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	<title>शृंगार रस - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>imported&gt;रोहित साव27: अनुनाद सिंह के अवतरण 4668161पर वापस ले जाया गया : . (ट्विंकल)</title>
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		<updated>2021-01-25T09:00:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/अनुनाद सिंह&quot;&gt;अनुनाद सिंह&lt;/a&gt; के अवतरण 4668161पर वापस ले जाया गया : . (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=WP:TW&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;WP:TW (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;ट्विंकल&lt;/a&gt;)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोतहीन|date=अप्रैल 2020}}&lt;br /&gt;
[[File:Mani Madhava Chakyar-Sringara-new.jpg|thumb|मणि माधव चाक्यार द्वारा शृंगार रस का प्रदर्शन]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;शृंगार रस&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]] में से एक प्रमुख [[रस (काव्य शास्त्र)|रस]] है। यह [[रति भाव]] को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
[[File:Sringara3sm.jpg|thumb|भरतनाट्यम में शृंगार रस का प्रदर्शन]]&lt;br /&gt;
शृंगार मुख्यतः संयोग तथा विप्रलंभ या वियोग के नाम से दो भागों में विभाजित किया जाता है, किन्तु [[धनंजय]] आदि कुछ विद्वान् विप्रलंभ के पूर्वानुराग भेद को संयोग-विप्रलंभ-विरहित पूर्वावस्था मानकर अयोग की संज्ञा देते हैं तथा शेष विप्रयोग तथा संभोग नाम से दो भेद और करते हैं। संयोग की अनेक परिस्थितियों के आधार पर उसे अगणेय मानकर उसे केवल आश्रय भेद से नायकारब्ध, नायिकारब्ध अथवा उभयारब्ध, प्रकाशन के विचार से प्रच्छन्न तथा प्रकाश या स्पष्ट और गुप्त तथा प्रकाशनप्रकार के विचार से संक्षिप्त, संकीर्ण, संपन्नतर तथा समृद्धिमान नामक भेद किए जाते हैं तथा विप्रलंभ के पूर्वानुराग या अभिलाषहेतुक, मान या ईश्र्याहेतुक, प्रवास, विरह तथा करुण प्रिलंभ नामक भेद किए गए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;[[काव्यप्रकाश]]&amp;quot; का विरहहेतुक और शापहेतुक भेद प्रवास के ही अंतर्गत गृहीत हो सकता है, &amp;quot;[[साहित्यदर्पण]]&amp;quot; में करुण विप्रलंभ की कल्पना की गई है। पूर्वानुराग कारण की दृष्टि से गुणश्रवण, प्रत्यक्षदर्शन, चित्रदर्शन, स्वप्न तथा इंद्रजाल-दर्शन-जन्य एवं राग स्थिरता और चमक के आधार पर नीली, कुसुंभ तथा मंजिष्ठा नामक भेदों में बाँटा जाता है। &amp;quot;अलंकारकौस्तुभ&amp;quot; में शीघ्र नष्ट होनेवाले तथा शोभित न होनेवाले राग को &amp;quot;हारिद्र&amp;quot; नाम से चौथा बताया है, जिसे उनका टीकाकार &amp;quot;श्यामाराग&amp;quot; भी कहता है। पूर्वानुराग का दश कामदशाएँ - अभिलाष, चिंता, अनुस्मृति, गुणकीर्तन, उद्वेग, विलाप, व्याधि, जड़ता तथा मरण (या अप्रदश्र्य होने के कारण उसके स्थान पर मूर्छा) - मानी गई हैं, जिनके स्थान पर कहीं अपने तथा कहीं दूसरे के मत के रूप में [[विष्णुधर्मोत्तरपुराण]], [[दशरूप]]क की अवलोक टीका, [[साहित्य दर्पण|साहित्यदर्पण]], प्रतापरुद्रीय तथा [[सरस्वतीकंठाभरण]] तथा [[काव्यदर्पण]] में किंचित् परिवर्तन के साथ चक्षुप्रीति, मनःसंग, स्मरण, निद्राभंग, तनुता, व्यावृत्ति, लज्जानाश, उन्माद, मूर्च्छा तथा मरण का उल्लेख किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[शारदातनय]] (13वीं शती) ने इच्छा तथा उत्कंठा को जोड़कर तथा [[विद्यानाथ]] (14वीं शती पूर्वार्ध) ने स्मरण के स्थान पर संकल्प लाकर और प्रलाप तथा संज्वर को बढ़ाकर इनकी संख्या 12 मानी है। यह युक्तियुक्त नहीं है और इनका अंतर्भाव हो सकता है। मान-विप्रलंभ प्रणय तथा ईष्र्या के विचार से दो प्रकार का तथा मान की स्थिरता तथा अपराध की गंभीरता के विचार से लघु, मध्यम तथा गुरु नाम से तीन प्रकार का, प्रवासविप्रलंभ कार्यज, शापज, सँभ्रमज नाम से तीन प्रकार का और कार्यज के यस्यत्प्रवास या भविष्यत् गच्छत्प्रवास या वर्तमान तथा गतप्रवास या भविष्यत् गच्छत्प्रवास या वर्तमान तथा गतप्रवास या भूतप्रवास, शापज के ताद्रूप्य तथा वैरूप्य, तथा संभ्रमज के उत्पात, वात, दिव्य, मानुष तथा परचक्रादि भेद के कारण कई प्रकार का होता है। विरह गुरुजनादि की समीपता के कारण पास रहकर भी [[नायिका]] तथा [[नायक]] के संयोग के होने का तथा करुण विप्रलंभ मृत्यु के अनंतर भी पुनर्जीवन द्वारा मिलन की आशा बनी रहनेवाले वियोग को कहते हैं। श्रृंगार रस के अंतर्गत नायिकालंकार, ऋतु तथा प्रकृति का भी वर्णन किया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[रस (काव्य शास्त्र)]]&lt;br /&gt;
*[[नायक नायिका भेद]]&lt;br /&gt;
*[[शृंगारशतक]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{रस छन्द अलंकार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:रस]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:काव्यशास्त्र]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:नाट्यकला]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दी साहित्य]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;रोहित साव27</name></author>
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