"अग्निमित्र": अवतरणों में अंतर
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'''अग्निमित्र''' (149-141 ईपू) [[शुंग राजवंश|शुंग वंश]] के राजा थे। [[कालिदास]] ने इसको अपने नाटक का पात्र बनाया है, जिससे प्रतीत होता है कि कालिदास का काल इसके ही काल के समीप रहा होगा।<ref>{{Cite book|author = राधेश्याम चौरसिया|isbn = 9788126900275|language = अंग्रेज़ी|page = १३१|publisher = अटलांटिक पब्लिशर्स|title = History of Ancient India: Earliest Times to 1000 A. D|trans-title= प्राचीन भारत का इतिहास: प्राचीन काल से १००० ई॰ तक|url = http://books.google.be/books?id=cWmsQQ2smXIC}}</ref> | '''अग्निमित्र''' (149-141 ईपू) [[शुंग राजवंश|शुंग वंश]] के राजा थे। [[कालिदास]] ने इसको अपने नाटक का पात्र बनाया है, जिससे प्रतीत होता है कि कालिदास का काल इसके ही काल के समीप रहा होगा। उसकी माँ देवमला एक आदर्श नारी थी<ref>{{Cite book|author = राधेश्याम चौरसिया|isbn = 9788126900275|language = अंग्रेज़ी|page = १३१|publisher = अटलांटिक पब्लिशर्स|title = History of Ancient India: Earliest Times to 1000 A. D|trans-title= प्राचीन भारत का इतिहास: प्राचीन काल से १००० ई॰ तक|url = http://books.google.be/books?id=cWmsQQ2smXIC}}</ref> | ||
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१५:४७, ६ फ़रवरी २०२३ के समय का अवतरण
अग्निमित्र (149-141 ईपू) शुंग वंश के राजा थे। कालिदास ने इसको अपने नाटक का पात्र बनाया है, जिससे प्रतीत होता है कि कालिदास का काल इसके ही काल के समीप रहा होगा। उसकी माँ देवमला एक आदर्श नारी थी[१]
सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
- ↑ History of Ancient India: Earliest Times to 1000 A. D. अटलांटिक पब्लिशर्स.पृ. १३१.ISBN 9788126900275.