूनान, रूमानिया तथा मांटीनीग्रो ने बलगेरिया के विरुद्ध सर्बिया का साथ दिया। अपने खोए हुए प्रदेशों का कुछ भाग मिल जाने की आशा में टर्की ने भी बलगेरिया के विरुद्ध बाल्कन राज्यों की सहायता की। विवश होकर बलगेरिया ने संधि की प्रार्थना की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने रूमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में 10 अगस्त 1913 को एक संधि की। इस संधि के कारण [[बलगैरिया]] की बड़ी मानहानि हुई। संधि के द्वारा सर्बिया तथा मांटीनीग्रो ने बहुत से प्रदेश प्राप्त किए। यूनान ने भी सैलोनिका प्रदेश पर अधिकार प्राप्त कर लिया। इस विभाजन के बाद मैसीडोनिया का बचा हुआ भाग ही बलगेरिया को मिल सका। इस प्रकार द्वितीय बाल्कन युद्ध समाप्त हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[बुखारेस्ट]] की संधि द्वारा बाल्कन राज्यों में कुछ समय के लिए शांति स्थापित हो गई। बाल्कन युद्धों के फलस्वरूप सर्बिया तथा यूनान सर्वाधिक लाभान्वित हुए। इन युद्धों का एक बड़ा परिणाम यह हुआ कि यूरोप में तुर्की साम्राज्य लगभग समाप्त हो गया और बाल्कन प्रायद्वीप में ईसाई राज्यों का परिवर्धन प्रारंभ हो गया। यह कहना अनुचित होगा कि उपर्युक्त युद्धों से बाल्कन समस्या शांत हो गई। द्वितीय बाल्कन युद्ध के द्वारा बाल्कन राज्यों में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो गई जिसका विस्फोटक परिणाम था [[पहला विश्व युद्ध|प्रथम महायुद्ध]]।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===बुखारेस्ट की संधि की शर्तें===&lt;br /&gt;
{{मुख्य|बुखारेस्ट की संधि}}&lt;br /&gt;
द्वितीय बाल्कन युद्ध का अंत बुखारेस्ट की संधि के द्वारा हुआ। बल्गारिया ने यह संधि ग्रीस, सर्बिया, रूमानिया और टर्की के साथ की। इस संधि में निम्न बातों का निश्चय हुआ-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*(१) रूमानिया को डेन्यूब नदी के तट पर स्थित सिलिस्ट्रिया का दुर्ग और दोबरूजा का दक्षिण प्रदेश प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*(२) सर्बिया को सम्पूर्ण उत्तरी मेसिडोनिया और मीनास्टर प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*(३) ग्रीस को फ्लोरिना से थ्रेस तक का मेसिडोनिया का सम्पूर्ण दक्षिणी प्रदेश और ईजियन सागर का तटवर्ती बन्दरगाह कबाला तथा उनका पृष्ठ प्रदेश प्राप्त हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*(४) बल्गारिया के पास पश्चिमी थ्रेस का प्रदेश रहा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*(५) टर्की को एड्रियानोपिल और उसके आसपास का प्रदेश प्राप्त हुआ। आस्ट्रिया और इटली ने सर्बिया तथा मोंटीनीग्रो को अल्बानिया का स्वतंत्र राज्य खड़ा करके एड्रियाटिक सागर से दूर रखा। इसी कारण सर्बिया ने मेसिडोनिया में उसकी क्षति-पूर्ति करने के लिये प्रयत्न किया, जिसके फलस्वरूप बल्गारिया से उसका झगड़ा हुआ और आपस में युद्ध हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाल्कन युद्धों के परिणाम==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Balkans Animation 1800-2008.gif|right|thumb|300px|बाल्कन का आधुनिक इतिहास (सन १८०० के बाद)]]&lt;br /&gt;
इसके मुख्य परिणाम निम्नलिखित हुए-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===टर्की के यूरोपीय राज्य का विनाश===&lt;br /&gt;
इन युद्धों के कारण टर्की के यूरोपीयन राज्यों का विनाश हुआ। यद्यपि यूरोप में टर्की के पास [[कुस्तुनतुनिया]] तथा [[एड्रियानोपिल]] के मध्य का प्रदेश ही शेष रहा, किन्तु वह अब केवल एशियाई राज्य रह गया। उसके अधिकार से उसके यूरोपीय भाग का 5/6 भाग उसके हाथ से निकल गया तथा 2/3 यूरोपीय प्रजा पर से उसके अधिकार का अंत हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===बाल्कन राज्यों का विस्तार===&lt;br /&gt;
इन युद्धों से बाल्कन राज्यों के विस्तार में बड़ी वृद्धि हुई। इन सब राज्यों में सबसे अधिक लाभ सर्बिया और ग्रीस को प्राप्त हुए। इनके राज्य पहले से दुगुने हो गए। मोंटोनीग्रो का राज्य पहले से &lt;br /&gt;
दुगुना हो गया। [[रोमानिया|रूमानिया]] का भी विस्तार हुआ। इन युद्धों में [[बुल्गारिया|बल्गारिया]] को सबसे कम लाभ प्राप्त हुआ, यद्यपि इन युद्धों में उसने सबसे अधिक भाग लिया था और उसकी धन और जन में बहुत अधिक हानि हुई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===ईर्ष्या तथा द्वेष में वृद्धि===&lt;br /&gt;
यद्यपि इन युद्धों के द्वारा [[ईसाई]] प्रजा को टर्की के साम्राज्य से मुक्ति मिल गई थी, किन्तु इन युद्धों के कारण इन राज्यों की शक्ति में बड़ा विस्तार हुआ और उनमें पारस्परिक ईर्ष्या और द्वेष में बहुत अधिक वृद्धि हुई। बल्गारिया अन्य राज्यों को ईर्षा और द्वेष को दृष्टि से देखने लगा। सर्बिया, आस्ट्रिया से बड़ा असंतुष्ट हो गया, क्योंकि उसके कारण ही अल्बानिया के नये राज्य का निर्माण हुआ जिससे वह [[एड्रियाटिक सागर]] से दूर हो गया। आस्ट्रिया भी सर्बिया से नाराज था, क्योंकि उसके विस्तार से उसके [[ईजियन सागर]] तक पहुंचने के मार्ग में रूकावट उत्पन्न हो गई। आस्ट्रिया को ग्रीस व रूमानिया से भी असंतोष था। जर्मनी भी सर्बिया को अपना शत्रु समझता था क्योंकि उनके द्वारा जर्मनी के [[क़ुस्तुंतुनिया|कुस्तुनतुनिया]] तक पहुंचने के मार्ग में वह रूकावट हो गया। ये राष्ट्र बुखारेस्ट की संधि का अंत करना चाहते थे। उनको केवल अवसर की तलाश थी। शीघ्र ही उनको बाल्कन राज्यों के विरूद्ध कार्य करने का अवसर प्राप्त हो गया, जब [[ऑस्ट्रिया|आस्ट्रिया]] के [[राजकुमार फर्डिनेन्ड]] और उसकी पत्नी का वध [[सेराजीवो]] में दिन दहाड़े एक सर्ब द्वारा 28 जून 1914 ई. को किया गया। &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;इसके कारण ही [[पहला विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]] का आरंभ हुआ।&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[उस्मानी साम्राज्य]] (ऑटोमान साम्राज्य)&lt;br /&gt;
*[[युवा तुर्क आन्दोलन]]&lt;br /&gt;
*[[पहला विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[https://www.panwarplus.com/2020/11/Balkan-yudh-ke-karan.html बाल्कन युद्ध कारण एवं परिणाम]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{संसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:विश्व के युद्ध]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:तुर्की का इतिहास]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:शीत युद्ध]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;अनुनाद सिंह</name></author>
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