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	<title>स्वामी श्रद्धानन्द - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;रोहित साव27: 2405:204:9195:CF29:0:0:24DE:98B0 (Talk) के संपादनों को हटाकर रोहित साव27 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/2405:204:9195:CF29:0:0:24DE:98B0&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/2405:204:9195:CF29:0:0:24DE:98B0&quot;&gt;2405:204:9195:CF29:0:0:24DE:98B0&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:2405:204:9195:CF29:0:0:24DE:98B0&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:2405:204:9195:CF29:0:0:24DE:98B0 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B527&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:रोहित साव27 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;रोहित साव27&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{Infobox person&lt;br /&gt;
| name               = स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती&lt;br /&gt;
| image              = SHARDHA.jpg&lt;br /&gt;
| caption            = &lt;br /&gt;
| quotation          = &lt;br /&gt;
| birth_name         = मुंशीराम विज &lt;br /&gt;
| birth_date         = {{birth date|df=yes|1856|2|22}}&lt;br /&gt;
| birth_place        = तलवान, [[जालन्धर]], [[पंजाब]], [[भारत]]&lt;br /&gt;
| dead               = &lt;br /&gt;
| death_date         = {{death date and age|df=yes|1926|12|23|1856|2|2}}&lt;br /&gt;
| death_place        = [[दिल्ली]], भारत&lt;br /&gt;
| death_cause        = अब्दुल रशीद नाम के एक उन्मादी द्वारा गोली मारकर [[हत्या]]&lt;br /&gt;
| occupation         = समाजसेवा, पत्रकार, स्वतन्त्रता सेनानी, अध्यापक&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; (मुंशीराम विज ; 22 फरवरी, 1856 - 23 दिसम्बर, 1926) [[भारत]] के शिक्षाविद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा [[आर्यसमाज]] के [[सन्यास|संन्यासी]] थे जिन्होंने [[स्वामी दयानन्द सरस्वती]] की शिक्षाओं का प्रसार किया। वे [[भारत]] के उन महान राष्ट्रभक्त सन्यासियों में अग्रणी थे, जिन्होंने अपना जीवन स्वाधीनता, स्वराज्य, शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने [[गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय]] आदि शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की और हिन्दू समाज व भारत  को संगठित करने तथा 1920 के दशक में [[शुद्धि आन्दोलन]] चलाने में महती भूमिका अदा की। [[भीमराव आम्बेडकर|डॉ भीमराव आम्बेडकर]] ने सन १९२२ में कहा था कि श्रद्धानन्द [[अस्पृश्यता|अछूतों]] के &amp;quot;महानतम और सबसे सच्चे हितैषी&amp;quot; हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;Dr. Babasaheb Ambedkar Writings &amp;amp; Speeches Vol. 9. Dr. Ambedkar Foundation. 1991. pp. 23–24. ISBN 978-93-5109-064-9.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== जीवन परिचय ==&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;स्वामी श्रद्धानन्द (मुंशीराम विज) &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; का जन्म 22 फरवरी सन् 1856 (फाल्गुन कृष्ण त्र्योदशी, विक्रम संवत् 1913) को [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] प्रान्त के [[जालन्धर]] जिले के तलवान ग्राम में एक खत्री परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री नानकचन्द विज [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी]] द्वारा शासित यूनाइटेड प्रोविन्स (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में पुलिस अधिकारी थे। उनके बचपन का नाम बृहस्पति विज और &amp;#039;&amp;#039;मुंशीराम विज&amp;#039;&amp;#039; था, किन्तु मुन्शीराम सरल होने के कारण अधिक प्रचलित हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पिता का स्थानान्तरण अलग-अलग स्थानों पर होने के कारण उनकी आरम्भिक शिक्षा अच्छी प्रकार नहीं हो सकी। लाहौर और जालंधर उनके मुख्य कार्यस्थल रहे। एक बार आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती वैदिक-धर्म के प्रचारार्थ [[बरेली]] पहुंचे। पुलिस अधिकारी नानकचन्द विज अपने पुत्र मुंशीराम विज को साथ लेकर स्वामी दयानन्द सरस्वती जी का प्रवचन सुनने पहुँचे। युवावस्था तक मुंशीराम विज ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते थे। लेकिन स्वामी दयानन्द जी के तर्कों और आशीर्वाद ने मुंशीराम विज को दृढ़ ईश्वर विश्वासी तथा [[वैदिक धर्म]] का अनन्य भक्त बना दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे एक सफल [[वकील]] बने तथा काफी नाम और प्रसिद्धि प्राप्त की। वकालत के साथ [[आर्य समाज]] जालंधर के जिला-अध्यक्ष के पद से उनका सार्वजनिक जीवन प्रारम्भ हुआ। [[आर्य समाज]] में वे बहुत ही सक्रिय रहते थे। [[दयानन्द सरस्वती|महर्षि दयानन्द]] के महाप्रयाण के बाद उन्होने स्वयं को स्व-देश, स्व-संस्कृति, स्व-समाज, स्व-भाषा, स्व-शिक्षा, नारी कल्याण, दलितोत्थान, स्वदेशी प्रचार, वेदोत्थान, पाखण्ड खण्डन, अन्धविश्‍वास-उन्मूलन और धर्मोत्थान के कार्यों को आगे बढ़ाने में पूर्णतः समर्पित कर दिया। गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना, अछूतोद्धार, शुद्धि, सद्धर्म प्रचार, पत्रिका द्वारा धर्म प्रचार, सत्य धर्म के आधार पर साहित्य रचना, वेद पढ़ने व पढ़ाने की व्यवस्था करना, धर्म के पथ पर अडिग रहना, आर्य भाषा के प्रचार तथा उसे जीवीकोपार्जन की भाषा बनाने का सफल प्रयास, आर्य जाति के उन्नति के लिए हर प्रकार से प्रयास करना आदि ऐसे कार्य हैं जिनके फलस्वरुप स्वामी श्रद्धानन्द अनन्त काल के लिए अमर हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका विवाह श्रीमती शिवा देवी के साथ हुआ था। जब आप ३५ वर्ष के थे तभी शिवा देवी स्वर्ग सिधारीं। उस समय उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां थीं। [[इन्द्र विद्यावाचस्पति]] उनके ही पुत्र थे। सन् १९१७ में उन्होने [[सन्यास]] धारण कर लिया और &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;स्वामी श्रद्धानन्द&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; के नाम से विख्यात हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== गुरुकुल की स्थापना ===&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mahatma Munshi Ram or Swami Shraddhanand Arya Samaj.jpg|right|thumb|200px|अपने आरम्भिक जीवनकाल में &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;स्वामी श्रद्धानन्द&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;]]&lt;br /&gt;
सन् 1901 में मुंशीराम विज ने अंग्रेजों द्वारा जारी शिक्षा पद्धति के स्थान पर वैदिक धर्म तथा भारतीयता की शिक्षा देने वाले संस्थान &amp;quot;[[गुरुकुल]]&amp;quot; की स्थापना की। [[हरिद्वार]] के [[कांगड़ी]] गांव में गुरुकुल विद्यालय खोला गया। इस समय यह मानद [[विश्वविद्यालय]] है जिसका नाम [[गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय]] है। [[महात्मा गांधी|गांधी जी]] उन दिनों [[अफ्रीका]] में संघर्षरत थे। महात्मा मुंशीराम विज जी ने गुरुकुल के छात्रों से 1500 रुपए एकत्रित कर गांधी जी को भेजे। गांधी जी जब अफ्रीका से भारत लौटे तो वे गुरुकुल पहुंचे तथा महात्मा मुंशीराम विज तथा राष्ट्रभक्त छात्रों के समक्ष नतमस्तक हो उठे। स्वामी श्रद्धानन्द जी ने ही सबसे पहले उन्हे &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;महात्मा&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; की उपाधि से विभूषित किया और बहुत पहले यह भविष्यवाणी कर दी थी कि वे आगे चलकर बहुत महान बनेंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== पत्रकारिता एवं हिन्दी-सेवा ===&lt;br /&gt;
उन्होने पत्रकारिता में भी कदम रखा। वे [[उर्दू]] और [[हिन्दी]] भाषाओं में धार्मिक व सामाजिक विषयों पर लिखते थे। बाद में [[स्वामी दयानंद सरस्वती|स्वामी दयानन्द सरस्वती]] का अनुसरण करते हुए उनने [[देवनागरी]] लिपि में लिखे हिन्दी को प्राथमिकता दी। उनका पत्र [[सद्धर्म प्रचारक]] पहले उर्दू में प्रकाशित होता था और बहुत लोकप्रिय हो गया था, किन्तु बाद में उनने इसको उर्दू के बजाय देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी में निकालना आरम्भ किया। इससे इनको आर्थिक नुकसान भी हुआ।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=http://www.chauthakhambhanews.com/swami-shraddhanand-jis-hindi-love/ |title=स्वामी श्रद्धानन्द जी का हिन्दी प्रेम |access-date=2 अप्रैल 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191130190211/https://www.chauthakhambhanews.com/swami-shraddhanand-jis-hindi-love/ |archive-date=30 नवंबर 2019 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt; उन्होने दो पत्र भी प्रकाशित किये, हिन्दी में &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अर्जुन&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; तथा उर्दू में &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;तेज&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;। [[जलियांवाला काण्ड]] के बाद [[अमृतसर]] में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] का ३४वां अधिवेशन( दिस्म्बर 1919 ) हुआ&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=https://www.inc.in/en/inc-sessions |title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशनों की सूची |access-date=2 अक्तूबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190401024358/https://www.inc.in/en/inc-sessions |archive-date=1 अप्रैल 2019 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt;। स्वामी श्रद्धानन्द ने स्वागत समिति के अध्यक्ष के रूप में अपना भाषण हिन्दी में दिया और [[हिन्दी]] को [[राष्ट्रभाषा]] घोषित किए जाने का मार्ग प्रशस्त किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== स्वतन्त्रता आन्दोलन ===&lt;br /&gt;
उन्होने स्वतन्त्रता आन्दोलन में बढ-चढकर भाग लिया। गरीबों और दीन-दुखियों के उद्धार के लिये काम किया। [[स्त्री-शिक्षा]] का प्रचार किया। सन् 1919 में स्वामी जी ने [[दिल्ली]] में जामा मस्जिद क्षेत्र में आयोजित एक विशाल सभा में भारत की स्वाधीनता के लिए प्रत्येक नागरिक को पांथिक मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== शुद्धि ===&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;{{मुख्य|शुद्धि आंदोलन}}&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
स्वामी श्रद्धानन्द ने जब कांग्रेस के कुछ प्रमुख नेताओं को &amp;quot;मुस्लिम तुष्टीकरण की घातक नीति&amp;quot; अपनाते देखा तो उन्हें लगा कि यह नीति आगे चलकर राष्ट्र के लिए विघटनकारी सिद्ध होगी। इसके बाद कांग्रेस से उनका मोहभंग हो गया। दूसरी ओर कट्टरपंथी मुस्लिम तथा ईसाई हिन्दुओं का मतान्तरण कराने में लगे हुए थे। स्वामी जी ने असंख्य व्यक्तियों को आर्य समाज के माध्यम से पुनः [[वैदिक धर्म]] में दीक्षित कराया। उनने गैर-हिन्दुओं को पुनः अपने मूल धर्म में लाने के लिये &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;[[शुद्धि]]&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; नामक आन्दोलन चलाया और बहुत से लोगों को पुनः [[हिन्दू]] धर्म में दीक्षित किया। स्वामी श्रद्धानन्द पक्के आर्यसमाजी थे, किन्तु सनातन धर्म के प्रति दृढ़ आस्थावान पंडित [[मदनमोहन मालवीय]] तथा [[जगन्नाथ पुरी|पुरी]] के शंकराचार्य स्वामी [[भारतीकृष्ण तीर्थ]] को गुरुकुल में आमंत्रित कर छात्रों के बीच उनका प्रवचन कराया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्वामी श्रद्धानन्द ने स्वेछा एवं सहमति के पश्चात पश्चिमी [[उत्तर प्रदेश]] के [[मलकान राजपूत|मलकान राजपूतों]] को शुद्धि कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दू धर्म में वापसी कराई। शासन की तरफ से कोई रोक नहीं लगाई गई थी जबकि ब्रिटिश काल था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== हत्या ===&lt;br /&gt;
23 दिसम्बर 1926 को नया बाजार स्थित उनके निवास स्थान पर अब्दुल रशीद नामक एक उन्मादी धर्म-चर्चा के बहाने उनके कक्ष में प्रवेश करके गोली मारकर इस महान विभूति की हत्या कर दी। उसे बाद में फांसी की सजा हुई। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनकी हत्या के दो दिन बाद अर्थात 25 दिसम्बर, 1926 को [[गुवाहाटी]] में आयोजित [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के अधिवेशन में जारी शोक प्रस्ताव में जो कुछ कहा वह स्तब्ध करने वाला था।  गांधी के शोक प्रस्ताव के उद्बोधन का एक उद्धरण इस प्रकार है “मैंने अब्दुल रशीद को भाई कहा और मैं इसे दोहराता हूँ। मैं यहाँ तक कि उसे स्वामी जी की हत्या का दोषी भी नहीं मानता हूँ। वास्तव में दोषी वे लोग हैं जिन्होंने एक दूसरे के विरुद्ध घृणा की भावना को पैदा किया। इसलिए यह अवसर दुख प्रकट करने या आँसू बहाने का नहीं है।“&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा,”… मैं इसलिए स्वामी जी की मृत्यु पर शोक नहीं मना सकता। हमें एक आदमी के अपराध के कारण पूरे समुदाय को अपराधी नहीं मानना चाहिए। मैं अब्दुल रशीद की ओर से वकालत करने की इच्छा रखता हूँ।“ उन्होंने आगे कहा कि “समाज सुधारक को तो ऐसी कीमत चुकानी ही पढ़ती है। स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या में कुछ भी अनुपयुक्त नहीं है। “अब्दुल रशीद के धार्मिक उन्माद को दोषी न मानते हुये गांधी ने कहा कि “…ये हम पढ़े, अध-पढ़े लोग हैं जिन्होंने अब्दुल रशीद को उन्मादी बनाया। स्वामी जी की हत्या के पश्चात हमें आशा है कि उनका खून हमारे दोष को धो सकेगा, हृदय को निर्मल करेगा और मानव परिवार के इन दो शक्तिशाली समूहों के विभाजन को मजबूत कर सकेगा।“ ([[यंग इण्डिया]], 1926)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[चित्र:Delhi Town Hall.jpg|center|thumb|400px|[[दिल्ली]] के टाउन हाल के सामने स्थापित स्वामी श्रद्धानन्द की प्रतिमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संदर्भ ग्रंथसूची==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Swami Shraddhanand 1970 stamp of India.jpg|right|thumb|250px|भारत सरकार ने स्वामी श्रद्धानन्द की स्मृति में सन १९७० में डाकटिकट जारी किया।]]&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;The Arya Samaj and Its Detractors: A Vindication&amp;#039;&amp;#039;, Rama Deva. Published by s.n, 1910.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Hindu Sangathan: Saviour of the Dying Race&amp;#039;&amp;#039;, Published by s.n., 1924.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Inside Congress&amp;#039;&amp;#039;, by Swami Shraddhanand, Compiled by Purushottama Rāmacandra Lele. Published by Phoenix Publications, 1946.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Kalyan Marg Ke Pathik&amp;#039;&amp;#039; (Autobiography:Hindi), New Delhi. n.d.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Autobiography&amp;#039;&amp;#039; (English Translation), Edited by M. R. Jambunathan. Published by Bharatiya Vidya Bhavan, 1961&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पठनीय==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Swami Shraddhanand&amp;#039;&amp;#039;, by Satyadev Vidyalankar, ed. by Indra Vidyavachaspati. Delhi, 1933.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Swami Shraddhanand (Lala Munshi Ram)&amp;#039;&amp;#039;, by Aryapathik Lekh Ram. Jallandhar. 2020 Vik.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Swami Shraddhanand&amp;#039;&amp;#039;, by K.N. Kapur. Arya Pratinidhi Sabha, Jallandhar, 1978.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Swami Shraddhanand: His Life and Causes&amp;#039;&amp;#039;, by J. T. F. Jordens. Published by Oxford University Press, 1981.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Section Two:Swami Shraddhanand&amp;#039;&amp;#039; . &amp;#039;&amp;#039;Modern Indian Political Thought&amp;#039;&amp;#039;, by Vishwanath Prasad Varma. Published by Lakshmi Narain Agarwal, 1961. Page 447.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Chapt XI: Swami Shraddhanand&amp;#039;&amp;#039;. &amp;#039;&amp;#039;Advanced Study in the History of Modern India : 1920–1947&amp;#039;&amp;#039;. by G. S. Chhabra. Published by Sterling Publishers, 1971. Page 211&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Pen-portraits and Tributes by Gandhiji&amp;#039;&amp;#039;: &amp;#039;(Sketches of eminent men and women by Mahatma Gandhi)&amp;#039;, by Gandhi, U. S. Mohan Rao. Published by National Book Trust, India, 1969. Page 133&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Swami Shraddhanand – Indian freedom fighters: struggle for independence&amp;#039;&amp;#039;. Anmol Publishers, 1996. {{ISBN|81-7488-268-5}}.&lt;br /&gt;
* &amp;#039;&amp;#039;Telegram to Swami Shraddhanand&amp;#039;&amp;#039;, (2 October 1919) – &amp;#039;&amp;#039;Collected Works&amp;#039;&amp;#039;, by Gandhi. Published by Publications Division, Ministry of Information and Broadcasting, Govt. of India, 1958. v.16. Page 203.&lt;br /&gt;
* An article on Swami Shraddhanand in &amp;quot;The Legacy of The Punjab&amp;quot; by R M Chopra, 1997, Punjabee Bradree, Calcutta,&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय]]&lt;br /&gt;
* [[आर्य समाज]]&lt;br /&gt;
* [[स्वामी दयानंद सरस्वती]]&lt;br /&gt;
* [[सत्यार्थ प्रकाश]]&lt;br /&gt;
* [[इन्द्र विद्यावाचस्पति]] - हिन्दी के महान पत्रकार एवं साहित्यकार तथा स्वामी श्रद्धानन्द के सुपुत्र&lt;br /&gt;
* [[स्वामी सोमदेव]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20121225113148/http://www.pravakta.com/swami-shraddhananda श्रद्धा से सुने सत्संग ने ही बनाया मुंशी राम को श्रद्धानन्द]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20071016234459/http://aryasamajjamnagar.org/homepage.htm आर्य समाज, जामनगर]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20150205110326/http://www.gyanvaak.com/researchpapers/rpview?arg=106 स्वामी श्रद्धानन्द और गुरुकुल को जन्म देने वाली परिस्थितियाँ]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:आर्य समाज]]&lt;br /&gt;
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[[श्रेणी:हिन्दू आध्यात्मिक नेता]]&lt;br /&gt;
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[[श्रेणी:जालंधर के लोग]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;रोहित साव27</name></author>
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