<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6</id>
	<title>भाई परमानन्द - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6&amp;action=history"/>
	<updated>2026-08-25T15:05:52Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.43.6</generator>
	<entry>
		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6&amp;diff=7305&amp;oldid=prev</id>
		<title>imported&gt;अनुनाद सिंह: /* जीवनी */</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6&amp;diff=7305&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2021-04-15T05:40:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;span class=&quot;autocomment&quot;&gt;जीवनी&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[Image:Bhai Parmanand.jpg|right|thumb|250px|भाई परमानन्द]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;भाई परमानन्द&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (जन्म: ४ नवम्बर १८७६ - मृत्यु: ८ दिसम्बर १९४७) [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] के महान क्रान्तिकारी थे। भाई जी बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी थे। वे जहाँ [[आर्य समाज|आर्यसमाज]] और वैदिक धर्म के अनन्य प्रचारक थे, वहीं इतिहासकार, साहित्यमनीषी और शिक्षाविद् के रूप में भी उन्होंने ख्याति अर्जित की थी। सरदार [[भगत सिंह]], [[सुखदेव]], पं॰ [[राम प्रसाद &amp;#039;बिस्मिल&amp;#039;]], [[कर्तार सिंह सराभा|करतार सिंह सराबा]] जैसे असंख्य राष्ट्रभक्त युवक उनसे प्रेरणा प्राप्त कर बलि-पथ के राही बने थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देशभक्ति, राजनीतिक दृढ़ता तथा स्वतन्त्र विचारक के रूप में भाई जी का नाम सदैव स्मरणीय रहेगा। आपने कठिन तथा संकटपूर्ण स्थितियों का डटकर सामना किया और कभी विचलित नहीं हुए। आपने [[हिन्दी|हिंदी]] में भारत का इतिहास लिखा है। इतिहास-लेखन में आप राजाओं, युद्धों तथा महापुरुषों के जीवनवृत्तों को ही प्रधानता देने के पक्ष में न थे। आपका स्पष्ट मत था कि इतिहास में जाति की भावनाओं, इच्छाओं, आकांक्षाओं, संस्कृति एवं सभ्यता को भी महत्व दिया जाना चाहिए। आपने अपने जीवन के संस्मरण भी लिखे हैं जो युवकों के लिये आज भी प्रेरणा देने में सक्षम हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जीवनी ==&lt;br /&gt;
भाई जी का जन्म ४ नवम्बर १८७६ को जिला [[झेलम नदी|झेलम]] (अब [[पाकिस्तान]] में स्थित) के करियाला ग्राम के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिताजी का नाम भाई ताराचन्द्र था। इसी पावन कुल के [[भाई मतिदास]] ने [[हिन्दू]] धर्म की रक्षा के लिए [[गुरु तेग़ बहादुर|गुरु तेगबहादुर]] जी के साथ दिल्ली पहुँचकर [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] की चुनौती स्वीकार की थी। सन् १९०२ में भाई परमानन्द ने [[पंजाब विश्वविद्यालय]] से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और [[लाहौर]] के दयानन्द एंग्लो महाविद्यालय में शिक्षक नियुक्त हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत की प्राचीन संस्कृति तथा [[वैदिक धर्म]] में आपकी रुचि देखकर [[लाला हंसराज|महात्मा हंसराज]] ने आपको [[भारत की संस्कृति|भारतीय संस्कृति]] का प्रचार करने के लिए अक्टूबर, १९०५ में [[अफ़्रीका|अफ्रीका]] भेजा। [[डरबन|डर्बन]] में भाई जी की [[महात्मा गांधी|गांधीजी]] से भेंट हुई। अफ्रीका में आप तत्कालीन प्रमुख क्रांतिकारियों [[सरदार अजीत सिंह]], [[सूफी अंबा प्रसाद भटनागर|सूफी अंबाप्रसाद]] आदि के संर्पक में आए। इन क्रांतिकारी नेताओं से संबंध तथा कांतिकारी दल की कारवाही पुलिस की दृष्टि से छिप न सकी। अफ्रीका से भाई जी [[लंदन|लन्दन]] चले गए। वहाँ उन दिनों श्री [[श्यामजी कृष्ण वर्मा]] तथा [[विनायक दामोदर सावरकर]] क्रान्तिकारी कार्यों में सक्रिय थे। भाई जी इन दोनों के सम्पर्क में आये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भाई जी सन् १९०७ में भारत लौट आये। दयानन्द वैदिक महाविद्यालय में पढ़ाने के साथ-साथ वे युवकों को क्रान्ति के लिए प्रेरित करने के कार्य में सक्रिय रहे। [[सरदार अजीत सिंह]] तथा [[लाला लाजपत राय]] से उनका निकट का सम्पर्क था। इसी दौरान लाहौर पुलिस उनके पीछे पड़ गयी। सन् १९१० में भाई जी को लाहौर में गिरफ्तार कर लिया गया। किन्तु शीघ्र ही उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद भाई जी [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमरीका]] चले गये। वहाँ उन्होंने प्रवासी भारतीयों में वैदिक (हिन्दू) धर्म का प्रचार किया। वहाँ मार्तनक उपनिवेश (Martinique) में आपकी प्रख्यात क्रांतिकारी [[लाला हरदयाल]] से भेंट हुई। भारत में क्रांति कराने के लिए प्रमुख कार्यकर्ताओं के दल को यहाँ संघटित किया जा रहा था। लाला हरदयाल की प्रेरणा से आप भी इस दल में सम्मिलित हो गए। करतार सिंह सराबा, [[विष्णु गणेश पिंगले]] तथा अन्य युवकों ने उनकी प्रेरणा से अपना जीवन भारत की स्वाधीनता के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया। १९१३ में भारत लौटकर भाई जी पुन: लाहौर में युवकों को क्रान्ति की प्रेरणा देने के कार्य में सक्रिय हो गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भाई परमानन्द ने दक्षिण अमेरिका के कई ब्रिटिश उपनिवेशों का दौरा किया और लाला हरदयाल से सान फ्रैंसिस्को में पुनः मिले। [[ग़दर पार्टी|गदर पार्टी]] के संस्थापकों में वे भी शामिल थे। सन् १९१४ में एक व्याख्यान यात्रा के लिये वे लाला हरदयाल के साथ [[पोर्टलैण्ड]] गये तथा गदर पार्टी के लिये &amp;#039;तवारिखे-हिन्द&amp;#039; (भारत का इतिहास) नामक ग्रंथ की रचना की। भाई जी द्वारा लिखी पुस्तक &amp;quot;तवारीखे-हिन्द&amp;quot; तथा उनके लेख युवकों को सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत में क्रांति करने के उद्देश्य (तथाकथित &amp;#039;गदर षडयन्त्र&amp;#039;) से वे भारत लौट आये। उन्होने दावा किया था कि उनके साथ पाँच हजार क्रांतिकारी (गदरी) भारत आये थे। गदर क्रान्ति के नेताओं में वे भी थे। उनको [[पेशावर]] में क्रान्ति का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया गया था। २५ फ़रवरी १९१५ को लाहौर में गदर पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ भाई जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनके विरुद्ध अमरीका तथा [[इंग्लैण्ड]] में अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध षड्यन्त्र रचने, करतार सिंह सराबा तथा अन्य अनेक युवकों को सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित करने, आपत्तिजनक साहित्य की रचना करने जैसे आरोप लगाकर [[फाँसी]] की सजा सुना दी गयी। सजा का समाचार मिलते ही देशभर के लोग उद्विग्न हो उठे। अन्तत: भाई जी की [[फाँसी]] की सजा रद्द कर उन्हें [[आजीवन कारावास]] का दण्ड देकर दिसम्बर, १९१५ में [[अण्डमान]] ([[सेल्यूलर जेल|काला पानी]]) भेज दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उधर भाई जी जेल में अमानवीय यातनाएँ सहन कर रहे थे, इधर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती भाग्यसुधी धनाभाव के बावजूद पूर्ण स्वाभिमान और साहस के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अण्डमान की काल कोठरी में भाई जी को [[श्रीमद्भगवद्गीता|गीता]] के उपदेशों ने सदैव कर्मठ बनाए रखा। जेल में श्रीमद्भगवद्गीता सम्बन्धी लिखे गये अंशों के आधार पर उन्होंने बाद में &amp;quot;मेरे अन्त समय का आश्रय&amp;quot; नामक ग्रन्थ की रचना की। राजनैतिक बंदियों को कठोर कारावास के विरुद्ध भाई जी ने दो महीने का भूख हड़ताल किया। गान्धीजी को जब कालापानी में उन्हें अमानवीय यातनाएँ दिए जाने का समाचार मिला तो उन्होंने १९ नवम्बर १९१९ के &amp;quot;[[यंग इण्डिया|यंग इंडिया]]&amp;quot; में एक लेख लिखकर यातनाओं की कठोर भर्त्सना की। उन्होंने भाई जी की रिहाई की भी माँग की। २० अप्रैल १९२० को भाई जी को कालापानी जेल से मुक्त कर दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[सेल्यूलर जेल|कालेपानी]] की कालकोठरी में पाँच वर्षों में भाई जी ने जो अमानवीय यातनाएँ सहन कीं, भाई जी द्वारा लिखित &amp;quot;मेरी आपबीती&amp;quot; पुस्तक में उनका वर्णन पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। [[प्रो॰ धर्मवीर]] द्वारा लिखित &amp;quot;क्रान्तिकारी भाई परमानन्द&amp;quot; ग्रन्थ में भी इन यातनाओं का रोमांचकारी वर्णन दिया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जेल से मुक्त होकर भाई जी ने पुन: लाहौर को अपना कार्य क्षेत्र बनाया। [[लाला लाजपत राय|लाला लाजपतराय]] भाई जी के अनन्य मित्रों में थे। उन्होंने &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;राष्ट्रीय विद्यापीठ&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ([[नेशनल कालेज]]) की स्थापना की तो उसका कार्यभार भाई जी को सौंपा गया। इसी कालेज में [[भगत सिंह|भगतसिंह]] व [[सुखदेव]] आदि पढ़ते थे। भाई जी ने उन्हें भी सशस्त्र क्रान्ति के यज्ञ में आहुतियाँ देने के लिए प्रेरित किया। भाई जी ने &amp;quot;वीर बन्दा वैरागी&amp;quot; पुस्तक की रचना की, जो पूरे देश में चर्चित रही।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कांग्रेस तथा गान्धी जी ने जब [[मुस्लिम तुष्टीकरण]] की घातक नीति अपनाई तो भाई जी ने उसका कड़ा विरोध किया। यही कारण है कि वे कांग्रेस के आन्दोलनों से दूर रहे। वे जगह-जगह हिन्दू संगठन के महत्व पर बल देते थे। भाई जी ने &amp;quot;हिन्दू&amp;quot; पत्र का प्रकाशन कर देश को खण्डित करने के षड्यन्त्रों को उजागर किया। भाई जी ने सन् १९३० में ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि मुस्लिम नेताओं का अन्तिम उद्देश्य मातृभूमि का विभाजन कर [[पाकिस्तान]] का निर्माण करना है। भाई जी ने यह भी चेतावनी दी थी कि कांग्रेसी नेताओं पर विश्वास न करो, ये किसी दिन विश्वासघात कर देश का विभाजन करायेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bhai Parmanand 1979 stamp of India.jpg|right|thumb|250px|सन १९७९ में भारत सरकार ने भाई परमानन्द की स्मृति में डाकटिकट जारी किया।]]&lt;br /&gt;
बाद में आप [[अखिल भारतीय हिन्दू महासभा|हिंदू महासभा]] में सम्मिलित हो गए। महामना पंडित [[मदनमोहन मालवीय]] का निर्देश एवं सहयोग आपको बराबर मिला। सन्‌ 1933 ई. में आप अखिल भारतीय हिंदू महासभा के [[अजमेर]] अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब भाई जी की भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई तथा [[भारत का विभाजन|भारत विभाजन]] और पाकिस्तान के निर्माण की घोषणा हुई तो भाई जी के हृदय में एक ऐसी वेदना पनपी कि वे उससे उबर नहीं पाये तथा ८ दिसम्बर १९४७ को उन्होंने इस संसार से विदा ले ली।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भाई जी के सुपुत्र डॉ॰ [[भाई महावीर]] भी अपने पूज्य पिताश्री के पदचिन्हों पर चलते हुए राष्ट्र और हिन्दू समाज की सेवा में सक्रिय रहे। उनकी स्मृति को बनाये रखने के लिये [[दिल्ली]] में एक व्यापार अध्ययन संस्थान का नामकरण उनके नाम पर किया गया है। १९७९ में भारत सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कृतियाँ ==&lt;br /&gt;
भाई जी द्वारा लिखित &amp;quot;हिन्दू संगठन&amp;quot;, &amp;quot;भारत का इतिहास&amp;quot;, &amp;quot;दो लहरों की टक्कर&amp;quot;, &amp;quot;मेरे अन्त समय का आश्रय&amp;quot;, &amp;quot;पंजाब का इतिहास&amp;quot;, &amp;quot;वीर बन्दा वैरागी&amp;quot;, &amp;quot;मेरी आपबीती&amp;quot; आदि साहित्य आज भी इस महान विभूति की पावन स्मृति को अक्षुण्ण रखे हुए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[ग़दर पार्टी|गदर पार्टी]]&lt;br /&gt;
* [[भाई महावीर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20121215070318/http://books.google.co.in/books?id=iQI33OimI-sC&amp;amp;printsec=frontcover#v=onepage&amp;amp;q=&amp;amp;f=false हमारे राष्ट्र-पुरुष] (गूगल पुस्तक ; लेखक - भाई परमानन्द)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20160304221021/http://othentics.in/swadesh/default_view_article_news.php?art_id=449&amp;amp;art_name=%26%232310%3B%26%232354%3B%26%232375%3B%26%232326%3B&amp;amp;limit=220&amp;amp;font=12 मातृभूमि के लिए समर्पित क्रांतिकारी भाई परमानंद]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20121027084106/http://panchjanya.com/arch/2008/12/7/File19.htm भाई परमानन्द की पुण्यतिथि (8 दिसम्बर) पर विशेष : देश के लिए झोंक दिया जीवन] (आचार्य भगवानदेव &amp;quot;चैतन्य&amp;quot;)&lt;br /&gt;
* [https://santasa.org/articles/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6/ भाई परमानन्द]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:१८७६ में जन्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:१९४७ में निधन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:ग़दर पार्टी]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;अनुनाद सिंह</name></author>
	</entry>
</feed>