<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AD%E0%A4%B5_%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80</id>
	<title>वैभव लक्ष्मी - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AD%E0%A4%B5_%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AD%E0%A4%B5_%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80&amp;action=history"/>
	<updated>2026-08-25T22:43:00Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.43.6</generator>
	<entry>
		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AD%E0%A4%B5_%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80&amp;diff=4151&amp;oldid=prev</id>
		<title>imported&gt;रोहित साव27: 2409:4051:9:4DA:5055:3429:4841:9AE9 (वार्ता) के 1 संपादन वापस करके InternetArchiveBotके अंतिम अवतरण को स्थापित किया (ट्विंकल)</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AD%E0%A4%B5_%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80&amp;diff=4151&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2020-06-30T11:03:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/2409:4051:9:4DA:5055:3429:4841:9AE9&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/2409:4051:9:4DA:5055:3429:4841:9AE9&quot;&gt;2409:4051:9:4DA:5055:3429:4841:9AE9&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:2409:4051:9:4DA:5055:3429:4841:9AE9&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:2409:4051:9:4DA:5055:3429:4841:9AE9 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;वार्ता&lt;/a&gt;) के 1 संपादन वापस करके InternetArchiveBotके अंतिम अवतरण को स्थापित किया (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=WP:TW&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;WP:TW (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;ट्विंकल&lt;/a&gt;)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{आधार}}{{स्रोतहीन}}&lt;br /&gt;
{{ज्ञानसन्दूक त्योहार &lt;br /&gt;
| त्योहार_के_नाम = वैभव लक्ष्मी व्रत&lt;br /&gt;
|चित्र =&lt;br /&gt;
|शीर्षक = वैभव लक्ष्मी व्रत&lt;br /&gt;
|आधिकारिक_नाम = वैभव लक्ष्मी व्रत&lt;br /&gt;
|अन्य नाम =&lt;br /&gt;
|अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], भारतीय प्रवासी&lt;br /&gt;
|उद्देश्य = धन सम्पति प्राप्ति&lt;br /&gt;
|आरम्भ = शुक्रवार&lt;br /&gt;
|तिथि = &lt;br /&gt;
|दीर्घ-प्रकार = &lt;br /&gt;
|तारीख़ = &lt;br /&gt;
|तिथि२००६ = सभी शुक्रवार&lt;br /&gt;
|तिथि२००७ = सभी &lt;br /&gt;
|तिथि२००८ = सभी &lt;br /&gt;
|अनुष्ठान = &lt;br /&gt;
|उत्सव = &lt;br /&gt;
|समान पर्व= [[श्री महालक्ष्मीमहात्म्य व्रत]]&lt;br /&gt;
|type =&amp;lt;!--DO NOT CHANGE! THIS CONTROLS COLOUR--&amp;gt;hindu&amp;lt;!--DO NOT CHANGE! THIS CONTROLS COLOUR--&amp;gt;&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का भी व्रत रखा जाता है। इसे वैभवलक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है। इस दिन स्त्री-पुरुष देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हुए श्वेत पुष्प, श्वेत चंदन से पूजा कर तथा चावल और खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करते हुए खीर अवश्य खानी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== उद्देश्य == सुख और सम्रिधि के लिए&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== विधि ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Kalasha.jpg|left|100px|[[मंगल कलश|कलश स्थापना]]]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== वैभवलक्ष्मी व्रतकथा ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी शहर में लाखों लोग रहते थे। सभी अपने-अपने कामों में रत रहते थे। किसी को किसी की परवाह नहीं थी। भजन-कीर्तन, भक्ति-भाव, दया-माया, परोपकार जैसे संस्कार कम हो गए। शहर में बुराइयाँ बढ़ गई थीं। शराब, जुआ, रेस, व्यभिचार, चोरी-डकैती वगैरह बहुत से गुनाह शहर में होते थे। इनके बावजूद शहर में कुछ अच्छे लोग भी रहते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसे ही लोगों में शीला और उनके पति की गृहस्थी मानी जाती थी। शीला धार्मिक प्रकृति की और संतोषी स्वभाव वाली थी। उनका पति भी विवेकी और सुशील था। शीला और उसका पति कभी किसी की बुराई नहीं करते थे और प्रभु भजन में अच्छी तरह समय व्यतीत कर रहे थे। शहर के लोग उनकी गृहस्थी की सराहना करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देखते ही देखते समय बदल गया। शीला का पति बुरे लोगों से दोस्ती कर बैठा। अब वह जल्द से जल्द करोड़पति बनने के ख्वाब देखने लगा। इसलिए वह गलत रास्ते पर चल पड़ा फलस्वरूप वह रोडपति बन गया। यानी रास्ते पर भटकते भिखारी जैसी उसकी हालत हो गई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शराब, जुआ, रेस, चरस-गाँजा वगैरह बुरी आदतों में शीला का पति भी फँस गया। दोस्तों के साथ उसे भी शराब की आदत हो गई। इस प्रकार उसने अपना सब कुछ रेस-जुए में गँवा दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शीला को पति के बर्ताव से बहुत दुःख हुआ, किन्तु वह भगवान पर भरोसा कर सबकुछ सहने लगी। वह अपना अधिकांश समय प्रभु भक्ति में बिताने लगी। अचानक एक दिन दोपहर को उनके द्वार पर किसी ने दस्तक दी। शीला ने द्वार खोला तो देखा कि एक माँजी खड़ी थी। उसके चेहरे पर अलौकिक तेज निखर रहा था। उनकी आँखों में से मानो अमृत बह रहा था। उसका भव्य चेहरा करुणा और प्यार से छलक रहा था। उसको देखते ही शीला के मन में अपार शांति छा गई। शीला के रोम-रोम में आनंद छा गया। शीला उस माँजी को आदर के साथ घर में ले आई। घर में बिठाने के लिए कुछ भी नहीं था। अतः शीला ने सकुचाकर एक फटी हुई चद्दर पर उसको बिठाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
माँजी बोलीं- क्यों शीला! मुझे पहचाना नहीं? हर शुक्रवार को लक्ष्मीजी के मंदिर में भजन-कीर्तन के समय मैं भी वहाँ आती हूँ।&amp;#039; इसके बावजूद शीला कुछ समझ नहीं पा रही थी। फिर माँजी बोलीं- &amp;#039;तुम बहुत दिनों से मंदिर नहीं आईं अतः मैं तुम्हें देखने चली आई।&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
माँजी के अति प्रेमभरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए और वह बिलख-बिलखकर रोने लगी। माँजी ने कहा- &amp;#039;बेटी! सुख और दुःख तो धूप और छाँव जैसे होते हैं। धैर्य रखो बेटी! मुझे तेरी सारी परेशानी बता।&amp;#039;&lt;br /&gt;
माँजी के व्यवहार से शीला को काफी संबल मिला और सुख की आस में उसने माँजी को अपनी सारी कहानी कह सुनाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कहानी सुनकर माँजी ने कहा- &amp;#039;कर्म की गति न्यारी होती है। हर इंसान को अपने कर्म भुगतने ही पड़ते हैं। इसलिए तू चिंता मत कर। अब तू कर्म भुगत चुकी है। अब तुम्हारे सुख के दिन अवश्य आएँगे। तू तो माँ लक्ष्मीजी की भक्त है। माँ लक्ष्मीजी तो प्रेम और करुणा की अवतार हैं। वे अपने भक्तों पर हमेशा ममता रखती हैं। इसलिए तू धैर्य रखकर माँ लक्ष्मीजी का व्रत कर। इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा।&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शीला के पूछने पर माँजी ने उसे व्रत की सारी विधि भी बताई। माँजी ने कहा- &amp;#039;बेटी! माँ लक्ष्मीजी का व्रत बहुत सरल है। उसे &amp;#039;वरदलक्ष्मी व्रत&amp;#039; या &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; कहा जाता है। यह व्रत करने वाले की सब मनोकामना पूर्ण होती है। वह सुख-संपत्ति और यश प्राप्त करता है।&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शीला यह सुनकर आनंदित हो गई। शीला ने संकल्प करके आँखें खोली तो सामने कोई न था। वह विस्मित हो गई कि माँजी कहाँ गईं? शीला को तत्काल यह समझते देर न लगी कि माँजी और कोई नहीं साक्षात्‌ लक्ष्मीजी ही थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दूसरे दिन शुक्रवार था। सबेरे स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर शीला ने माँजी द्वारा बताई विधि से पूरे मन से व्रत किया। आखिरी में प्रसाद वितरण हुआ। यह प्रसाद पहले पति को खिलाया। प्रसाद खाते ही पति के स्वभाव में फर्क पड़ गया। उस दिन उसने शीला को मारा नहीं, सताया भी नहीं। शीला को बहुत आनंद हुआ। उनके मन में &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; के लिए श्रद्धा बढ़ गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शीला ने पूर्ण श्रद्धा-भक्ति से इक्कीस शुक्रवार तक &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; किया। इक्कीसवें शुक्रवार को माँजी के कहे मुताबिक उद्यापन विधि कर के सात स्त्रियों को &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; की सात पुस्तकें उपहार में दीं। फिर माताजी के &amp;#039;धनलक्ष्मी स्वरूप&amp;#039; की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करने लगीं- &amp;#039;हे माँ धनलक्ष्मी! मैंने आपका &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है। हे माँ! मेरी हर विपत्ति दूर करो। हमारा सबका कल्याण करो। जिसे संतान न हो, उसे संतान देना। सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना। कुँआरी लड़की को मनभावन पति देना। जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना। सभी को सुखी करना। हे माँ! आपकी महिमा अपार है।&amp;#039; ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के &amp;#039;धनलक्ष्मी स्वरूप&amp;#039; की छबि को प्रणाम किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
व्रत के प्रभाव से शीला का पति अच्छा आदमी बन गया और कड़ी मेहनत करके व्यवसाय करने लगा। उसने तुरंत शीला के गिरवी रखे गहने छुड़ा लिए। घर में धन की बाढ़ सी आ गई। घर में पहले जैसी सुख-शांति छा गई। &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; का प्रभाव देखकर मोहल्ले की दूसरी स्त्रियाँ भी विधिपूर्वक &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; करने लगीं।&lt;br /&gt;
वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; उद्यापन विधि&lt;br /&gt;
सात, ग्यारह या इक्कीस, जितने भी शुक्रवारों की मन्नत माँगी हो, उतने शुक्रवार ‍तक यह व्रत पूरी श्रद्धा तथा भावना के साथ करना चाहिए। आखिरी शुक्रवार को इसका शास्त्रीय विधि के अनुसार उद्यापन करना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आखिरी शुक्रवार को प्रसाद के लिए खी‍र बनानी चाहिए। जिस प्रकार हर शुक्रवार को हम पूजन करते हैं, वैसे ही करना चाहिए। पूजन के बाद माँ के सामने एक श्रीफल फोड़ें फिर कम से कम सात‍ कुँआरी कन्याओं या सौभाग्यशाली स्त्रियों को कुमकुम का तिलक लगाकर माँ वैभवलक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक की एक-एक प्रति उपहार में देनी चाहिए और सबको खीर का प्रसाद देना चाहिए। इसके बाद माँ लक्ष्मीजी को श्रद्धा सहित प्रणाम करना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर माताजी के &amp;#039;धनलक्ष्मी स्वरूप&amp;#039; की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करें- &amp;#039;हे माँ धनलक्ष्मी! मैंने आपका &amp;#039;वैभवलक्ष्मी व्रत&amp;#039; करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है। हे माँ! हमारी (जो मनोकामना हो वह बोले) मनोकामना पूर्ण करें। हमारी हर विपत्ति दूर करो। हमारा सबका कल्याण करो। जिसे संतान न हो, उसे संतान देना। सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना। कुँआरी लड़की को मनभावन पति देना। जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना। सभी को सुखी करना। हे माँ! आपकी महिमा अपार है।&amp;#039; आपकी जय हो! ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के &amp;#039;धनलक्ष्मी स्वरूप&amp;#039; की छबि को प्रणाम करें। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== देखें ==&lt;br /&gt;
[[लक्ष्मी]]&lt;br /&gt;
 {{हिन्दू पर्व-त्यौहार}}&lt;br /&gt;
 {{हिन्दू धर्म}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20090331194407/http://hindi.webduniya.com/religion/religion/hindu/0712/20/1071220063_1.htm वेब दुनिया बर वैभव लक्ष्मी व्रत व्रत विधि]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू व्रत]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कृति]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू त्यौहार]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:धार्मिक त्यौहार]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;रोहित साव27</name></author>
	</entry>
</feed>