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	<title>लक्ष्मीनारायण गर्ग - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>2409:4043:2D19:BD76:BA1A:B4F6:806E:FE26 २३ जून २०२१ को १९:१३ बजे</title>
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		<updated>2021-06-23T19:13:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{भूमिका फिर लिखें|date=अक्टूबर 2017}}&lt;br /&gt;
{{विकिफ़ाइ|date=अक्टूबर 2017}}&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;डॉ॰ लक्ष्मीनारायण गर्ग&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; विश्वविख्यात हास्यकवि &amp;quot;पद्मश्री&amp;quot; स्वर्गीय काका हाथरसी के पुत्र थे। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के हाथरस नगर में २९ अक्टूबर सन १९३२ को एक सभ्रांत कला-प्रेमी परिवार में हुआ था। लक्ष्मीनारायण गर्ग ने संगीत शिक्षा पाँच वर्ष कि उम्र से प्रारंभ कर दी थी।इन्होंने हाथरस के श्रेष्ठ तबला-वादक प.लोकमान और पं॰ हरिप्रसाद से तबला-वादन सीखा और कुछ अन्य प्रतिष्ठित गुरुओं से हारमोनियम, वायलिन, नृत्य और कंठ की शिक्षा भी प्राप्त की। इसके बाद जयपुर के पंडित शशिमोहन भट्ट ने इन्हें सितार-वादन में दीक्षित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लक्ष्मीनारायण गर्ग सन १९६६ से ६८ तक ऑल इंडिया रेडियो, नई दिल्ली के ऑडिशन बोर्ड तथा सन १९७९ में बोर्ड  के माननीय सदस्य रहे। आप संगीत-नाटक अकादेमी, नई दिल्ली; सुर सिंगार संसद, मुंबई; एशियन आर्ट्स एंड कल्चर सेंटर, मुंबई; इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ म्यूजिक, कोलकत्ता ; ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) और रेडियो सीलोन (श्रीलंका) के परामर्शदाता भी रहे थे। सितार-वादन में आपका सबसे पहला कार्यक्रम कश्मीर के श्रीनगर रेडियो स्टेशन से सन १९५३ में प्रसारित हुआ। लोक संगीत और शाश्त्रीय संगीत से सम्बंधित आपकी वार्ताएं ऑल इंडिया रेडियो से प्रसारित होने लगीं। सन १९५५ में लक्ष्मीनारायण गर्ग संगीत कार्यालय हाथरस से प्रकाशित होने वाले &amp;quot;संगीत&amp;quot; नामक मासिक पत्रिका के संपादक और बाद में प्रधान संपादक हो गए। &amp;quot;म्यूजिक मिरर &amp;quot; (अंग्रेजी मासिक पत्रिका) तथा &amp;quot;हास्यरसम &amp;quot; (वार्षिक पत्रिका) का संपादन भी आपने किया। सन १९६२ में आप मुंबई चले गए, जहाँ आपको फिल्म-संगीत और शाश्त्रीय-संगीत के क्षेत्र में कार्य करने का भरपूर अवसर मिला। आपके पिता ने &amp;quot;काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट&amp;quot; स्थापित किया जिसके द्वारा प्रतिवर्ष एक हास्य-व्यंग के कवि तथा एक संगीत के लेखक को पुरस्कृत करके सम्मानित किया जाता है। आप उसके मैनेजिंग ट्रस्टी और संगीत कार्यालय के मैनेजिंग पार्टनर भी थे|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ॰ लक्ष्मीनारायण गर्ग ने संगीत की विभिन्न विद्याओं मैं १५० से भी अधिक पुस्तकों का लेखन, भाषांतर तथा सम्पादन किया है, जिनमें से &amp;quot;हमारे संगीत रत्न&amp;quot; और &amp;quot;कत्थक नृत्य&amp;quot; नामक पुस्तकें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत हो चुकी हैं। सन १९९८-९९ में भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (संस्कृति विभाग) द्वारा आपको संगीत-लेखन के क्षेत्र में &amp;quot;सीनीयर फेलोशिप &amp;quot; उपलब्ध हुई और सन २००८ में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा &amp;quot;भरतनाट्यम&amp;quot; पुस्तक पर पुरस्कार प्राप्त हुआ। भारतीय संगीत प्रचारार्थ आपने हांगकांग, अमेरिका, जापान. थाईलैंड, सिंगापुर तथा कनाडा इत्यादि देशों में अनेक भाषण किये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ॰ गर्ग ने लुप्त होती ब्रज-संस्कृति के उठान की दृष्टि से ब्रजभाषा में &amp;quot;&amp;#039;[[जमुना किनारे]]&amp;quot;&amp;#039; नामक फिल्म का निर्माण, निर्देशन और संगीत निर्देशन किया। इनके अनुसार शास्त्रीय -संगीत कि विरासत को सुरक्षित रखना है, तो उसे पश्चिम के सांस्कृतिक आक्रमण से बचाना होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपकी धर्मपत्नी श्रीमती रीता गर्ग आपकी प्रेरणा रही हैं एवं पुत्र अशोक गर्ग और तीन पुत्रियाँ विविध कार्य क्षेत्रों में कार्यरत रहते हुए भी कला और संस्कृति के विकासार्थ सदैव जागरूक रहते हैं। आपके परिवार के अन्य सदस्य भी साहित्य और संगीत के क्षेत्र में निष्ठा के साथ सक्रिय हैं। २९ अक्टूबर सन २००७ को डॉ॰ गर्ग के ७५वें जन्मदिवस पर हाथरस नगर में &amp;quot;अमृत-महोत्सव&amp;quot; मनाया गया, जिसमें भारतवर्ष कि १०८ संगीत-संस्थाओं की ओर से माल्यार्पण करके आपका विशेष सम्मान किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बाल्यकाल, किशोरावस्था और युवावस्था में डॉ॰ गर्ग को क्रमशः नेताजी सुभाषचंद्र बोस, पं॰ जवाहरलाल नेहरु और अरविन्द आश्रम पांडिचेरी की श्री माँ का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ। आप शास्त्रीय -संगीत, फिल्म-संगीत और लोक-संगीत के अधिकारी विद्वान हैं। संगीत- जगत में आपको बड़े सम्मान से देखा जाता है। आपने गुरु-पद सेवा और विद्वानों के सहवास द्वारा वेद का मर्म जाना तथा संगीत और साहित्य के सागर में अवगाहन किया। आपने कथक नृत्य से संबंधित पुस्तकों का निर्माण किया अपितू आपने भरतनाट्यम नृत्य की पुस्तक का हिंदी अनुवाद कर हिंदी भाषियों को  ज्ञान प्रदान कर लाभान्वित किया | डॉक्टर लक्ष्मीनारायण गर्ग जी भारतीय कला और संस्कृति के लिए समर्पित होकर निरंतर कार्यरत थे।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=http://sangeetnatak.gov.in/sna/citation_popup.php?id=170&amp;amp;at=4 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 अक्तूबर 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170908235257/http://sangeetnatak.gov.in/sna/citation_popup.php?id=170&amp;amp;at=4 |archive-date=8 सितंबर 2017 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=https://chakradhar.in/poets/laxmi-narain-garg/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 अक्तूबर 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171025080937/https://chakradhar.in/poets/laxmi-narain-garg/ |archive-date=25 अक्तूबर 2017 |url-status=dead }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=https://www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/hathras/Hathras-10700-7 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 अक्तूबर 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171025022638/https://www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/hathras/Hathras-10700-7 |archive-date=25 अक्तूबर 2017 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==निधन==&lt;br /&gt;
30 अप्रैल 2021 को आपका महामारी [[कोरोना]] से अपने गृह नगर [[हाथरस]] में निधन हो गया |&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संगीत]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:निर्माता]]&lt;/div&gt;</summary>
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