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	<title>विधि - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>imported&gt;Billinghurst: Radhe shyam mourya (Talk) के संपादनों को हटाकर 1997kB के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<updated>2020-12-25T05:17:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/Radhe_shyam_mourya&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/Radhe shyam mourya&quot;&gt;Radhe shyam mourya&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:Radhe_shyam_mourya&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:Radhe shyam mourya (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:1997kB&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:1997kB (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;1997kB&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;विधि&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (या, &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;कानून&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;) किसी नियमसंहिता को कहते हैं। विधि प्रायः भलीभांति लिखी हुई संसूचकों (इन्स्ट्रक्शन्स) के रूप में होती है। समाज को सम्यक ढंग से चलाने के लिये विधि अत्यन्त आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विधि मनुष्य का आचरण के वे सामान्य नियम होते हैं जो राज्य द्वारा स्वीकृत तथा लागू किये जाते है, जिनका पालन अनिवार्य होता है। पालन न करने पर [[न्यायपालिका]] दण्ड देती है। कानूनी प्रणाली कई तरह के अधिकारों और जिम्मेदारियों को विस्तार से बताती है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विधि शब्द अपने आप में ही [[विधाता]] से जुड़ा हुआ शब्द लगता है। आध्यात्मिक जगत में &amp;#039;विधि के विधान&amp;#039; का है। जीवन एवं मृत्यु विधाता के द्वारा बनाया हुआ कानून है या विधि का ही विधान कह सकते है। सामान्य रूप से विधाता का कानून, प्रकृति का कानून, जीव-जगत का कानून एवं समाज का कानून। राज्य द्वारा निर्मित विधि से आज पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। [[राजनीति]] आज समाज का अनिवार्य अंग हो गया है। समाज का प्रत्येक जीव कानूनों द्वारा संचालित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज समाज में भी विधि के शासन के नाम पर दुनिया भर में सरकारें नागरिकों के लिये विधि का निर्माण करती है। विधि का उदेश्य समाज के आचरण को नियमित करना है। [[अधिकार]] एवं [[कर्तव्य|दायित्वों]] के लिये स्पष्ट व्याख्या करना भी है साथ ही समाज में हो रहे अनैकतिक कार्य या लोकनीति के विरूद्ध होने वाले कार्यो को अपराध घोषित करके अपराधियों में भय पैदा करना भी [[दण्डविधि|अपराध विधि]] का उदेश्य है। [[संयुक्त राष्ट्र|संयुक्त राष्ट्र संघ]] ने 1945 से लेकर आज तक अपने चार्टर के माध्यम से या अपने विभिन्न अनुसांगिक संगठनो के माध्यम से दुनिया के राज्यो को व नागरिकों को यह बताने का प्रयास किया कि बिना शांति के समाज का विकास संभव नहीं है परन्तु शांति के लिये सहअस्तित्व एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण ही नहीं आचरण को जिंदा करना भी जरूरी है। न्यायपूर्ण समाज में ही शांति, सदभाव, मैत्री, सहअस्तित्व कायम हो पाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिचय ==&lt;br /&gt;
कानून या विधि का मतलब है मनुष्य के व्यवहार को नियंत्रित और संचालित करने वाले नियमों, हिदायतों, पाबंदियों और हकों की संहिता। लेकिन यह भूमिका तो नैतिक, धार्मिक और अन्य सामाजिक संहिताओं की भी होती है। दरअसल, कानून इन संहिताओं से कई मायनों में अलग है। पहली बात तो यह है कि कानून सरकार द्वारा बनाया जाता है लेकिन समाज में उसे सभी के ऊपर समान रूप से लागू किया जाता है। दूसरे, ‘राज्य की इच्छा’ का रूप ले कर वह अन्य सभी सामाजिक नियमों और मानकों पर प्राथमिकता प्राप्त कर लेता है। तीसरे, कानून अनिवार्य होता है अर्थात् नागरिकों को उसके पालन करने के चुनाव की स्वतंत्रता नहीं होती। पालन न करने वाले के लिए कानून में दण्ड की व्यवस्था होती है। लेकिन, कानून केवल दण्ड ही नहीं देता। वह व्यक्तियों या पक्षों के बीच अनुबंध करने, विवाह, उत्तराधिकार, लाभों के वितरण और संस्थाओं को संचालित करने के नियम भी मुहैया कराता है। कानून स्थापित सामाजिक नैतिकताओं की पुष्टि की भूमिका भी निभाता है। चौथे, कानून की प्रकृति ‘सार्वजनिक’ होती है क्योंकि प्रकाशित और मान्यता प्राप्त नियमों की संहिता के रूप में उसकी रचना औपचारिक विधायी प्रक्रियाओं के ज़रिये की जाती है। अंत में कानून में अपने अनुपालन की एक नैतिक बाध्यता निहित है जिसके तहत वे लोग भी कानून का पालन करने के लिए मजबूर होते हैं जिन्हें वह अन्यायपूर्ण लगता है। राजनीतिक व्यवस्था चाहे लोकतांत्रिक हो या अधिनायकवादी, उसे कानून की किसी न किसी संहिता के आधार पर चलना पड़ता है। लेकिन, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में बदलते समय के साथ अप्रासंगिक हो गये या न्यायपूर्ण न समझे जाने वाले कानून को रद्द करने और उसकी जगह नया बेहतर कानून बनाने की माँग करने का अधिकार होता है। कानून की एक उल्लेखनीय भूमिका समाज को संगठित शैली में चलाने के लिए नागरिकों को शिक्षित करने की भी मानी जाती है। शुरुआत में राजनीतिशास्त्र के केंद्र में कानून का अध्ययन ही था। राजनीतिक दार्शनिक विधि के सार और संरचना के सवाल पर ज़बरदस्त बहसों में उलझे रहे हैं। कानून के विद्वानों को मानवशास्त्र, राजनीतिक अर्थशास्त्र, नैतिकशास्त्र और विधायी मूल्य-प्रणाली का अध्ययन भी करना पड़ता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[संविधान]]सम्मत आधार पर संचालित होने वाले उदारतावादी लोकतंत्रों में ‘[[विधि शासन|कानून के शासन’]] की धारणा प्रचलित होती है। इन व्यवस्थाओं में कानून के दायरे के बाहर कोई काम नहीं करता, न व्यक्ति और न ही सरकार। इसके पीछे कानून का उदारतावादी सिद्धांत है जिसके अनुसार कानून का उद्देश्य व्यक्ति पर पाबंदियाँ लगाना न हो कर उसकी [[स्वतन्त्रता|स्वतंत्रता]] की गारंटी करना है। उदारतावादी सिद्धांत मानता है कि कानून के बिना व्यक्तिगत आचरण को संयमित करना नामुमकिन हो जाएगा और एक के अधिकारों को दूसरे के हाथों हनन से बचाया नहीं जा सकेगा। इस प्रकार [[जॉन लॉक]] की भाषा में कानून का मतलब है जीवन, स्वतंत्रता और सम्पत्ति की रक्षा के लिए कानून। उदारतावादी सिद्धांत स्पष्ट करता है कि कानून के बनाने और लागू करने के तरीके कौन-कौन से होने चाहिए। उदाहरणार्थ, कानून निर्वाचित विधिकर्त्ताओं द्वारा आपसी विचार-विमर्श के द्वारा किया जाना चाहिए। दूसरे, कोई कानून पिछली तारीख़ से लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि उस सूरत में वह नागरिकों को उन कामों के लिए दण्डित करेगा जो तत्कालीन कानून के मुताबिक किये गये थे। इसी तरह उदारतावादी कानून क्रूर और अमानवीय किस्म की सज़ाएँ देने के विरुद्ध होता है।  राजनीतिक प्रभावों से निरपेक्ष रहने वाली एक निष्पक्ष न्यायपालिका की स्थापना की जाती है ताकि कानून की व्यवस्थित व्याख्या करते हुए पक्षकारों के बीच उसके आधार पर फ़ैसला हो सके। मार्क्सवादियों की मान्यता है कि कानून के शासन की अवधारणा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी करने के नाम पर सम्पत्ति संबंधी अधिकारों की रक्षा करते हुए पूँजीवादी व्यवस्था की सुरक्षा के काम आती है। इसका नतीजा सामाजिक विषमता और वर्गीय प्रभुत्व को बनाये रखने में निकलता है। [[कार्ल मार्क्स|मार्क्स]] कानून को राजनीति और विचारधारा की भाँति उस सुपरस्ट्रक्चर या अधिरचना का हिस्सा मानते हैं जिसका बेस या आधार पूँजीवादी उत्पादन की विधि पर रखा जाता है। [[नारीवाद|नारीवादियों]] ने भी कानून के शासन की अवधारणा की आलोचना की है कि वह लैंगिक निष्पक्षता पर आधारित नहीं है। इसीलिए न्यायपालिका और कानून के पेशे पर पुरुषों का कब्ज़ा रहता है। बहुसंस्कृतिवाद के पैरोकारों का तर्क है कि कानून असल में प्रभुत्वशाली सांस्कृतिक समूहों के मूल्यों और रवैयों की नुमाइंदगी ही करता है। परिणामस्वरूप अल्पसंख्यक और हाशियाग्रस्त समूहों के मूल्य और सरोकार नज़रअंदाज़ किये जाते रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कानून और नैतिकता के बीच अंतर के सवाल पर दार्शनिक शुरू से ही सिर खपाते रहे हैं। कानून का आधार नैतिक प्रणाली में मानने वालों का विश्वास ‘[[प्राकृतिक विधि|प्राकृतिक कानून’]] के सिद्धांत में है। प्लेटो और उनके बाद अरस्तू की मान्यता थी कि कानून और नैतिकता में नज़दीकी रिश्ता होता है। एक न्यायपूर्ण समाज वही हो सकता है जिसमें कानून नैतिक नियमों पर आधारित प्रज्ञा की पुष्टि करते हों। मध्ययुगीन ईसाई विचारक थॉमस एक्विना भी मानते थे कि इस धरती पर उत्तम जीवन व्यतीत करने के लिए नेचुरल लॉ यानी ईश्वर प्रदत्त नैतिकताओं के मुताबिक कानून होने चाहिए। उन्नीसवीं सदी में बुद्धिवाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की प्रतिष्ठा बढ़ने के कारण प्राकृतिक कानून का सिद्धांत निष्प्रभावी होता चला गया। कानून को नैतिक, धार्मिक और रहस्यवादी मान्यताओं से मुक्त करने की कोशिशें हुईं। [[जॉन आस्टिन]] ने ‘[[प्रत्यक्षवाद (विधिक)|विधिक प्रत्यक्षतावाद’]] की स्थापना की जिसका दावा था कि कानून का सरोकार किसी उच्चतर नैतिक या धार्मिक उसूल से न हो कर किसी सम्प्रभु व्यक्ति या संस्था से होता है। कानून इसलिए कानून है कि उसका पालन करवाया जाता है और करना पड़ता है। विधिक प्रत्यक्षतावाद की कहीं अधिक व्यावहारिक और नफ़ीस व्याख्या एच.एल.ए. हार्ट की रचना &amp;#039;द कंसेप्ट ऑफ़ लॉ&amp;#039; (1961) में मिलती है। हार्ट कानून को नैतिक नियमों के दायरे से निकाल कर मानव समाज के संदर्भ में परिभाषित करते हैं। उनके मुताबिक कानून प्रथम और द्वितीयक नियमों का संयोग है। प्रथम श्रेणी के नियमों को &amp;#039;कानून के सार&amp;#039; की संज्ञा देते हुए हार्ट कहते हैं कि उनका सम्बन्ध सामाजिक व्यवहार के विनियमन से है। जैसे, फ़ौजदारी कानून। द्वितीय श्रेणी के नियम सरकारी संस्थाओं को हिदायत देते हैं कि कानून किस तरह बनाया जाए, उनका किस तरह कार्यान्वयन किया जाए, किस तरह उसके आधार पर फ़ैसले किये जाएँ और इन आधारों पर किस तरह उसकी वैधता स्थापित की जाए। हार्ट द्वारा प्रतिपादित विधिक प्रत्यक्षतावाद के सिद्धांत की आलोचना राजनीतिक दार्शनिक रोनॉल्ड ड्वॅर्किन ने की है। उनके अनुसार कानून केवल नियमों की संहिता ही नहीं होता और न ही आधुनिक विधि प्रणालियाँ कानून की वैधता स्थापित करने के लिए किसी एक समान तरीके का प्रावधान करती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कानून और नैतिकता के बीच संबंध की बहस नाज़ियों के अत्याचारों को दण्डित करने वाले न्यूरेम्बर्ग मुकदमे में भी उठी थी। प्रश्न यह था कि क्या उन कामों को अपराध ठहराया जा सकता है जो राष्ट्रीय कानून के मुताबिक किये गये हों? इसके जवाब के लिए प्राकृतिक कानून की अवधारणा का सहारा लिया गया, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति [[मानवाधिकार|मानवाधिकारों]] की भाषा में हुई। दरअसल कानून और नैतिकता के रिश्ते का प्रश्न बेहद जटिल है और [[गर्भपात]], [[वेश्यावृत्ति]], [[पोर्नोग्राफ़ी]], टीवी और फ़िल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा, अपनी कोख किराए पर देने वाली माताओं और जेनेटिक इंजीनियरिंग जैसे मसलों के सदंर्भ में बार-बार उठती रहती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रकार==&lt;br /&gt;
विधि के दो प्रकार हैं-&lt;br /&gt;
*(1) &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;मौलिक विधि&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;- विधि जो कर्तव्य व अधिकारों की परिभाषा दे।&lt;br /&gt;
*(2) &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;प्रक्रिया विधि&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;- विधि जो कार्यवाही के प्रक्रमों (प्रोसीजर्स) को निर्धारण करे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कौनसी विधियाँ, प्रक्रिया हैं-&lt;br /&gt;
*(क) [[दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (भारत)|दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973]],&lt;br /&gt;
*(ख) [[सिविल प्रक्रिया संहिता, १९०८|सिविल प्रक्रिया संहिता 1908]], &lt;br /&gt;
*(ग) [[भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872|भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872]] आदि प्रक्रिया विधि हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मौलिक विधियाँ निम्न हैं-&lt;br /&gt;
*(क) [[भारतीय संविदा अधिनियम १८७२|भारतीय संविदा अधिनियम]], &lt;br /&gt;
*(ख) [[भारतीय दण्ड संहिता|भारतीय दण्ड संहिता 1860]], &lt;br /&gt;
*(ग) [[सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम १८८२|सम्पत्ति हस्तान्तरण अधिनियम 1882]] आदि।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
1. एच.एल.ए. हार्ट (1961), द कंसेप्ट ऑफ़ लॉ, क्लैरंडन प्रेस, ऑक्सफ़र्ड.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2. रोनॉल्ड ड्वॉर्किन (1986), लाज़ एम्पायर, कोलिंस, लंदन, 1986&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
3. जे. रैज़, द अथॉरिटी ऑल लॉ, क्लैरंडन प्रेस, ऑक्सफ़र्ड&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
4. ओ. डब्ल्यू. होम्स (1932), द प्योर थियरी ऑफ़ लॉ, युनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया प्रेस, बरकल.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5. एच. कोलिंस (1982), मार्क्सिज़म ऐंड लॉ, ऑक्सफ़र्ड युनिवर्सिटी प्रेस, ऑक्सफ़र्ड.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[विधिवेत्ता]]&lt;br /&gt;
*[[संविधान]]&lt;br /&gt;
*[[न्यायशास्त्र]]&lt;br /&gt;
*[[अपराध]]&lt;br /&gt;
*[[दण्ड]]&lt;br /&gt;
*[[न्यायालय]]&lt;br /&gt;
*[[पुलिस]]&lt;br /&gt;
*[[मुकदमा]]&lt;br /&gt;
*[[भारत में विधिक शिक्षा]]&lt;br /&gt;
*[[विधि एवं अर्थशास्त्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
*[https://web.archive.org/web/20180706170239/https://www.taxvax.com/wp-content/uploads/2017/05/Complete-Legal-Glossary-Updated.pdf Complete Legal Glossary (Eng_Hind) updated]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20180412212045/http://www.legislative.gov.in/legal-glossary विधि शब्दावली] (विधि और न्याय मन्त्रालय)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20130311073656/http://hi.wiktionary.org/wiki/Legal_Terms विधि शब्दावली] (हिन्दी विकिकोश)&lt;br /&gt;
* [https://hi.wiktionary.org/wiki/विक्षनरी:विधिशास्त्र_में_प्रयुक्त_शब्दावली विधिशास्त्र में प्रयुक्त शब्दावली] (हिन्दी विकिकोश)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20151007043252/https://hi.wiktionary.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A5%80 प्रशासनिक शब्दावली] (हिन्दी विकिकोश)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20180412212045/http://www.legislative.gov.in/legal-glossary विधिक शब्दावली] (विधिक विभाग, भारत सरकार)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20120204094736/http://www.lawentrance.com/hi/index.htm ला इंट्रैंस डॉट कॉम] (विधि से संबन्धित विविध ज्ञान)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{मानविकी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:विधि]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:मानविकी]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:सामाजिक अवधारणाएँ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:सत्ता (सामाजिक व राजनैतिक)]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Billinghurst</name></author>
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