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	<title>मातृभाषा - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>2402:3A80:1FA8:F19F:0:0:22A:2605 ४ जून २०२१ को ०६:२१ बजे</title>
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		<updated>2021-06-04T06:21:00Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[चित्र:Ana Dili.JPG|right|thumb|300px|अजबैजान में मातृभाषा का स्मारक (अना दिलि)]]&lt;br /&gt;
जन्म लेने के बाद  मानव जो प्रथम भाषा सीखता है उसे उसकी &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;मातृभाषा&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; कहते हैं। मातृभाषा, किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं भाषाई पहचान होती है। Hendricks&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== गांधी जी के विचार ==&lt;br /&gt;
महात्मा गांधी जी ने मैकाले की इस धूर्ततापूर्ण योजना का अपने  लेखों में वर्णन किया है (मैकालेज ड्रीम्स, यंग इंडिया, 19 मार्च 1928, पृ. 103, देखें ) तथा इस घोषणा को &amp;quot;शरारतपूर्ण&amp;quot; कहा है। यह सत्य है कि गांधी जी स्वयं [[अंग्रेजी]] के प्रभावी ज्ञाता तथा वक्ता थे। एक बार एक अंग्रेज विद्वान ने कहा था कि भारत में केवल डेढ़ व्यक्ति ही अंग्रेजी जानते हैं- एक गांधी जी और आधे मि. जिन्ना। अत: भाषा के सम्बंध में गांधी जी के विचार राजनीतिक अथवा भावुक न होकर अत्यन्त संतुलित तथा गंभीर हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[शिक्षा का मध्यम|शिक्षा के माध्यम]] के सन्दर्भ में गांधी जी के विचार स्पष्ट थे। वे अंग्रेजी भाषा को लादने को विद्यार्थी समाज के प्रति &amp;quot;कपटपूर्ण कृति&amp;quot; समझते थे। उनका मानना था कि भारत में 90 प्रतिशत व्यक्ति चौदह वर्ष की आयु तक ही पढ़ते हैं, अत: मातृभाषा में ही अधिक से अधिक ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने 1909 ई. में &amp;quot;स्वराज्य&amp;quot; में अपने विचार प्रकट किए हैं। उनके अनुसार &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;हजारों व्यक्तियों को अंग्रेजी सिखलाना उन्हें गुलाम बनाना है।&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; गांधी जी विदेशी माध्यम के कटु विरोधी थे। उनका मानना था कि विदेशी माध्यम बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने, रटने और नकल करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करता है तथा उनमें मौलिकता का अभाव पैदा करता है। यह देश के बच्चों को अपने ही घर में विदेशी बना देता है। उनका कथन था कि-&lt;br /&gt;
: &amp;#039;&amp;#039;यदि मुझे कुछ समय के लिए निरकुंश बना दिया जाए तो मैं विदेशी माध्यम को तुरन्त बन्द कर दूंगा।&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
गांधी जी के अनुसार विदेशी माध्यम का रोग बिना किसी देरी के तुरन्त रोक देना चाहिए। उनका मत था कि मातृभाषा का स्थान कोई दूसरी भाषा नहीं ले सकती। उनके अनुसार, &amp;quot;गाय का दूध भी मां का दूध नहीं हो सकता।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मातृभाषा का महत्त्व ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Int-mother-lang-day-monument.jpg|right|thumb|300px|वर्ष २००६ में [[सिडनी]] में [[अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस|अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस]] स्मारक के उद्घाटन के अवसर पर]]&lt;br /&gt;
गांधीजी देश की एकता के लिए यह आवश्यक मानते थे कि अंग्रेजी का प्रभुत्व शीघ्र समाप्त होना चाहिए। वे अंग्रेजी के प्रयोग से देश की एकता के तर्क को बेहूदा मानते थे। सच्ची बात तो यही है कि [[भारत का विभाजन|भारत विभाजन]] का कार्य अंग्रेजी पढ़े-लिखे लोगों की ही देन है। गांधी जी ने कहा था- &amp;quot;यह समस्या 1938 ई. में हल हो जानी चाहिए थी, अथवा 1947 ई. में तो अवश्य ही हो जानी चाहिए थी।&amp;quot; गांधी जी ने न केवल माध्यम के रूप में अंग्रेजी भाषा का मुखर विरोध किया बल्कि राष्ट्रभाषा के प्रश्न पर भी राष्ट्रीय एकता तथा अखण्डता को प्रकट करने वाले विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा था, &lt;br /&gt;
:&amp;#039;&amp;#039;यदि [[स्वराज]]्य अंग्रेजी बोलने वाले भारतीयों को और उन्हीं के लिए होने वाला हो तो नि:संदेह अंग्रेजी ही राष्ट्रभाषा होगी। लेकिन अगर स्वराज्य करोड़ों भूखों मरने वालों, करोड़ों निरक्षरों, निरक्षर बहनों और पिछड़ों व अत्यंजों का हो और इन सबके लिए होने वाला हो, तो [[हिन्दी|हिंदी]] ही एकमात्र राष्ट्रभाषा हो सकती है।&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===घर पर मातृभाषा बोलने वाले बच्चे मेधावी होते हैं ===&lt;br /&gt;
विदेश में रहने वाले बच्चे जो अपने घर में परिवार वालों के साथ मातृभाषा में बात करते हैं और बाहर दूसरी भाषा बोलते हैं, वह ज्यादा बुद्धिमान होते हैं। एक नए अध्ययन से यह जानकारी मिली है। ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने शोध में पाया कि जो बच्चे स्कूल में अलग भाषा बोलते हैं और परिवार वालों के साथ घर में अलग भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वे बुद्धिमत्ता जांच में उन बच्चों के मुकाबले अच्छे अंक लाए जो सिर्फ गैर मातृभाषा जानते हैं। इस अध्ययन में ब्रिटेन में रहने वाले तुर्की के सात से 11 साल के 1999 बच्चों को शामिल किया गया। इस आईक्यू जांच में दो भाषा बोलने वाले बच्चों का मुकाबला ऐसे बच्चों के साथ किया गया जो सिर्फ अंग्रेजी बोलते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=http://www.hindi.webdunia.com/knowledge-and-science/mother-tongue-118082400031_1.html |title=घर पर मातृभाषा बोलने वाले बच्चे होते हैं मेधावी |access-date=1 जून 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190601115232/http://hindi.webdunia.com/knowledge-and-science/mother-tongue-118082400031_1.html |archive-date=1 जून 2019 |url-status=dead }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===दुनिया में मौलिकता का ही महत्व है===&lt;br /&gt;
मौलिक लेखन, चिंतन या रचनात्मकता को दुनिया भर में नोट किया जाता है। दुनिया में आज भी [[भारत]] की पहचान यहां की भाषा में लिखित [[उपनिषद]], [[ब्रह्मसूत्र]], [[योगसूत्र]], [[रामायण]], [[महाभारत]], [[नाट्यशास्त्र]] आदि से है जो मौलिक रचनाएँ हैं। नीरद चौधरी, राजा राव, खुशवन्त सिंह जैसे लेखकों से नहीं। समाज की रचनात्मकता और मौलिकता अनिवार्यत: उसकी अपनी भाषा से जुड़ी होती है। दुनिया में मौलिकता का महत्व है, माध्यम का नहीं। इसलिए यदि स्वतंत्र भारत में मौलिक चिन्तन, लेखन का ह्रास होता गया तो उसका कारण &amp;#039;अंग्रेजी का बोझ&amp;#039; है। मौलिक लेखन, चिन्तन विदेशी भाषा में प्रायः असंभव है। कम से कम तब तक, जब तक ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका की मूल सभ्यता की तरह भारत सांस्कृतिक रूप से पूर्णत: नष्ट नहीं हो जाता और अंग्रेजी यहां सबकी एक मात्र भाषा नहीं बन जाती। तब तक भारतीय बुद्धिजीवी अंग्रेजी में कुछ भी क्यों न बोलते रहें, वह वैसी ही यूरोपीय जूठन की जुगाली होगी, जिसकी बाहर पूछ नहीं हो सकती।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=https://www.jagran.com/editorial/apnibaat-those-who-love-whole-country-they-understand-importance-of-hindi-19719046.html |title=जिन भारतीयों को पूरे देश से लगाव है वे हिंदी का महत्व समझते हैं, हिंदी है देश-प्रेम की भाषा |access-date=21 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200102054231/https://www.jagran.com/editorial/apnibaat-those-who-love-whole-country-they-understand-importance-of-hindi-19719046.html |archive-date=2 जनवरी 2020 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[भाषाई साम्राज्यवाद]]&lt;br /&gt;
* [[अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस|अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस]]&lt;br /&gt;
* [[राजभाषा]]&lt;br /&gt;
* [[सम्पर्क भाषा]]&lt;br /&gt;
* [[बहुभाषिकता]]&lt;br /&gt;
* [[समाजभाषाविज्ञान]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20170217201437/http://bhashasankalp.weebly.com/23502366234023712349236623592366.html मातृभाषा] (अतुल कोठारी)&lt;br /&gt;
* [http://panchjanya.com//Encyc/2017/1/24/Education-hi-MartiBhasha.aspx सफलता की कुंजी : मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} (पाञ्चजन्य)&lt;br /&gt;
* [https://www.webcitation.org/6ARPwjbfY?url=http://unesdoc.unesco.org/images/0014/001466/146632e.pdf शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए मातृभाषा आधारिक शिक्षा की महत्ता]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20170329141138/http://www.linguistic-declaration.org/versions/angles.pdf भाषाई अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा]&lt;br /&gt;
* [http://www.indiatogether.org/2006/jun/edu-medium.htm मातृभाषा या विदेशी भाषा (अंग्रेज़ी)?]{{Dead link|date=दिसंबर 2020 |bot=InternetArchiveBot }}&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20090107083726/http://www.educatorsforimmersion.org/LI_pdf/rationals.pdf Education through the Medium of the Mother-Tongue]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20170730132101/http://www.pravakta.com/both-english-and-robe-haten/ अंग्रेजी और चोगा, दोनों हटें] ( डॉ. वेदप्रताप वैदिक ; October 22, 2016)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20190602004933/https://www.patrika.com/opinion/first-lesson-should-be-found-in-mother-tongue-4242047/ पहला सबक मातृभाषा में मिले]&lt;br /&gt;
*[https://web.archive.org/web/20190808210503/https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/other-news/read-in-mother-tongue-english-will-be-fourth-language/articleshow/69602091.cms मातृ भाषा में पढ़ें, अंग्रेजी होगी चौथी भाषा] (नई शिक्षानीति का ड्राफ्ट ; मई-जून २०१९)&lt;br /&gt;
*[https://www.jagran.com/himachal-pradesh/kangra-news-educational-policy-for-india-20572813.html  नई शिक्षा नीति से मातृभाषा को मिलेगी संजीवनी] (जुलाई २०२०)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भाषा]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:समाज]]&lt;/div&gt;</summary>
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