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	<title>यमराज - अवतरण इतिहास</title>
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	<updated>2026-08-22T03:00:39Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C&amp;diff=8059&amp;oldid=prev</id>
		<title>2409:4051:2E96:DB2F:E82B:E960:97AD:C9D6 १८ जुलाई २०२१ को १५:४० बजे</title>
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		<updated>2021-07-18T15:40:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{Hdeity infobox| &amp;lt;!--Wikipedia:WikiProject Hindu mythology--&amp;gt;&lt;br /&gt;
 name           = यमराज&lt;br /&gt;
| image          = Yama&amp;#039;s Court and Hell.jpg&lt;br /&gt;
| caption         = यमराज का दरबार और नर्क&amp;lt;br /&amp;gt; नीली आकृति यमराज की है, जो यमी और [[चित्रगुप्त]] जी के साथ विराजमान हैं। &amp;lt;br /&amp;gt; [[सत्रहवीं शताब्दी|१७वीं शताब्दी]] की एक पेंटिंग, राजकीय संग्रहालय, [[चेन्नई]]&lt;br /&gt;
| devanagari        = धर्मराज&lt;br /&gt;
| affiliation       = [[हिन्दू देवी देवताओं की सूची|हिन्दू देवता]]&lt;br /&gt;
| god_of          = [[मृत्यु]]&lt;br /&gt;
| abode          = [[यमलोक]]&lt;br /&gt;
| mantra          =&lt;br /&gt;
| weapon          = दण्ड , गदा और पाश&lt;br /&gt;
| mount          = [[भैंसा]]&lt;br /&gt;
| consort        = दे‌वी [[धुमोरना]] &lt;br /&gt;
| children       = [[कतिला]] और [[ युधिष्ठिर ]]&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;यमराज&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; [[हिन्दू धर्म]] के अनुसार [[मृत्यु]] के देवता हैं। इनका उल्लेख [[वेद]] में भी आता है। इनकी जुड़वां बहन [[यमुना नदी|यमुना]] (यमी) है। यमराज, महिषवाहन (भैंसे पर सवार) दण्डधर हैं। वे जीवों के शुभाशुभ कर्मों के निर्णायक हैं। वे परम भागवत, बारह भागवताचार्यों में हैं। यमराज दक्षिण दिशा के [[दिक्पाल|दिक् पाल]] कहे जाते हैं और आजकल मृत्यु के देवता माने जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दक्षिण दिशा के इन लोकपाल की संयमनीपुरी समस्त प्राणियों के लिये, जो अशुभकर्मा हैं, बड़ी भयप्रद है। यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुभ्बर, दघ्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त - इन चौदह नामों से यमराज की आराधना होती है। इन्हीं नामों से इनका [[तर्पण]] किया जाता है। यमराज की पत्नी देवी [[धुमोरना]] थी। [[कतिला]] यमराज व धुमोरना का पुत्र था। कुंती और यमराज के पुत्र का नाम युधिष्ठिर था |  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[विश्वकर्मा]] की पुत्री [[संज्ञा]] से भगवान [[सूर्य]] के पुत्र यमराज, श्राद्धदेव मनु और यमुना उत्पन्न हुईं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
वैदिक काम में यम और यमी दोनों देवता, ऋषि और मंत्रकर्ता माने जाते थे और &amp;#039;यम&amp;#039; को लोग &amp;#039;[[मृत्यु]]&amp;#039; से भिन्न मानते थे। पर बाद में यम ही प्राणियों को मारनेवाले अथवा इस शरीर में से प्राण निकालनेवाले माने जाने लगे। वैदिक काल में [[यज्ञ|यज्ञों]] में यम की भी पूजा होती थी और उन्हे [[हवि]] दिया जाता था। उन दिनों वे मृत पितरों के अधिपति तथा मरनेवाले लोगों को आश्रय देनेवाला माने जाते थे। तब से अब तक इनका एक अलग लोक माना जाता है, जो &amp;#039;यमलोक&amp;#039; कहलाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिदुओं का विश्वास है कि मनुष्य मरने पर सब से पहले यमलोक में जाता है और वहाँ यमराज के सामने उपस्थित किया जाता है। वही उसकी शुभ और अशुभ कृत्यों का विचार करके उसे स्वर्ग या नरक में भेजते हैं। ये धर्मपूर्वक विचार करते हैं, इसीलिये &amp;#039;धर्मराज&amp;#039; भी कहलाते हैं। यह भी माना जाता है कि मृत्यु के समय यम के दूत ही आत्मा को लेने के लिये आते हैं। [[स्मृति|स्मृतियों]] में चौदह यमों के नाम आए हैं, जो इस प्रकार हैं— यम, धर्मराज, मृत्यु, अंतक, वैवस्वत, काल, सर्वभूत, क्षय, उदुंबर, दघ्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त। [[तर्पण]] में इनमें से प्रत्यक के नाम तीन-तीन अंजलि जल दिया जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;मार्कडेयपुरण&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; में लिखा है कि जब विश्वकर्मा की कन्या संज्ञा ने अपने पति सूर्य को देखकर भय से आँखें बंद कर ली, तब सूर्य ने क्रुद्ध होक उसे शाप दिया कि जाओ, तुम्हें जो पुत्र होगा, वह लोगों का संयमन करनेवाला (उनके प्राण लेनेवाला) होगा। जब इसपर संज्ञा ने उनकी और चंचल दृष्टि से देखा, तब फिर उन्होने कहा कि तुम्हें जो कन्या होगी, वह इसी प्रकार चंचलतापूर्वक [[नदी]] के रूप में बहा करेगी। पुत्र तो यही यम हुए और कन्या यमी हुई, जो बाद में &amp;#039;यमुना&amp;#039; के नाम से प्रसिद्ध हुई। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चार द्वारों, सात तोरणों तथा पुष्पोदका, वैवस्वती आदि सुरम्य नदियों से पूर्ण अपनी पुरी में पूर्व, पश्चिम तथा उत्तर के द्वार से प्रविष्ट होने वाले पुण्यात्मा पुरुषों को यमराज शंख, चक्र, गदा, पद्मधारी, चतुर्भुज, नीलाभ भगवान विष्णु के रूप में अपने महाप्रासाद में रत्नासन पर दर्शन देते हैं। दक्षिण-द्वार से प्रवेश करने वाले पापियों को वह तप्त लौहद्वार तथा पूय, शोणित एवं क्रूर पशुओं से पूर्ण [[वैतरणी|वैतरणी नदी]] पार करने पर प्राप्त होते हैं। द्वार से भीतर आने पर वे अत्यन्त विस्तीर्ण सरोवरों के समान नेत्रवाले, धूम्रवर्ण, प्रलय-मेघ के समान गर्जन करनेवाले, ज्वालामय रोमधारी, बड़े तीक्ष्ण प्रज्वलित दन्तयुक्त, सँडसी-जैसे नखोंवाले, चर्मवस्त्रधारी, कुटिल-भृकुटि भयंकरतम वेश में यमराज को देखते हैं। वहाँ मूर्तिमान व्याधियाँ, घोरतर पशु तथा यमदूत उपस्थित मिलते हैं। [[दीपावली]] से पूर्व दिन यमदीप देकर तथा दूसरे पर्वो पर यमराज की आराधना करके मनुष्य उनकी कृपा का सम्पादन करता है। ये निर्णेता हम से सदा शुभकर्म की आशा करते हैं। दण्ड के द्वारा जीव को शुद्ध करना ही इनके लोक का मुख्य कार्य है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
{{Commonscat|Yama|यमराज}}&lt;br /&gt;
*[[चित्रगुप्त]]&lt;br /&gt;
*[[यमदूत]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{हिन्दू देवी देवता}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:इन्द्र लोक के देवता]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:आदित्य]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:लोकपाल]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मृत्यु देवता]]&lt;br /&gt;
[https://www.puranikatha.in/2020/05/yamraaj-ke-pita-ka-name-kya-tha.html?m=1 जब यमराज की भी हो गई थी मौत]{{Dead link|date=जनवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>2409:4051:2E96:DB2F:E82B:E960:97AD:C9D6</name></author>
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