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	<title>2006 लेबनान युद्ध - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;संजीव कुमार: 2409:4063:6D13:707:0:0:740B:9200 (Talk) के संपादनों को हटाकर रोहित साव27 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/2409:4063:6D13:707:0:0:740B:9200&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/2409:4063:6D13:707:0:0:740B:9200&quot;&gt;2409:4063:6D13:707:0:0:740B:9200&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:2409:4063:6D13:707:0:0:740B:9200&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:2409:4063:6D13:707:0:0:740B:9200 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B527&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:रोहित साव27 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;रोहित साव27&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्त्रोतहीन}}&lt;br /&gt;
[[File:Tyre air strike.jpg|thumb|इजराइल द्वारा लेबनान पर बम गिराना]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;इजराइल-लेबनान युद्ध 2006&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;; &amp;#039;&amp;#039;Israel Lebanon War 2006&amp;#039;&amp;#039;: यह युद्ध [[इज़राइल|इजराइल]] व [[लेबनान]] के मध्य लडा गया था। युद्ध के तुरंत बाद दोनों देशों ने अपने आप को विजय बताया था परंतु बाद में इजराइली पक्ष ने हार स्वीकार कर ली थी। &lt;br /&gt;
इस युद्ध में  इजराइल को [[हिज़बुल्लाह|हिजबुल्लाह]] ने अपनी सैन्य क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए इजराइल को पहली बार हार का स्वाद चखाया था। इसके बाद से ही इजराइल हिजबुल्लाह को ईरान के बाद  अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। जबकि हिजबुल्लाह  आज मध्य पूर्व की सबसे मजबूत और प्रशिक्षित सेनाओं में से एक है। इस युद्ध के बाद हसन नसरूल्लाह मध्य पूर्व के हीरो बन गए थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सैनिक अपहरण==&lt;br /&gt;
2004 में हुए सैनिकों की अदला-बदली में अपने दो साथियों को न छोड़ें जाने के बाद &lt;br /&gt;
2006 में हिजबुल्लाह ने 2 इजराइली सैनिकों को उठा लिया और उससे बदले में अपने 3 साथियों को रिहा करने की मांग की। इस मांग को इजराइल ने अपनी बेइज्जती माना।  जिसके बाद इजराइल ने लेबनान में हवाई हमले किए और लेबनान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और रिहायशी और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले किए। इजराइली हवाई हमलों में बहुत से लेबनानी नागरिक मारे गए।  इसके बाद हिजबुल्लाह ने इजराइली सैनिकों,  इलाकों को अपनी मिसाइलों से निशाना बनाया जिन्हें इजराइली डिफेंस सिस्टम डिटेक्ट करने में असमर्थ था।  इस युद्ध के दौरान इजराइल अरबो डॉलर खर्च करने के बाद भी कोई सफलता हासिल नहीं कर सका। दुनिया की सबसे मजबूत टैंक कही जाने वाली टैंक को को हिजबुल्लाह ने नष्ट कर दिया। और 3 हेलिकॉप्टरों 20 टैंको व 1 लडाकू पोत को नष्ट कर दिया। हिजबुल्लाह के पास कोई विमान इत्यादि न होने के कारण उसे इस प्रकार के किसी इक्विपमेंट का लोस नहीं हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==हानि==&lt;br /&gt;
युद्ध के शुरू में इजराइल ने लेबनान में से हिजबुल्लाह को खत्म करने के लिए 1  या 2 दिन का वक्त मांगा था। परंतु 33 दिवसीय युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा था। इस दौरान लगभग 200 से 250  इजराइली सैनिक,20टैंक, 3 हैलीकॉप्टर, 1 पोत, लगभग  50 इजराइली नागरिक व 150 से 200 हिजबुल्लाह लड़ाके, लगभग  800 - 900 लेबनानी नागरिक मारे गए। &lt;br /&gt;
इस युद्ध के बाद हिजबुल्लाह नई मध्य पूर्वी ताकत के रूप में प्रसिद्ध हुआ। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस युद्ध में ये बात सिद्ध हुई के युद्ध को हथियारों के बल पर नहीं बल्कि रणनीति के के बल पर ही जीता जा सकता है।इस्राइल पर इस युद्ध के दौरान हिजबुल्लाह ने तकरीबन तीन हजार मिसाइलें दागी थी। जिसके कारण इजराइल को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था। जबकि हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करने में भी उसे अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था। इस युद्ध में हिजबुल्लाह के द्वारा हाइफा सिटी  व सबसे मजबूत कही जाने वाली टैंकों को मिसाइलों से निशाना बनाने  के कारण हिजबुल्लाह ने काफी सुर्खियां बटोरी और दुनिया को चकित किया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==योद्धा==&lt;br /&gt;
====इजराइली योद्धा====&lt;br /&gt;
इहुद ओल्मर्ट (प्रधानमंत्री) &lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt;आमर पेरेंट्स &lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt;डेन होलुटज&lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt;मोशे कपलनसकाई&lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt;उदी एडम&lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt;इलीजर शकेडि &amp;lt;br&amp;gt;&lt;br /&gt;
अमेरिका व युरोपीय देश&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====लेबनानी योद्धा====&lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt; हसन नसरूल्लाह (जनरल हिजबुल्लाह) &amp;lt;br&amp;gt;&lt;br /&gt;
ईमाद मुघाई &amp;lt;br&amp;gt;नबी बहरि&lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt;खालिद हदादी &lt;br /&gt;
&amp;lt;br&amp;gt;अहमद जिबरिल &amp;lt;br&amp;gt;ईरान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==देशों का समर्थन==&lt;br /&gt;
अमेरिका व अधिकाशं युरोपीय देश इजराइल के साथ थे। &lt;br /&gt;
ईरान अपने घटक हिजबुल्लाह के समर्थन में था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
इस युद्ध में हिजबुल्लाह के कम सैनिको के होने के बावजूद मिली जीत के बाद यह युद्ध इस बात को फिर से सिद्ध करता है कि केवल अधिक सैनिकों व हथियारों से युद्ध नहीं जीता जाता है बल्कि युद्ध जीतने के लिए एक अच्छी रणनीति व सैन्य कुशलता की आवश्यकता होती है। इस कारण यह युद्ध हमेशा याद रखा जाएगा। इस युद्ध के बाद ईरान की सैन्य कुशलता का दुनिया को पता लग गया। जो हिजबुल्लाह की मदद कर रहा था जबकि अमेरिका और यूरोप के देशों ने इजराइल की मदद की थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:युद्ध]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:लेबनान]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;संजीव कुमार</name></author>
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