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	<title>सौम - अवतरण इतिहास</title>
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	<updated>2026-08-19T08:11:55Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>imported&gt;InternetArchiveBot: Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.7</title>
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		<updated>2020-12-31T00:12:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.7&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[File:Fasting.JPG|227x227px|thumb|right|मस्जिद मे इफ़्तारी करते हुये।]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सौम&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ({{lang|ar|صوم}}) और बहुवचन  &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;सियाम&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ({{lang|ar|صيام}})  अरबी भाषा के शब्द हैं। उपवास को अरबी में &amp;quot;सौम&amp;quot; कहते हैं। [[रमज़ान]] के पवित्र माह में रखे जाने वाले उपवास ही &amp;quot;सौम&amp;quot; हैं। उर्दू और फ़ारसी भाषा में सौम को &amp;quot;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;रोज़ा&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;quot; कहते हैं।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस्लाम के पाँच मूलस्थंबों में से एक &amp;#039;&amp;#039;सौम&amp;#039;&amp;#039;  है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==नाम==&lt;br /&gt;
जैसे के सौम अरबी भाशा का शब्द है। अरबी देशों में इसको सौम के नाम से ही जाना जाता है। लैकिन फ़ारसी भाशा के असर रुसूख रखने वाले देश जैसे, तुर्की, ईरान, पाकिस्तान, भारत, बंग्लादेश, में इसे रोज़ा के नाम से जाना जाता है। मलेशिया, सिंगपूर, ब्रूनै जैसे देशों में इसे &amp;#039;&amp;#039;पुआसा&amp;#039;&amp;#039; कहते हैं, इस शब्द का मूल संस्कृत शब्द उपवास है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{फ़िक़्ह्|रोज़ा=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सौम (रोज़ा) और रमज़ान==&lt;br /&gt;
रमजान मास को अरबी में माह-ए-सियाम भी कहते हैं [[रमज़ान|रमजान]] का महीना कभी २९ दिन का तो कभी ३० दिन का होता है। इस महीने में उपवास रखते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==रोज़े का तरीक़ा==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* सहरी : उपवास के दिन सूर्योदय से पहले कुछ खालेते हैं जिसे सहरी कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* इफ़्तारी : दिन भर न कुछ खाते हैं न पीते हैं। शाम को सूर्यास्तमय के बाद रोज़ा खोल कर खाते हैं जिसे इफ़्तारी कहते हैं।&lt;br /&gt;
==रोजे के नियम==&lt;br /&gt;
&amp;#039;रोज़े&amp;#039; के कुछ नियम हैं, कुछ काम एसे होते हैं जिन के करने से रोज़ा टूट (खतम हो) जाता है, ओर उन से मिलते जुलते कुछ काम एसे होते हैं जिन के करने से रोजे पर कोई असर नहीं पड़ता, जिन कारणों से रोज़ा टूट जाता है वह दो प्रकार के होते हैं, एक वह जिन की वजह से रोज़े की क़ज़ा के साथ-साथ कफ्फारा भी वाजिब होता है और दूसरा वह जिन जिन की वजह से सिर्फ रोज़े की क़ज़ा करनी पड़ती है, कफ्फरा वाजिब नहीं होता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== वह चीज़ें जिन से रोज़ा टूट जाता है और कफ्फारा भी वाजिब होता है ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ चीज़ें एसी हैं कि अगर रोज़ा दार उन में से कोई एक भी अपनी मरज़ी से जान बूझ कर बग़ैर मजबूरी के कर ले तो उस पर क़ज़ा ओर कफ्फारा दोनों वाजिब हो जाते हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तक़रीबन पंद्रह चीज़ें एसी हैं कि अगर रोज़ा दार उन में से कोई एक भी अपनी मरज़ी से जान बूझ कर बग़ैर मजबूरी के कर ले तो उस पर क़ज़ा ओर कफ्फारा दोनों वाजिब हो जाते हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1. हम्बिसतरी करना, (मियां-बीवी का रोज़े की हालत में शारीरिक संबंध बनाना, दोनों पर क़ज़ा ओर कफ्फारा दोनों वाजिब हो जाते हैं) &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2. जान बूझ कर खाना, 3. पीना,(चाहे एसी चीज़ हो जो बतौरे ग़िज़ा के खाई जाती हो या एसी जो बतौरे दवा के इस्तेमाल की जाती हो) 4. बारिश का क़तरा जो मुंह में पड़ गया हो निगल लेना, 5. गैंहू खाना, 6. गैंहू चबाना, 7. गैंहू का दाना निगल लेना, 8. तिली का दाना या उस जैसी कोई चीज़ बाहर से मुंह में ले जाकर निगलना, 9. सूंधी मिट्टी खाना, 10. अगर किसी की आदत सामान्य मिट्टी खाने की हो तो उस के लिए सामान्य मिट्टी का भी यही हुक्म है, 14. नमक खाना!&amp;lt;blockquote&amp;gt;इन कामों से क़ज़ा ओर कफ्फारा दोनों के वाजिब होने के लिए तीन चीजों का होना जरूरी है,1. मरज़ी से किया हो, 2. मजबूर न हो, 3. जान बूझ कर किया हो।[https://junaidkabeer.blogspot.com/2020/05/blog-post_12.html?m=1]{{Dead link|date=दिसंबर 2020 |bot=InternetArchiveBot }}&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==क़ुर&amp;#039;आन में सौम==&lt;br /&gt;
क़ुरान में सौम के बारे में यूं प्रकटित होत है:&lt;br /&gt;
* يَا أَيُّهَا ٱلَّذِينَ آمَنُواْ كُتِبَ عَلَيْكُمُ ٱلصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ&lt;br /&gt;
{{Quote|&amp;quot;अय विश्वासियो! तुम को उपवास प्रकटित किया जाता है जैसे तुम से पहले वालों पर प्रकटित हुवा था, इस लिये तुम निग्रह रहो।&amp;quot;|क़ुरान, सूरह २, (अल-बक़रा) [[आयत]] 183&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite quran|2|183|s=ns}}&amp;lt;/ref&amp;gt;}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==क़ुर&amp;#039;आन में सौम के प्रकार ==&lt;br /&gt;
# आहार का सौम (सौम उत त&amp;#039;आम).&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite quran|2|187|s=ns}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
# धन का सौम (सौम उल माल).&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite quran|2|188|s=ns}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
# शब्द का सौम (सौम उल कलाम).&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite quran|19|26|s=ns}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
साधारण रूप में &amp;quot;सौम&amp;quot; का अर्थ &amp;quot;उपवास&amp;quot; (आहार का सौम) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[रमज़ान|रमजान]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सन्दर्भ ==&lt;br /&gt;
{{Reflist}}&lt;br /&gt;
{{रमज़ान}}&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:रमज़ान]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:इस्लाम के पाँच मूल स्तंभ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:इस्लाम]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:क़ुरआन]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;InternetArchiveBot</name></author>
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