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	<title>सोमनाथ मन्दिर - अवतरण इतिहास</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/134.0.197.197&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/134.0.197.197&quot;&gt;134.0.197.197&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:134.0.197.197&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:134.0.197.197 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:2401:4900:54C1:4F4C:F48B:A264:B058:38A3&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:2401:4900:54C1:4F4C:F48B:A264:B058:38A3 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;2401:4900:54C1:4F4C:F48B:A264:B058:38A3&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{ज्ञानसन्दूक हिन्दू मन्दिर&lt;br /&gt;
| image              = [[File:Somnath-current.jpg|300px]]&lt;br /&gt;
| alt                = Image of temple&lt;br /&gt;
| caption            = मन्दिर का सामने से लिया गया चित्र&lt;br /&gt;
| map_type           = India Gujarat&lt;br /&gt;
| map_caption        = गुजरात में अवस्थिति&lt;br /&gt;
| coordinates        = {{coord|20|53|16.9|N|70|24|5.0|E|type:landmark_region:IN|display=inline,title}}&lt;br /&gt;
| country            = भारत&lt;br /&gt;
| state              = [[गुजरात]]&lt;br /&gt;
| district           = [[गिर सोमनाथ जिला|गिर सोमनाथ]]&lt;br /&gt;
| locale             = [[वेरावल]]&lt;br /&gt;
| elevation_m        =&lt;br /&gt;
| deity              = [[सोमनाथ]] ([[शिव]])&lt;br /&gt;
| festivals          = [[महाशिवरात्रि]]&lt;br /&gt;
| architecture       = [[हिन्दू वास्तुकला]]&lt;br /&gt;
| inscriptions       =&lt;br /&gt;
| year_completed     = 1951 (वर्तमान भवन)&lt;br /&gt;
| creator            =&lt;br /&gt;
| temple_board       = श्री सोमनाथ न्यास&lt;br /&gt;
| website            = {{url|http://www.somnath.org}}&lt;br /&gt;
 -&lt;br /&gt;
{{url|https://www.bharatvarshgyan.com/2020/05/history-of-somnath-temple.html}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सोमनाथ मन्दिर&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; भूमण्डल में दक्षिण एशिया स्थित [[भारत]]वर्ष के पश्चिमी छोर पर [[गुजरात]] नामक प्रदेश स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक [[शिव मन्दिर]] का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के 12 [[ज्योतिर्लिंग|ज्योतिर्लिंगों]] में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। [[गुजरात]] के [[सौराष्ट्र]] क्षेत्र के [[वेरावल]] बन्दरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख [[ऋग्वेद]] में स्पष्ट है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह मन्दिर हिन्दू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यन्त वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरम्भ भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात् लौहपुरुष [[सरदार वल्लभ भाई पटेल]] ने करवाया और पहली दिसम्बर 1955 को भारत के राष्ट्रपति [[ डॉ राजेंद्र प्रसाद जी]] ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। सोमनाथ मन्दिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है। मन्दिर प्रांगण में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घण्टे का साउण्ड एण्ड लाइट शो चलता है, जिसमें सोमनाथ मन्दिर के इतिहास का बड़ा ही सुन्दर सचित्र वर्णन किया जाता है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्त्व बढ़ गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सोमनाथजी के मन्दिर की व्यवस्था और संचालन का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के अधीन है। सरकार ने ट्रस्ट को जमीन, बाग-बगीचे देकर आय का प्रबन्ध किया है। यह तीर्थ पितृगणों के [[श्राद्ध]], नारायण बलि आदि कर्मो के लिए भी प्रसिद्ध है। [[चैत्र]], [[भाद्रपद]], [[कार्तिक]] माह में यहाँ श्राद्ध करने का विशेष महत्त्व बताया गया है। इन तीन महीनों में यहाँ श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ लगती है। इसके अलावा यहाँ तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इस त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्त्व है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== किंवदन्तियाँ ==&lt;br /&gt;
प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार में बताये कथानक के अनुसार सोम अर्थात् चन्द्र ने, दक्षप्रजापति राजा की 27 कन्याओं से विवाह किया था। लेकिन उनमें से रोहिणी नामक अपनी पत्नी को अधिक प्यार व सम्मान दिया कर होते हुए अन्याय को देखकर क्रोध में आकर दक्ष ने चन्द्रदेव को शाप दे दिया कि अब से हर दिन तुम्हारा तेज (काँति, चमक) क्षीण होता रहेगा। फलस्वरूप हर दूसरे दिन चन्द्र का तेज घटने लगा। शाप से विचलित और दु:खी सोम ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। अन्ततः शिव प्रसन्न हुए और सोम-चन्द्र के शाप का निवारण किया। सोम के कष्ट को दूर करने वाले प्रभु शिव का स्थापन यहाँ करवाकर उनका नामकरण हुआ &amp;quot;सोमनाथ&amp;quot;।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे। तब ही शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पद्मचिह्न को हिरण की आँख जानकर अनजाने में तीर मारा था। तब ही कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुण्ठ गमन किया। इस स्थान पर बड़ा ही सुन्दर कृष्ण मन्दिर बना हुआ है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इतिहास ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Somnath temple ruins (1869).jpg|thumb|right|300px| 1869 में सोमनाथ मंदिर के अवशेष]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सर्वप्रथम एक मन्दिर ईसा के पूर्व में अस्तित्व में था जिस जगह पर द्वितीय बार मन्दिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में [[वल्लभीपुर|वल्लभी]] के मैत्रक राजाओं ने किया। आठवीं सदी में [[सिन्ध]] के अरबी गवर्नर &amp;#039;&amp;#039;जुनायद&amp;#039;&amp;#039; ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी। गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया। इस मन्दिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली थी। [[अरब]] यात्री [[अल-बरुनी]] ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित हो [[महमूद ग़ज़नवी]] ने सन 1024 में कुछ 5,000 साथियों के साथ सोमनाथ मन्दिर पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। 50,000 लोग मन्दिर के अन्दर हाथ जोड़कर पूजा अर्चना कर रहे थे, प्रायः सभी कत्ल कर दिये गये।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web|url= http://www.experiencefestival.com/a/Mahmud_of_Ghazni_-_Military_campaigns/id/5269269|title= Mahmud of Ghazni - Military campaigns|access-date= [[14 अप्रैल]] [[2008]]|format= |publisher= वननेस कमिटमेंट|language= अंग्रेज़ी|archive-url= https://web.archive.org/web/20080618162055/http://www.experiencefestival.com/a/Mahmud_of_Ghazni_-_Military_campaigns/id/5269269|archive-date= 18 जून 2008|url-status= live}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web|url= http://nannu.pugmarks.com/dashora-family/notes/somnath.htm|title= Somnath Temple|access-date= [[14 अप्रैल]] [[2008]]|format= एचटीएम|publisher= नन्नूपुगमार्क्स.कॉम|language= अंग्रेज़ी|archive-url= https://web.archive.org/web/20071027051337/http://nannu.pugmarks.com/dashora-family/notes/somnath.htm|archive-date= 27 अक्तूबर 2007|url-status= dead}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके बाद गुजरात के राजा भीम और [[मालवा]] के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया। सन 1297 में जब [[दिल्ली सल्तनत]] ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे पाँचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह [[औरंगजेब]] ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया। इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृह मन्त्री [[सरदार वल्लभ भाई पटेल]] ने बनवाया और पहली दिसम्बर 1955 को भारत के राष्ट्रपति  डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1948 में [[प्रभासतीर्थ]], &amp;#039;प्रभास पाटण&amp;#039; के नाम से जाना जाता था। इसी नाम से इसकी तहसील और नगर पालिका थी। यह [[जूनागढ़]] रियासत का मुख्य नगर था। लेकिन 1948 के बाद इसकी तहसील, नगर पालिका और तहसील कचहरी का वेरावल में विलय हो गया। मंदिर का बार-बार खंडन और जीर्णोद्धार होता रहा पर शिवलिंग यथावत रहा। लेकिन सन 1048 में महमूद गजनी ने जो शिवलिंग खण्डित किया, वह यही आदि शिवलिंग था। इसके बाद प्रतिष्ठित किए गए शिवलिंग को 1300 में अलाउद्दीन की सेना ने खण्डित किया। इसके बाद कई बार मन्दिर और शिवलिंग को खण्डित किया गया। बताया जाता है [[आगरे का किला|आगरा के किले]] में रखे देवद्वार सोमनाथ मन्दिर के हैं। महमूद गजनी सन 1026 में लूटपाट के दौरान इन द्वारों को अपने साथ ले गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सोमनाथ मन्दिर के मूल मन्दिर स्थल पर मन्दिर ट्रस्ट द्वारा निर्मित नवीन मन्दिर स्थापित है। राजा [[कुमार पाल]] द्वारा इसी स्थान पर अन्तिम मन्दिर बनवाया गया था। सौराष्ट्र के मुख्यमन्त्री [[उच्छंगराय नवलशंकर ढेबर]] ने १९ अप्रैल १९४० को यहाँ उत्खनन कराया था। इसके बाद भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने उत्खनन द्वारा प्राप्त ब्रह्मशिला पर शिव का ज्योतिर्लिग स्थापित किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== भारत की स्वतन्त्रता के बाद पुनर्निर्माण===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने 8 मई 1950 को मन्दिर की आधारशिला रखी तथा ११ मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ [[राजेंद्र प्रसाद]] ने मन्दिर में ज्योतिर्लिग स्थापित किया।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web|url=http://indianexpress.com/article/explained/somnath-temple-rahul-gandhi-babri-demolition-ram-rath-yatra-ram-mandir-ayodhya-verdict-hindutvain-nehru-sardar-patel-4971403/|title=In Nehru vs Patel-Prasad on Somnath, a context of Partition, nation building|access-date=8 दिसंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171208122419/http://indianexpress.com/article/explained/somnath-temple-rahul-gandhi-babri-demolition-ram-rath-yatra-ram-mandir-ayodhya-verdict-hindutvain-nehru-sardar-patel-4971403/|archive-date=8 दिसंबर 2017|url-status=live}}&amp;lt;/ref&amp;gt; नवीन सोमनाथ मन्दिर 1962 में पूर्ण निर्मित हो गया। 1970 में [[जामनगर]] की राजमाता ने अपने पति की स्मृति में उनके नाम से &amp;#039;दिग्विजय द्वार&amp;#039; बनवाया। इस द्वार के पास राजमार्ग है और पूर्व गृहमन्त्री सरदार [[वल्लभ भाई पटेल]] की प्रतिमा है। सोमनाथ मन्दिर निर्माण में पटेल का बड़ा योगदान रहा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Image:PINQ3113.jpg|left|thumb|300px|बाणस्तम्भ (इसके शीर्ष में [[तीर|बाण]] देखिए)]]&lt;br /&gt;
मन्दिर के दक्षिण में समुद्र के किनारे एक स्तम्भ है। उसके ऊपर एक [[तीर]] रखकर संकेत किया गया है कि सोमनाथ मन्दिर और [[दक्षिण ध्रुव]] के बीच में पृथ्वी का कोई भूभाग नहीं है (&amp;#039;&amp;#039;आसमुद्रान्त दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधितs ज्योतिर्मार्ग&amp;#039;&amp;#039;)। इस स्तम्भ को &amp;#039;[[बाणस्तम्भ]]&amp;#039; कहते हैं। &amp;lt;ref&amp;gt;[https://books.google.co.in/books?id=A1acCwAAQBAJ&amp;amp;pg=PT76&amp;amp;lpg=PT76&amp;amp;dq=बाणस्तम्भ&amp;amp;source=bl&amp;amp;ots=8qz1kJpqxs&amp;amp;sig=b9e2KcgPHk5xb-96nCgodDeG-xM&amp;amp;hl=en&amp;amp;sa=X&amp;amp;ved=0ahUKEwj4y_jpr8PXAhXKMI8KHfs4ALMQ6AEIbjAO#v=onepage&amp;amp;q=%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AD&amp;amp;f=false Maritime Heritage of India] (By Indian Navy)&amp;lt;/ref&amp;gt; मन्दिर के पृष्ठ भाग में स्थित प्राचीन मन्दिर के विषय में मान्यता है कि यह [[पार्वती]] जी का मन्दिर है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[जवाहरलाल नेहरू]] ने सोमनाथ मन्दिर के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव का ‘हिन्दू पुनरुत्थानवाद’ कहकर विरोध भी किया। उस समय नेहरू से हुई बहस को [[कन्हैयालाल मुंशी]] ने अपनी पुस्तक ‘पिलग्रिमेज टू फ़्रीडम’ में दर्ज किया है। वे लिखते हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
: &amp;#039;&amp;#039;... कैबिनेट की बैठक के अन्त में जवाहरलाल ने मुझे बुलाकर कहा—मुझे सोमनाथ के पुनरुद्धार के लिए किया जा रहा आपका प्रयास पसन्द नहीं आ रहा। यह हिन्दू पुनरुत्थानवाद है। ‘मैंने जवाब दिया कि मैं घर जाकर, जो कुछ भी घटित हुआ है उसके बारे में आपको जानकारी दूँगा ...&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:&amp;#039;&amp;#039;... दिसम्बर 1922 में मैं उस भग्न मन्दिर की तीर्थ यात्रा पर निकला। वहाँ पहुँचकर मैंने मन्दिर में भयंकर दुरवस्था देखी—अपवित्र, जला हुआ और ध्वस्त! पर फिर भी वह दृढ़ खड़ा था, मानो हमारे साथ की गई कृतघ्नता और अपमान को न भूलने का सन्देश दे रहा हो। उस दिन सुबह जब मैंने पवित्र सभामण्डप की ओर कदम बढ़ाए तो मन्दिर के खमृभों के भग्नावशेषों और बिखरे पत्थरों को देखकर मेरे अन्दर अपमान की कैसी अग्निशिखा प्रज्जवलित हो उठी थी, मैं बता नहीं सकता।&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
के.एम. मुंशी आगे लिखते हैं-&lt;br /&gt;
: &amp;#039;&amp;#039;नवम्बर 1947 के मध्य में सरदार प्रभास पाटन के दौरे पर थे जहाँ उन्होंने मन्दिर का दर्शन किया। एक सार्वजनिक सभा में सरदार ने घोषणा की: ‘नए साल के इस शुभ अवसर पर हमने फैसला किया है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण करना चाहिए। सौराष्ट्र के लोगों को अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना होगा। यह एक पवित्र कार्य है जिसमें सभी को भाग लेना चाहिए।’ ...कुछ लोगों ने प्राचीन मंदिर के भग्नावशेषों को प्राचीन स्मारक के रूप में संजोकर रखने का सुझाव दिया जिन्हें मृत पत्थर जीवन्त स्वरूप की तुलना में अधिक प्राणवान लगते थे। लेकिन मेरा स्पष्ट मानना था कि सोमनाथ का मन्दिर कोई प्राचीन स्मारक नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के हृदय में स्थित पूजा स्थल था जिसका पुनर्निर्माण करने के लिए अखिल राष्ट्र प्रतिबद्ध था।&amp;#039;&amp;#039;&amp;lt;ref&amp;gt;[https://www.panchjanya.com/Encyc/2020/8/3/Jai-Somnath-Jai-Shree-Ram-.amp.html जय सोमनाथ! जय श्रीराम! ]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== तीर्थ स्थान और मन्दिर ==&lt;br /&gt;
मन्दिर संख्या 1 के प्रांगण में [[हनुमान]]जी का मन्दिर, पर्दी विनायक, नवदुर्गा खोडीयार, महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित सोमनाथ ज्योतिर्लिग, अहिल्येश्वर, अन्नपूर्णा, गणपति और काशी विश्वनाथ के मन्दिर हैं। अघोरेश्वर मन्दिर नं॰ 6 के समीप भैरवेश्वर मन्दिर, महाकाली मन्दिर, दुखहरण जी की जल समाधि स्थित है। पंचमुखी महादेव मन्दिर कुमार वाडा में, विलेश्वर मंदिर नं. 12 के नजदीक और नं॰ 15 के समीप राममन्दिर स्थित है। नागरों के इष्टदेव हाटकेश्वर मंदिर, देवी हिंगलाज का मन्दिर, कालिका मन्दिर, बालाजी मन्दिर, नरसिंह मन्दिर, नागनाथ मन्दिर समेत कुल 42 मन्दिर नगर के लगभग दस किलो मीटर क्षेत्र में स्थापित हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी क्षेत्र के प्रमुख मन्दिर ==&lt;br /&gt;
[[File:Gita Mandir on Triveni Ghat near Somnath Temple Gujrat.jpg|thumb|300px|सोमनाथ के निकट त्रिवेणी घाट पर स्थित गीता मन्दिर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वेरावल प्रभास क्षेत्र के मध्य में समुद्र के किनारे मन्दिर बने हुए हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शशिभूषण मन्दिर, भीड़भंजन गणपति, बाणेश्वर, चंद्रेश्वर-रत्नेश्वर, कपिलेश्वर, रोटलेश्वर, भालुका तीर्थ है। भालकेश्वर, प्रागटेश्वर, पद्म कुण्ड, पाण्डव कूप, द्वारिकानाथ मन्दिर, बालाजी मन्दिर, लक्ष्मीनारायण मन्दिर, रूदे्रश्वर मन्दिर, सूर्य मन्दिर, हिंगलाज गुफा, गीता मन्दिर, बल्लभाचार्य महाप्रभु की 65वीं बैठक के अलावा कई अन्य प्रमुख मन्दिर है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रभास खण्ड में विवरण है कि सोमनाथ मन्दिर के समयकाल में अन्य देव मन्दिर भी थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इनमें शिवजी के 135, विष्णु भगवान के 5, देवी के 25, सूर्यदेव के 16, गणेशजी के 5, नाग मन्दिर 1, क्षेत्रपाल मन्दिर 1, कुण्ड 19 और नदियाँ 9 बताई जाती हैं। एक शिलालेख में विवरण है कि महमूद के हमले के बाद इक्कीस मन्दिरों का निर्माण किया गया। सम्भवत: इसके पश्चात भी अनेक मन्दिर बने होंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सोमनाथ से करीब दो सौ किलोमीटर दूरी पर प्रमुख तीर्थ श्रीकृष्ण की [[द्वारिका]] है। यहाँ भी प्रतिदिन [[द्वारिकाधीश मंदिर|द्वारिकाधीश]] के दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यहाँ [[गोमती नदी]] है। इसके स्नान का विशेष महत्त्व बताया गया है। इस नदी का जल सूर्योदय पर बढ़ता जाता है और सूर्यास्त पर घटता जाता है, जो सुबह सूरज निकलने से पहले मात्र एक डेढ़ फीट ही रह जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अन्य दर्शनीय स्थल व मन्दिर==&lt;br /&gt;
1.अहिल्या बाई का मन्दिर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2.प्राची त्रिवेदी&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
3.वाड़ातीर्थ&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
4.यादवस्थली&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==आवागमन==&lt;br /&gt;
* निकटतम रेलवे स्टेशन - वेरावल&lt;br /&gt;
* निकटतम हवाई अड्डा - दीव, राजकोट, अहमदाबाद, वड़ोदरा&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==चित्र वीथिका==&lt;br /&gt;
&amp;lt;gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
चित्र:Somanath from the beach edit.jpg|[https://rishudiary.blogspot.com/2019/11/somnath-jyotirlinga-history-story-in-hindi.html सोमनाथ महादेव मंदिर] &lt;br /&gt;
चित्र:Somnath temple.JPG&lt;br /&gt;
चित्र:Somnath Temple.jpg&lt;br /&gt;
चित्र:Somnath temple,gujarat.jpg&lt;br /&gt;
चित्र:Somanatha view-II.JPG&lt;br /&gt;
चित्र:Somnath-current.jpg|सोमनाथ मंदिर के सामने चित्र&lt;br /&gt;
&amp;lt;/gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
*[https://bharatvarshgyan.blogspot.com/2020/05/history-of-somnath-temple.html सोमनाथ मंदिर, गुजरात –]{{Dead link|date=फ़रवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20110323150637/http://www.jagranyatra.com/2010/04/somnath-temple-gujarat/ सोमनाथ – सबसे प्रमुख ज्योतिर्लिग]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20090813061219/http://hindi.webdunia.com/religion/religiousjourney/articles/0803/16/1080316037_1.htm श्री सोमनाथ महादेव मंदिर ]&lt;br /&gt;
*[https://bharatvarshgyan.blogspot.com/2020/05/history-of-somnath-temple.html तीर्थ परिचय - सोमनाथ मन्दिर]{{Dead link|date=फ़रवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }} (तीर्थयात्रा महासंघ)&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20101221232012/http://www.yatradham.gujarat.gov.in/Yatradhams/Somnath/default_h.html सोमनाथ] (गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड)&lt;br /&gt;
* [https://www.jaihindtimes.in/such-a-jyotirlinga-where-three-famous-rivers-are-mahasangam/ ऐसा ज्योतिर्लिंग जहां तीन प्रसिद्ध नदियों का होता हैे “महासंगम”]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{शैव धर्म}}&lt;br /&gt;
{{प्रमुख शिव मंदिर}}&lt;br /&gt;
{{हिन्दू तीर्थ}}&lt;br /&gt;
{{गुजरात}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:गुजरात में हिन्दू मन्दिर]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:गुजरात]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:स्थापत्य]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:ज्योतिर्लिंग]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारत के शिव मन्दिर]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:राजा भोज]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:गीर सोमनाथ ज़िला]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;संजीव कुमार</name></author>
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