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- ...उसके [[स्वभाव]] में निहित है और उसके समस्त कार्यकलाप को निर्धारित करता है। सिद्धांत के रूप में सुखवाद की उत्पत्ति प्राचीन काल में ही हो गयी थी। [[यूनान]] में स ...२ KB (११ शब्द) - १५:२९, १६ दिसम्बर २०२०
- ...ही सुव्यवस्था स्थापित कर सकती है। मनुष्य पर अनुशासन का आरोपण ही सामाजिक और नैतिक बुराइयों का जनक है। इसलिए हिंसा पर आश्रित राज्य तथा उसकी अन्य संस्थाएँ इन ब ...२ KB (१३ शब्द) - ००:३२, २ फ़रवरी २०२१
- ...रीत यंत्रवाद का सिद्धांत है। इसके अनुसार संसार की प्रत्येक घटना कार्य-कारण-सिद्धांत से घटती है। हर कार्य के पूर्व एक कारण होता है। वह कारण ही कार्य के होने का ...यंत्रवाद के अनुसार, कार्य-कारण-नियम से ही हर व्यवहार करते हैं। साध्यवाद के सिद्धांतानुसार संसार में सर्वत्र एक सप्रयोजन व्यवस्था है। विश्व की प्रत्येक घटना किस ...१२ KB (९ शब्द) - ००:१६, ६ जून २०२१
- ...में व्याप्त है तथा उसका संचालन और नियंत्रण करता है। यह जगत् की भौतिक तथा नैतिक व्यवस्था का आधार है। देवता तथा मनुष्य सभी इसका पालन करते हैं। वरुण ऋत के अध == कर्मवाद और नैतिक व्यवस्था == ...१३ KB (४ शब्द) - १८:४५, २९ फ़रवरी २०२०
- ...यह है कि ब्रह्म और ब्रह्मांड एक ही वस्तु है। नवीन काल में [[स्पीनोजा]] इस सिद्धांत का सबसे बड़ा समर्थक समझा जाता है। उसके विचारानुसार यथार्थ सत्ता एकमात्र द्र ...को वास्तविक कर्मक्षेत्र के रूप में देखते हैं, इसे छायामात्र नहीं समझ सकते। नैतिक भाव समस्या को और भी जटिल बना देता है। यदि मनुष्य स्वाधीन सत्ता ही नहीं तो उ ...६ KB (१६३ शब्द) - १३:३९, २२ मई २०२१
- ...एक आचार सिद्धांत है जिसकी एकांतिक मान्यता है कि आचरण (action) एकमात्र तभी नैतिक है जब वह अधिकतम व्यक्तियों के अधिकतम सुख की अभिवृद्धि करता है। राजनीतिक तथा ...ंबंध में प्राय: कुछ अस्पष्ट ओछी धारणाएँ हैं। इसके आलोचकों का कहना है कि यह सिद्धांत, सुंदरता, शालीनता एवं विशिष्टता की उपेक्षा कर केवल उपयोगिता को महत्व देता ह ...११ KB (२४५ शब्द) - ०८:२२, १६ जून २०२०
- ...ब स्थिर मत अपनाने का समय आ गया है। धर्म, विज्ञान, दर्शन, नीति, राजनीति सभी सिद्धांत की अपेक्षा करते हैं। ...ंभावना दिखाई नहीं देती। दर्शन का काम समस्त अनुभव को गठित करना है; दार्शनिक सिद्धांत समग्र का समाधान है। अनुभव से परे, इसका आधार कोई सत्ता है या नहीं? यदि है, त ...८ KB (२५ शब्द) - १०:४३, २६ मार्च २०२१
- '''नैतिक शिक्षा''' वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोग दूसरों में नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। यह कार्य घर, विद्यालय, मन्दिर, जेल, मंच या किसी ...रण करने से सबकी रक्षा हो सके । अतः हम कह सकते हैं कि नैतिकता वह गुन है, और नैतिक शिक्षा वह शिक्षा है, जो कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति सम्पूर्ण समाज तथा देश क ...२४ KB (५२ शब्द) - ०२:५२, १५ मई २०२१
- ...उसके प्रति [[आस्था]] और विश्वास पैदा करने का प्रयत्न करते हैं।<ref>राजनीति सिद्धांत की रूपरेखा, ओम प्रकाश गाबा, मयूर पेपरबैक्स, २०१०, पृष्ठ-२५, ISBN:८१-७१९८-०९ ...११ KB (९७ शब्द) - ०९:३६, ३ नवम्बर २०२०
- ...विधि के बारे में एक विशेष तरह की खोजबीन है। साधारण अर्थ में समस्त वैधानिक सिद्धांत विधिशास्त्र में अंतर्निहित हैं। विधिशास्त्र "जूरिसप्रूडेंस" अर्थात् ''Juris * विधिनिर्माण के सिद्धांत (Principles of Legislation) ...३२ KB (३४७ शब्द) - २१:१७, १९ जून २०२१
- ...् एक विशेष प्रकार के राजनीतिक संगठन, सामाजिक संगठन, आर्थिक व्यवस्था तथा एक नैतिक एवं मानसिक भावना का नाम भी है। लोकतंत्र जीवन का समग्र दर्शन है जिसकी व्यापक ...ानता और भ्रातृत्व के सिद्धांत को शक्ति दी। औद्योगिक क्रांति ने लोकतंत्र के सिद्धांत को आर्थिक क्षेत्र में प्रयुक्त करने की प्रेरणा दी। ...१७ KB (१४ शब्द) - १२:२१, ८ मार्च २०२०
- '''सामीप्य सिद्धांत''', साइप्रेस डॉक्ट्रिन (Cypress doctrine) का हिन्दी रूपान्तरण है। साइप्रेस किंतु सामीप्य सिद्धांत के लागू होने के लिए दान का लक्ष्य निर्विवाद होना आवश्यक है। धन की कोई राशि ...१२ KB (२२ शब्द) - ०३:३७, १८ जुलाई २०२१
- ...ही सुव्यवस्था स्थापित कर सकती है। मनुष्य पर अनुशासन का आरोपण ही सामाजिक और नैतिक बुराइयों का जनक है। इसलिए हिंसा पर आश्रित राज्य तथा उसकी अन्य संस्थाएँ इन ब सुव्यवस्थित रूप में अराजकतावाद के सिद्धांत को सर्वप्रथम प्रतिपादित करने का श्रेय स्तोइक विचारधारा के प्रवर्त्तक [[ज़ेन ...१९ KB (२०९ शब्द) - १०:१३, २१ जुलाई २०२१
- [[डार्विनवाद|डार्विन के सिद्धांत]] से बहुत प्रभावित होकर आपने "सामान्य आकारिक" पर महत्वपूर्ण ग्रंथ सन् 1866 ...प्रचार किया। हेकेल के अद्वैतवाद में प्रकृति का कोई उद्देश्य या अभिकल्पना, नैतिक व्यवस्था, मानवीय स्वतंत्रता अथवा वैयक्तिक ईश्वर को कोई स्थान नहीं है। हेकेल ...७ KB (२७३ शब्द) - ०९:०७, १६ जून २०२०
- ...ायी प्रक्रियाओं के ज़रिये की जाती है। अंत में कानून में अपने अनुपालन की एक नैतिक बाध्यता निहित है जिसके तहत वे लोग भी कानून का पालन करने के लिए मजबूर होते ह ...का मतलब है जीवन, स्वतंत्रता और सम्पत्ति की रक्षा के लिए कानून। उदारतावादी सिद्धांत स्पष्ट करता है कि कानून के बनाने और लागू करने के तरीके कौन-कौन से होने चाहि ...२५ KB (१५१ शब्द) - १०:४७, २५ दिसम्बर २०२०
- ...ा होती है। पूँजीवाद की कभी कोई निश्चित परिभाषा स्थिर नहीं हुई; देश, काल और नैतिक मूल्यों के अनुसार इसके भिन्न-भिन्न रूप बनते रहे हैं। ...विकसित करना आरम्भ किया जो कार्ल मार्क्स के [[पूँजी|पूंजी]] और [[ब्याज]] के सिद्धांत से हटकर था। बीसवीं सदी के आरंभ में [[मैक्स वेबर]] ने इस अवधारणा को एक सकारा ...१३ KB (१३ शब्द) - २१:३४, २९ जुलाई २०२१
- ...। [[धर्म]], [[विज्ञान]], [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]], [[नीति]], [[राजनीति]] सभी सिद्धांत की अपेक्षा करते हैं। ...ंभावना दिखाई नहीं देती। दर्शन का काम समस्त अनुभव को गठित करना है; दार्शनिक सिद्धांत समग्र का समाधान है। अनुभव से परे, इसका आधार कोई सत्ता है या नहीं? यदि है, त ...११ KB (३२४ शब्द) - १८:३९, ७ मार्च २०२०
- ...नैतिक नियमों के आधार पर होता है। अंतकरण व्यक्ति की आत्मा का वह क्रियात्मक सिद्धांत माना जा सकता है जिसकी सहायता से व्यक्ति द्वंद्वों की उपस्थिति में किसी निर् ...६ KB (१२० शब्द) - १०:५७, १९ मई २०२१
- ...पना नियमन करने में समर्थ थी। इसका तात्पर्य यह नहीं कि व्यावहारिक बुद्धि के सिद्धांत से कांट हाब्ज़ (1588-1679) के व्यक्तिवाद का समर्थन करना चाहता था। उसने व्या ...है। इनका सैद्धांतिक मूल्य भले ही कुछ न हो, किंतु नैतिक मूल्य बहुत बड़ा है। नैतिक चिंतन में बुद्धि का कार्य आचरण की समस्या पर विचार करना है। इसीलिए कांट ने इ ...२६ KB (९ शब्द) - १२:३१, ७ मार्च २०२१
- ...िर्णय कर दिया जाता है तब उसे निर्णयात्मक आलोचना कहते हैं। इसे एक प्रकार की नैतिक आलोचना भी माना जाता है। इसका मुख्य स्वभाव न्यायाधीश की तरह साहित्यक कृतियों * [[समालोचनात्मक सिद्धांत]] ...१३ KB (१७७ शब्द) - ०१:०५, २९ जून २०२१