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	<title>योगिनी एकादशी - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;रोहित साव27: 343shruti (Talk) के संपादनों को हटाकर कन्हाई प्रसाद चौरसिया के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<updated>2021-07-04T07:20:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/343shruti&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/343shruti&quot;&gt;343shruti&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:343shruti&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:343shruti (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:कन्हाई प्रसाद चौरसिया (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;कन्हाई प्रसाद चौरसिया&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{ज्ञानसन्दूक त्योहार &lt;br /&gt;
| त्योहार_के_नाम = योगिनी एकादशी&lt;br /&gt;
|चित्र = &lt;br /&gt;
|शीर्षक = योगिनी एकादशी व्रत &lt;br /&gt;
|आधिकारिक_नाम = योगिनी एकादशी व्रत&lt;br /&gt;
|अन्य नाम = &lt;br /&gt;
|अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], भारतीय प्रवासी&lt;br /&gt;
|उद्देश्य = सर्वकामना पूर्ति&lt;br /&gt;
|आरम्भ = &lt;br /&gt;
|तिथि = &lt;br /&gt;
|दीर्घ-प्रकार = &lt;br /&gt;
|तारीख़ = &lt;br /&gt;
|तिथि२००६ = &lt;br /&gt;
|तिथि२००७ = &lt;br /&gt;
|तिथि२००८ = &lt;br /&gt;
|अनुष्ठान = &lt;br /&gt;
|उत्सव = &lt;br /&gt;
|समान पर्व= &lt;br /&gt;
|type =&amp;lt;!--DO NOT CHANGE! THIS CONTROLS COLOUR--&amp;gt;hindu&amp;lt;!--DO NOT CHANGE! THIS CONTROLS COLOUR--&amp;gt;&lt;br /&gt;
}}&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;योगिनी एकादशी&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; व्रतकथा [[पद्म पुराण|पद्मपुराण के]] उत्तरखण्ड में प्राप्त होती है। [[आषाढ़|आषाढ़ मास]] की कृष्ण एकादशी को &amp;quot;योगनी&amp;quot; अथवा &amp;quot;शयनी&amp;quot; [[एकादशी तिथि|एकादशी]] कहते है। इस व्रतकथा के वक्ता [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] एवं मार्कण्डेय  हैं। श्रोता युधिष्ठिर एवं हेममाली हैं। जब [[युधिष्ठिर]] आषाढकृष्ण एकादशी का नाम एवं महत्त्व पूछते हैं, तब वासुदेव जी इस कथा को कहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[मेघदूतम्|मेघदूत]] में महाकवि [[कालिदास]] जी ने किसी शापित [[यक्ष]] के विषय में उल्लेख किया है। मेघदूत में वह यक्ष [[बादल|मेघ]] को हि दूत स्वीकार कर उसके माध्यम से अपनी पत्नी के लिए सन्देश भेजता है, यह कथानक वहाँ प्राप्त होता है। कालिदास जी की वह मेघदूत की कथा इस कथा से प्रभावित है ऐसा माना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। उनमें [[आषाढ़]] मास की [[कृष्ण पक्ष]] की [[एकादशी]] को योगिनी एकादशी कहते हैं। आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कथा ==&lt;br /&gt;
एक बार की बात है धर्मराज [[युधिष्ठिर]] कहने लगे कि भगवन, मैंने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के व्रत का माहात्म्य सुना। अब कृपया आषाढ़ कृष्ण एकादशी की कथा सुनाइए। इसका नाम क्या है? माहात्म्य क्या है? यह भी बताइए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। मैं तुमसे पुराणों में वर्णन की हुई कथा कहता हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वर्गधाम की अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का एक राजा रहता था। वह शिव भक्त था और प्रतिदिन शिव की पूजा किया करता था। हेम नाम का एक माली पूजन के लिए उसके यहाँ फूल लाया करता था। हेम की विशालाक्षी नाम की सुंदर स्त्री थी। एक दिन वह मानसरोवर से पुष्प तो ले आया लेकिन कामासक्त होने के कारण वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद तथा रमण करने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इधर राजा उसकी दोपहर तक राह देखता रहा। अंत में राजा कुबेर ने सेवकों को आज्ञा दी कि तुम लोग जाकर माली के न आने का कारण पता करो, क्योंकि वह अभी तक पुष्प लेकर नहीं आया। सेवकों ने कहा कि महाराज वह पापी अतिकामी है, अपनी स्त्री के साथ हास्य-विनोद और रमण कर रहा होगा। यह सुनकर कुबेर ने क्रोधित होकर उसे बुलाया।&lt;br /&gt;
  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हेम माली राजा के भय से काँपता हुआ ‍उपस्थित हुआ। राजा कुबेर ने क्रोध में आकर कहा- ‘अरे पापी! नीच! कामी! तूने मेरे परम पूजनीय ईश्वरों के ईश्वर श्री शिवजी महाराज का अनादर किया है, इस‍लिए मैं तुझे शाप देता हूँ कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होगा।’&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुबेर के शाप से हेम माली का स्वर्ग से पतन हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर गिर गया। भूतल पर आते ही उसके शरीर में श्वेत कोढ़ हो गया। उसकी स्त्री भी उसी समय अंतर्ध्यान हो गई। मृत्युलोक में आकर माली ने महान दु:ख भोगे, भयानक जंगल में जाकर बिना अन्न और जल के भटकता रहा। रात्रि को निद्रा भी नहीं आती थी, परंतु शिवजी की पूजा के प्रभाव से उसको पिछले जन्म की स्मृति का ज्ञान अवश्य रहा। घूमते-घ़ूमते एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुँच गया, जो ब्रह्मा से भी अधिक वृद्ध थे और जिनका आश्रम ब्रह्मा की सभा के समान लगता था। हेम माली वहाँ जाकर उनके पैरों में पड़ गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसे देखकर मारर्कंडेय ऋषि बोले तुमने ऐसा कौन-सा पाप किया है, जिसके प्रभाव से यह हालत हो गई। हेम माली ने सारा वृत्तांत कह ‍सुनाया। यह सुनकर ऋषि बोले- निश्चित ही तूने मेरे सम्मुख सत्य वचन कहे हैं, इसलिए तेरे उद्धार के लिए मैं एक व्रत बताता हूँ। यदि तू ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करेगा तो तेरे सब पाप नष्ट हो जाएँगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह सुनकर हेम माली ने अत्यंत प्रसन्न होकर मुनि को साष्टांग प्रणाम किया। मुनि ने उसे स्नेह के साथ उठाया। हेम माली ने मुनि के कथनानुसार विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से अपने पुराने स्वरूप में आकर वह अपनी स्त्री के साथ सुखपूर्वक रहने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्देश्य ==&lt;br /&gt;
भगवान कृष्ण ने कहा- हे राजन! यह योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल देता है। इसके व्रत से समस्त पाप दूर हो जाते हैं और अंत में स्वर्ग प्राप्त होता है।&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
== एकादशी पूजा विधि ==&lt;br /&gt;
* एकादशी के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और एकादशी व्रत का संकल्प करें।&lt;br /&gt;
* घर के मंदिर में पूजा करने से पहले एक वेदी बनाएं और उस पर 7 धान (उरद, मूंग, गेहूं, चना, जौ, चावल और बाजरा) रखें।&lt;br /&gt;
* 5 आम या अशोक के पत्ते कलश में रखकर वेदी पर रख दें।&lt;br /&gt;
* अब वेदी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें।&lt;br /&gt;
* उसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, मौसमी फल और तुलसी की दाल चढ़ाएं।&lt;br /&gt;
* फिर अगरबत्ती का प्रयोग कर विष्णु जी की आरती करें।&lt;br /&gt;
* शाम को भगवान विष्णु की आरती करने के बाद फल लें।&lt;br /&gt;
* रात को सोने के बजाय भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।&lt;br /&gt;
*अगली सुबह किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और जितना हो सके उतना दान और दक्षिणा देकर उसे विदा करें।&lt;br /&gt;
*इसके बाद अपना खुद का खाना खाकर व्रत तोड़ें।&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[देवशयनी एकादशी]]&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाह्य कडियाँ ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [https://books.google.co.in/books?id=59IoDwAAQBAJ&amp;amp;pg=PA58&amp;amp;dq=%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%80+%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A5%80&amp;amp;hl=sa&amp;amp;sa=X&amp;amp;ved=0ahUKEwiv2qjbx9rbAhWJpo8KHYv6BJkQ6AEIIzAA#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%AF%E0%A5% योगिनी एकादशी] &lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20180617142245/https://books.google.co.in/books?id=-W9YAtfQs1UC&amp;amp;pg=PT74&amp;amp;dq=%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%80+%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A5%80&amp;amp;hl=sa&amp;amp;sa=X&amp;amp;ved=0ahUKEwiv2qjbx9rbAhWJpo8KHYv6BJkQ6AEIKDAB#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%AF%E0%A5% एकादशी महात्म्य]&lt;br /&gt;
* [https://www.pdfhunter.com/yogini-ekadashi-vrat-katha-pdf-free-download/ योगिनी एकादशी व्रत कथा पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड करें ]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{हिन्दू पर्व-त्यौहार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कृति]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू त्यौहार]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:धार्मिक त्यौहार]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:एकादशी]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;रोहित साव27</name></author>
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