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- ...री हुई शाखाओं वाले गुलमोहर पर पहला फूल निकलने के एक सप्ताह के भीतर ही पूरा वृक्ष गाढ़े लाल रंग के अंगारों जैसे फूलों से भर जाता है। ये फूल लाल के अलावा नारं ...ली हुई शाखाओं वाले गुलमोहर पर पहला फूल निकलने के एक सप्ताह के भीतर ही पूरा वृक्ष गाढ़े लाल रंग के अंगारों जैसे फूलों से भर जाता है। वसंत से गर्मी तक यानी मा ...९ KB (१५५ शब्द) - १५:४८, ३० अगस्त २०२०
- ...ली पत्ती वाले कोणधारी वन पाए जाते हैं जिन्हे टैगा कहते हैं। यहाँ के प्रमुख वृक्ष [[चीड़]], [[स्प्रूस]], [[सिलवर]], [[फर]], [[बर्च]], [[बलूत]] आदि हैं। इन वन ...ूस, सीडार और [[हेमलाक]] हैं। इस प्रकार यूरोप में पतझड़ एवं नुकीली पत्ती के वृक्षों के मिश्रित वन पाए जाते हैं। ...२५ KB (१९१ शब्द) - ००:५४, २६ अगस्त २०२१
- ...यहाँ उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में [[बोधिवृक्ष]] के नीचे उन्हें [[बुद्धत्व]] ज्ञान की प्राप्ति हुई। तभी से यह दिन बुद्ध पू ...]] की भी पूजा की जाती है। उसकी शाखाओं को हार व रंगीन पताकाओं से सजाते हैं। वृक्ष के आसपास दीपक जलाकर इसकी जड़ों में दूध व सुगंधित पानी डाला जाता है।। इस पूर ...१६ KB (४१२ शब्द) - १३:३५, १६ जून २०२१
- ...टी में आने के प्रथम सप्ताह में ही बीज उगना आरंभ कर देता है। कुछ बाँसों में वृक्ष पर दो छोटे छोटे अंकुर निकलते हैं। 10 से 12 वर्षों के बाद काम लायक बाँस तैया ...की घोषणा की (नवम्बर २०१७) जिसके गैर वन क्षेत्रों में उगाए गए बांस की को [[वृक्ष]] की परिभाषा के दायरे में लाए जाने से छूट मिले और इस प्रकार इसके आर्थिक उपय ...३८ KB (२७८ शब्द) - २१:४५, ६ जुलाई २०२१
- ...ें प्रकृति सुखी और दुःख में दुखी दिखाई देती है। कृष्ण के वियोग में ब्रज के वृक्ष भी रोते हैं- जहाँ हरिऔध जी ने वृक्षों आदि को गिनाने का प्रयत्न किया है, वहाँ उनका प्रकृति-वर्णन कुछ नीरस क्षौर ...२१ KB (१९७ शब्द) - १६:४१, १७ अगस्त २०२१
- ...गीचों में, विद्याधर का बाग बहुत ही अच्छे ढ़ग से संरक्षित बाग है, इसमें घने वृक्ष, बहता पानी व खुले मंडप हैं। इसे शहर के नियोजक विद्याधर ने निर्मित किया था। ...ोमीटर) - मीणा कबीले के इस आवास में एक दुर्गम किला, एक जैन मंदिर और हरे भरे वृक्षों के बीच एक बावड़ी है। ...६७ KB (९६१ शब्द) - १९:१९, १८ अगस्त २०२१
- ...ा है वहाँ के निर्जन बीहड़ों में चले गये। वहाँ उन दिनों केवल [[बबूल]] के ही वृक्ष हुआ करते थे; और ऊसर जमीन में आदमी तो कहीं दूर-दूर तक दिखता ही नहीं था। ...२०७ KB (४,८९८ शब्द) - १०:२४, २२ अगस्त २०२१