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- '''वर्ष फल''' पद्धति अपने आप में एक महत्वपूर्ण पद्धति है। वर्ष फल के द्वारा हम एक वर्ष में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगा सकते हैं। वर्ष फल कुण्डली में ग्रहों की आपसी दृष्टियाँ पराशरी दृष्टि से भिन्न होती हैं। यहाँ ...७ KB (१६ शब्द) - २१:०६, १५ जून २०२०
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- ...तानी इलाकों में बहुतायत से पाई जाती है इस पर लगे छोटे छोटे बेरों के आकर के फल को ही केर कहते हैं। इसे टिंट भी कहते हैं। <ref>{{Cite web |url=http://marwa [[श्रेणी:फल सब्ज़ियाँ]] ...९५१ बाइट (२८ शब्द) - ११:३८, १६ जून २०२०
- ...घटनाएँ और लोग मूलत: अच्छे होते हैं इस कारण अधिकांश परिस्थितियों में उत्तम फल ही प्राप्त होता है। ...१ KB (३५ शब्द) - ०७:२९, १६ जून २०२०
- ...0 का 4 से भाग करना होगा। जिसके परिणाम स्वरूप हर व्यक्ति को 5 फल देकर हम 20 फलों को सभी चार लोगों में बराबर बाँट सकते हैं।<ref>{{पुस्तक सन्दर्भ|last1=श्रम ...२ KB (२९ शब्द) - २१:०६, ३ फ़रवरी २०१८
- ...तर्दशा में अपने पूरे फल देता है। इसके विपरीत षडबल में कमजोर ग्रह अपने पूरे फल देने में असमर्थ होता है। 1. षडबल के आधार पर घटनाओं का फलित करने से भविष्यवाणियों में सटिकता और दृढता आती है। तथा इससे त्रुटि होने कि ...४ KB (११ शब्द) - १३:३१, २४ मार्च २०१७
- इसमें विशेष रूप से अच्छे फूल, फल उत्पादन, या अन्य वांछनीय लक्षण के पौधों के क्लोन का उत्पादन किया जाता है। बीज रहित फल , बिना बीज के उत्तम गुणवत्ता वाले फल, बीज के उत्पादन के लिए आवश्यक परागण के अभाव में पौधों के गुणकों का उत्पादन ...३ KB (५६ शब्द) - २१:४९, ३० दिसम्बर २०२०
- ...ग्रह जन्म कुण्डली में नीच का हो एवं नवांश कुण्डली में उच्च को हो तो वह शुभ फल प्रदान करता है जो नवांश कुण्डली के महत्त्व को प्रदर्शित करता है। नवांश कुण् ...२ KB (२ शब्द) - ०८:२०, २८ जनवरी २०१७
- === गोचर से फल ज्ञात करना === ...ेना चाहिए. इसके पश्चात ग्रहों की दृष्टि एवं युति के आधार पर उस दिन का गोचर फल ज्ञात किया जा सकता है। ...७ KB (४७ शब्द) - ११:३५, ६ अप्रैल २०२१
- ...और प्रभावो से बचाव का मार्ग भी देता है लेकिन पाश्चात्य ज्योतिष सिर्फ दृष्ट फलों की बात करता है। दोनों समान रूप से अवैज्ञानिक है। ...ोंकि पाश्चात्य ज्योतिष में अदृष्ट फलों की परिकल्पना ही नहीं है। यहां दृष्ट फल का आंकलन सर्वेक्षण पद्धति के आधार पर होता है। ...८ KB (३२ शब्द) - १४:३६, १५ जून २०२०
- '''वर्ष फल''' पद्धति अपने आप में एक महत्वपूर्ण पद्धति है। वर्ष फल के द्वारा हम एक वर्ष में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगा सकते हैं। वर्ष फल कुण्डली में ग्रहों की आपसी दृष्टियाँ पराशरी दृष्टि से भिन्न होती हैं। यहाँ ...७ KB (१६ शब्द) - २१:०६, १५ जून २०२०
- [[चित्र:Artocarpus heterophyllus fruits at tree.jpg|right|thumb|300px|तने पर फला कटहल]] ...न]] का एक शब्द है। उन पेड़ों को स्तम्भपुष्पी कहते हैं जिनके [[पुष्प]] और [[फल]] उनके मुख्य तने या अन्य मोटी शाखाओं पर लगते हैं, न कि नये पल्लवों पर। [[गू ...१,०२० बाइट (२० शब्द) - ०९:१५, १८ जुलाई २०१६
- ...रे पर कई लम्बी वृन्त तथा किनारे से कटी फलकवाली पत्तियाँ लगी होती हैं। इसका फल काष्ठीय गुठलीवाला होता है। ताड़ के वृक्ष 30 मीट तक हो सकते हैं। ...है जो इसकी विशिष्टता को दिखाता है । इस वृक्ष के हरेेक भाग(तना, पत्ता, जड़,फल, बिज,रस)का उपयोग अलग-अलग तरह से किया जा सकता है । ...३ KB (९३ शब्द) - २२:५६, २ जुलाई २०२१
- ...द आदि 28 योगों में 21वाँ योग अमृतयोग है। यह योग अपने नाम के अनुसार अमृतत्व फल देने वाला है अत: इस योग में यात्रा आदि शुभ कार्य श्रेष्ठ माने जाते हैं। ...१ KB (२ शब्द) - १३:२१, २ मार्च २०२०
- के ऊपर खोल पाया जाता है तथा वे फल मे बंद होते है ...१ KB (४३ शब्द) - १७:३८, १७ जुलाई २०२१
- [[कर्म]] और उसके फल का अनिवार्य संबंध है। व्यक्ति अच्छे और बुरे जो भी कर्म करता है उसके अनुरूप ...करती है। इस प्रकार यज्ञ का फल मनुष्य को अवश्य प्राप्त होता है। इस कर्म और फल के संबंध की सार्वभौम नियम के रूप में अभिव्यक्ति सर्वप्रथम [[ऋग्वेद]] के ऋत ...१३ KB (४ शब्द) - १८:४५, २९ फ़रवरी २०२०
- ...विधिपूर्वक भगवान पद्मनाभ की पूजा करनी चाहिए। यह एकादशी मनुष्य को मनवांछित फल देकर स्वर्ग को प्राप्त कराने वाली है। ...हीं जाते। विष्णु के नाम के कीर्तन मात्र से संसार के सब तीर्थों के पुण्य का फल मिल जाता है। जो मनुष्य शार्ंग धनुषधारी भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं, उ ...८ KB (१८ शब्द) - २२:१०, २७ अगस्त २०२०
- ...धिक होती है तथा [[कैल्सियम]] की मात्रा गाय के दूध से भी अधिक होती है। इसके फल का रस [[मलावी|मालावी]] के लोग बड़े चाव से पीते हैं। इसके पत्तों की सब्जी तो ...५ KB (१४२ शब्द) - २०:५७, १४ अक्टूबर २०२०
- ...ाथ नाम-संकीर्तन करते हुए जगना चाहिए। एकादशी का रात्रि में जागरण करने से जो फल प्राप्त होता है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं मिलता। ...ारायण की पूजा एवं आरती करें. संध्या काल में अगर चाहें तो दीप दान के पश्चात फलाहार कर सकते हैं। द्वादशी के दिन भगवान की पूजा के पश्चात कर्मकाण्डी ब्राह्मण ...९ KB (१२१ शब्द) - १५:१६, ८ जुलाई २०२१
- ...ें पूजा अधूरी मानी गयी है। मान्यता है कि संकल्प के बिना की गई पूजा का सारा फल [[इन्द्र]] देव को मिल जाता है। इसलिए पहले संकल्प लेना चाहिए, फिर पूजन करना ...मनया धन-धान्य-बल-पुष्टि-कीर्ति-यश लाभार्थं, श्रुति स्मृति पुराणतन्त्रोक्त फल प्राप्तयर्थं, सकल मनोरथ सिध्यर्थं ....श्री लक्ष्मी नारायण ........... ८ कर ...९ KB (८२ शब्द) - ००:५७, २१ अगस्त २०२१
- ...र परिस्थिति के अनुरूप सही मिले, पर भारतीय परिस्थितियों मे यह पूरी तरह से [[फलादेश]] करने पर सही उतरता है। इस ग्रंथ में हर [[वैदिक धर्म|वैदिक]] ग्रंथ की त ...्च नीचादि ज्ञान, राशियों की ह्रस्व, दीर्घ, मध्योदय संज्ञा, ह्रस्वोदयादि का फल, राशियों का प्लव व प्रयोजन, राशियोम के वर्ण तथा प्रयोजन. ...३६ KB (५८ शब्द) - ००:३१, १६ जून २०२०
- ...आश्रय को कर्म कहते हैं। "राम घर जाता है' इस उदाहरण में "घर" गमन क्रिया के फल का आश्रय होने के नाते "जाना क्रिया' का कर्म है। लेकिन [[दर्शन]] की दृष्टि स ...र भी यह आवश्यक नहीं कि क्रिया की जाए। अत: कर्म की परिधि में वे क्रियाएँ और फल आते हैं जो स्वाभाविक क्रियाओं से भिन्न हैं। ...१८ KB (४२ शब्द) - ११:२१, २४ अप्रैल २०२१