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	<title>मन्दिर - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;Mtarch11: 2409:4064:2E2C:BBBD:0:0:2FC9:D907 (Talk) के संपादनों को हटाकर रोहित साव27 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<updated>2021-07-09T00:52:06Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/2409:4064:2E2C:BBBD:0:0:2FC9:D907&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/2409:4064:2E2C:BBBD:0:0:2FC9:D907&quot;&gt;2409:4064:2E2C:BBBD:0:0:2FC9:D907&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:2409:4064:2E2C:BBBD:0:0:2FC9:D907&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:2409:4064:2E2C:BBBD:0:0:2FC9:D907 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B527&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:रोहित साव27 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;रोहित साव27&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोतहीन}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Temple khajuraodkd.jpg|thumb|right|300px|मन्दिर]]&lt;br /&gt;
[[भारतीय धर्म|भारतीय धर्मों]] ([[सनातन धर्म]], [[जैन धर्म]], [[बौद्ध धर्म]], [[सिख धर्म]] आदि) [[हिन्दू धर्म|हिन्दुओं]] के [[उपासनास्थल]] को &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;मन्दिर&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; कहते हैं। यह अराधना और [[पूजा]]-अर्चना के लिए निश्चित की हुई जगह या देवस्थान है। यानी जिस जगह किसी आराध्य देव के प्रति ध्यान या चिंतन किया जाए या वहां [[मूर्ति]] इत्यादि रखकर [[पूजा]]-अर्चना की जाए उसे मन्दिर कहते हैं। मन्दिर का शाब्दिक अर्थ &amp;#039;घर&amp;#039; है। वस्तुतः सही शब्द &amp;#039;देवमन्दिर&amp;#039;, &amp;#039;शिवमन्दिर&amp;#039;, &amp;#039;कालीमन्दिर&amp;#039; आदि हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
और &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;[[मठ]]&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; वह स्थान है जहां किसी [[सम्प्रदाय]], [[धर्म]] या परंपरा विशेष में आस्था रखने वाले शिष्य आचार्य या धर्मगुरु अपने सम्प्रदाय के संरक्षण और संवर्द्धन के उद्देश्य से धर्म ग्रन्थों पर विचार विमर्श करते हैं या उनकी व्याख्या करते हैं जिससे उस सम्प्रदाय के मानने वालों का हित हो और उन्हें पता चल सके कि उनके धर्म में क्या है। उदाहरण के लिए बौद्ध विहारों की तुलना हिन्दू मठों या ईसाई मोनेस्ट्रीज़ से की जा सकती है। लेकिन &amp;#039;मठ&amp;#039; शब्द का प्रयोग [[शंकराचार्य]] के काल यानी सातवीं या आठवीं शताब्दी से शुरु हुआ माना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[तमिल भाषा]] में मन्दिर को &amp;#039;&amp;#039;कोईल&amp;#039;&amp;#039; या &amp;#039;&amp;#039;कोविल&amp;#039;&amp;#039; (கோவில்) कहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मंदिरों की निर्माण ==&lt;br /&gt;
[[गुप्त राजवंश|गुप्तकाल]] (चौथी से छठी शताब्दी) में मन्दिरों के निर्माण का उत्तरोत्तर विकास दृष्टिगोचर होता है। पहले लकड़ी के मन्दिर बनते थे या बनते होंगे लेकिन जल्दी ही भारत के अनेक स्थानों पर पत्थर और र्इंट से मन्दिर बनने लगे। 7वीं शताब्दि तक देश के आर्य संस्कृति वाले भागों में पत्थरों से मंदिरों का निर्माण होना पाया गया है। चौथी से छठी शताब्दी में गुप्तकाल में मन्दिरों का निर्माण बहुत द्रुत गति से हुआ। मूल रूप से हिन्दू मन्दिरों की शैली बौद्ध मन्दिरों से ली गयी होगी जैसा कि उस समय के पुराने मन्दिरो में मूर्तियों को मन्दिर के मध्य में रखा होना पाया गया है और जिनमें बौद्ध स्तूपों की भांति परिक्रमा मार्ग हुआ करता था। गुप्तकालीन बचे हुए लगभग सभी मन्दिर अपेक्षाकृत छोटे हैं जिनमें काफी मोटा और मजबूत कारीगरी किया हुआ एक छोटा केन्द्रीय कक्ष है, जो या तो मुख्य द्वार पर या भवन के चारों ओर बरामदे से युद्ध है। गुप्तकालीन आरम्भिक मन्दिर, उदाहरणार्थ सांची के बौद्ध मन्दिरों की छत सपाट है; तथापि मन्दिरों की उत्तर भारतीय शिखर शैली भी इस काल में ही विकसित हुयी और शनै: शनै: इस शिखर की ऊंचार्इ बढती रही। 7वीं शताब्दी में [[बोधगया|बोध गया]] में निर्मित बौद्ध मन्दिर की बनावट और ऊंचा शिखर गुप्तकालीन भवन निर्माण शैली के चरमोत्कर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बौद्ध और जैन पंथियों द्वारा धार्मिक उद्देश्यों के निमित्त कृत्रिम गुफाओं का प्रयोग किया जाता था और हिन्दू धर्मावलंबियों द्वारा भी इसे आत्मसात कर लिया गया था। फिर भी हिन्दुओं द्वारा गुफाओं में निर्मित मंदिर तुलनात्मक रूप से बहुत कम हैं और गुप्तकाल से पूर्व का तो कोर्इ भी साक्ष्य इस संबन्ध में नहीं पाया जाता है। गुफा मन्दिरों और शिलाओं को काटकर बनाये गये मन्दिरों के संबंध में अधिकतम जानकारी जुटाने का प्रयास करते हुए हम जितने स्थानों का पता लगा सके वो पृथक सूची में सलंग्न की है। मद्रास (वर्तमान &amp;#039;चेन्नई&amp;#039;) के दक्षिण में पल्लवों के स्थान [[महाबलिपुरम्]] में, 7वीं शताब्दी में निर्मित अनेक छोटे मन्दिर हैं जो चट्टानों को काटकर बनाये गये हैं और जो तमिल क्षेत्र में तत्कालीन धार्मिक भवनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मन्दिरों का अस्तित्व और उनकी भव्यता [[गुप्त राजवंश]] के समय से देखने को मिलती है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि गुप्त काल से हिन्दू मंदिरों का महत्त्व और उनके आकार में उल्लेखनीय विस्तार हुआ तथा उनकी बनावट पर स्थानीय वास्तुकला का विशेष प्रभाव पड़ा। उत्तरी भारत में हिन्दू मंदिरों की उत्कृष्टता उड़ीसा तथा उत्तरी मध्यप्रदेश के खजुराहो में देखने को मिलती है। उड़ीसा के भुवनेश्वर में सिथत लगभग 1000 वर्ष पुराना लिंगराजा का मन्दिर वास्तुकला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। हालांकि, 13वीं शताब्दी में निर्मित [[कोणार्क]] का [[सूर्य मंदिर]] इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और विश्वविख्यात मंदिर है। इसका शिखर इसके आरंम्भिक दिनों में ही टूट गया था और आज केवल प्रार्थना स्थल ही शेष बचा है। काल और वास्तु के दृष्टिकोण से [[खजुराहो]] के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मन्दिर 11वीं शताब्दी में बनाये गये थे। गुजरात और राजस्थान में भी वास्तु के स्वतन्त्र शैली वाले अच्छे मन्दिरों का निर्माण हुआ किन्तु उनके अवशेष उड़ीसा और खजुराहो की अपेक्षा कम आकर्षक हैं। प्रथम दशाब्दी के अन्त में वास्तु की दक्षिण भारतीय शैली [[तंजावुर|तंजौर]] (प्राचीन नाम तंजावुर) के [[राजराजेश्वर मंदिर]] के निर्माण के समय अपने चरम पर पहुंच गयी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;[https://web.archive.org/web/20200720123358/https://www.domkawla.com/tortoise-in-temple/ हर मंदिर मे के प्रारंभ मे कछुआ क्यो होता है ?]&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[हिन्दू मंदिर स्थापत्य]]&lt;br /&gt;
* [[जैन मन्दिर|जैन मंदिर]]&lt;br /&gt;
* [[बृहदेश्वर मन्दिर|वृहदेश्वर मंदिर]]&lt;br /&gt;
* [[मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर|मीनाक्षी मंदिर]]&lt;br /&gt;
* [[कामाख्या मन्दिर|कामाख्या मंदिर]]&lt;br /&gt;
* [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मन्दिर, दिल्ली]]&lt;br /&gt;
* [[सोमनाथ मन्दिर]]&lt;br /&gt;
* [[शाकम्भरी]] देवी मंदिर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20160308000624/http://travel.vibrant4.com/ भारत के प्रसिद्ध मंदिरों की हिन्दी में जानकारी]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20120818113141/http://holyindia.org/hindi/ प्रसिद्ध नगरों के मन्दिर]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20100102085740/http://templenet.com/default.htm TempleNet] - The Ultimate Source of Information on Indian Temples&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मन्दिर]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Mtarch11</name></author>
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