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	<title>सरोजिनी नायडू - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;Prabhachatterji १० सितम्बर २०२० को ०९:२६ बजे</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{आज का आलेख}}&lt;br /&gt;
{{Infobox Person&lt;br /&gt;
|name=सरोजिनी नायडू&lt;br /&gt;
| image = Sarojini Naidu 1964 stamp of India.jpg&lt;br /&gt;
| image_size = 200px&lt;br /&gt;
| caption = 1964 की डाक टिकट पर श्रीमती सरोजिनी नायडू का चित्र&lt;br /&gt;
|birth_date=सरोजिनी चट्टोपाध्याय&amp;lt;br /&amp;gt;{{birth date|1879|2|13|mf=y}}&lt;br /&gt;
|death_date={{death date and age|1949|3|2|1879|2|13|mf=y}}&lt;br /&gt;
|birth_place=[[हैदराबाद]], [[आंध्र प्रदेश]], [[भारत]]&lt;br /&gt;
|death_place=[[इलाहाबाद]], [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]&lt;br /&gt;
|spouse=श्री मुत्तयला गोविंदराजुलु नायडु&lt;br /&gt;
|children=जयसूर्य, पद्मजा, रणधीर और लीलामणि&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mahatma &amp;amp; Sarojini Naidu 1930.JPG|thumb|right|250px|महात्मा गांधी के साथ सरोजिनी नायडू]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सरोजिनी नायडू&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ([[१३ फरवरी]] [[१८७९]] - [[२ मार्च]] [[१९४९]]) का जन्म [[भारत]] के [[हैदराबाद]] नगर में हुआ था। इनके पिता [[अघोरनाथ चट्टोपाध्याय]] एक नामी विद्वान तथा माँ कवयित्री थीं और [[बांग्ला]] में लिखती थीं। बचपन से ही कुशाग्र-बुद्धि होने के कारण उन्होंने १२ वर्ष की अल्पायु में ही १२हवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की और १३ वर्ष की आयु में लेडी ऑफ दी लेक नामक कविता रची। सर्जरी में क्लोरोफॉर्म की प्रभावकारिता साबित करने के लिए [[हैदराबाद]] के [[निज़ाम]] द्वारा प्रदान किए गए दान से &amp;quot;सरोजिनी नायडू&amp;quot; को इंग्लैंड भेजा गया था सरोजिनी नायडू को पहले [[लंदन]] के किंग्स कॉलेज और बाद में [[कैम्ब्रिज]] के गिरटन कॉलेज में अध्ययन करने का मौका मिला।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=https://www.mpositive.in/tag/sixth-nizam-of-hyderabad-mahboob-ali-pasha/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180825002427/https://www.mpositive.in/tag/sixth-nizam-of-hyderabad-mahboob-ali-pasha/ |archive-date=25 अगस्त 2018 |url-status=dead }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
===भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका===&lt;br /&gt;
वे [[१८९५]] में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए [[इंग्लैंड]] गईं और पढ़ाई के साथ-साथ कविताएँ भी लिखती रहीं। गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। उनके दूसरे तथा तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम तथा ब्रोकन विंग ने उन्हें एक सुप्रसिद्ध कवयित्री बना दिया।[[१८९८]] में सरोजिनी नायडू, डॉ॰ गोविंदराजुलू नायडू की जीवन-संगिनी बनीं। &lt;br /&gt;
[[१९१४]] में इंग्लैंड में वे पहली बार [[गाँधीजी]] से मिलीं और उनके विचारों से प्रभावित होकर देश के लिए समर्पित हो गयीं। एक कुशल सेनापति की भाँति उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र ([[सत्याग्रह]] हो या संगठन की बात) में दिया। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गयीं। संकटों से न घबराते हुए वे एक धीर वीरांगना की भाँति गाँव-गाँव घूमकर ये देश-प्रेम का अलख जगाती रहीं और देशवासियों को उनके कर्तव्य की याद दिलाती रहीं। उनके वक्तव्य जनता के हृदय को झकझोर देते थे और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए प्रेरित कर देते थे। वे बहुभाषाविद थी और क्षेत्रानुसार अपना भाषण [[अंग्रेजी]], [[हिंदी]], [[बंगला]] या [[गुजराती]] में देती थीं। [[लंदन]] की सभा में अंग्रेजी में बोलकर इन्होंने वहाँ उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web|url=http://in.jagran.yahoo.com/news/opinion/general/6_3_4170415.html|title=स्मरण:भारत कोकिला सरोजिनी नायडू|access-date=[[२८ अक्तूबर]] [[२००९]]|format=एचटीएमएल|publisher=याहू जागरण|language=}}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी लोकप्रियता और प्रतिभा के कारण [[१९२५]] में [[कानपुर]] में हुए कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्षा बनीं और [[१९३२]] में भारत की प्रतिनिधि बनकर [[दक्षिण अफ्रीका]] भी गईं। भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वे [[उत्तरप्रदेश]] की पहली [[राज्यपाल]] बनीं। श्रीमती [[एनी बेसेन्ट]] की प्रिय मित्र और गाँधीजी की इस प्रिय शिष्या ने अपना सारा जीवन देश के लिए अर्पण कर दिया। [[२ मार्च]] [[१९४९]] को उनका देहांत हुआ। [[१३ फरवरी]] [[१९६४]] को भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में १५ नए पैसे का एक [[डाकटिकट]] भी जारी किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== राज्यपाल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद, देश को उस लक्ष्य तक पहुँचाने वाले नेताओं के सामने अब दूसरा ही कार्य था। आज तक उन्होंने संघर्ष किया था। किन्तु अब राष्ट्र निर्माण का उत्तरदायित्व उनके कंधों पर आ गया। कुछ नेताओं को सरकारी तंत्र और प्रशासन में नौकरी दे दी गई थी। उनमें सरोजिनी नायडू भी एक थीं। उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। वह विस्तार और जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रांत था। उस पद को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, &amp;#039;मैं अपने को &amp;#039;क़ैद कर दिये गये जंगल के पक्षी&amp;#039; की तरह अनुभव कर रही हूँ।&amp;#039; लेकिन वह प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इच्छा को टाल न सकीं जिनके प्रति उनके मन में गहन प्रेम व स्नेह था। इसलिए वह लखनऊ में जाकर बस गईं और वहाँ सौजन्य और गौरवपूर्ण व्यवहार के द्वारा अपने राजनीतिक कर्तव्यों को निभाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{-}}&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{भारतीय स्वतंत्रता संग्राम}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{भारत की पहली महिलाएँ}}&lt;br /&gt;
{{pp-semi-template|small=yes}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:१८७९ जन्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:१९४९ में निधन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारतीय अंग्रेज़ी साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के राज्यपाल]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Prabhachatterji</name></author>
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