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  • '''शंकर पुण्तांबेकर''' एक हिन्दी साहित्यकार का नाम है। उनके उल्लेखनीय कार्यों में ''जहाँ देवता मरते हैं'' शामिल है। इसे शंकर पुणतांबेकर अपने समय के लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार रहे हैं। मराठी और हिन्दी, दोनों भाषाओं के साहित्य पर उनकी पकड़ गहरी रही है। ...
    २ KB (४७ शब्द) - १८:०३, १३ नवम्बर २०२०
  • ''' दत्तो वामन पोतदार ''' (5 अगस्त 1890 – 6 अक्टूबर 1979)) साहित्यकार-समाजसेवी थे। [[हिन्दी|हिंदी]] को [[महाराष्ट्र]] की दूसरी सबसे बड़ी भाषा बना [[श्रेणी:साहित्यकार]] ...
    ३ KB (९ शब्द) - ०७:०५, ५ जून २०२०
  • [[श्रेणी: आदिवासी साहित्यकार]] [[श्रेणी:भारतीय महिला साहित्यकार]] ...
    ५ KB (२९९ शब्द) - १९:३५, २५ अगस्त २०२१
  • गुणाकर मुले को [[हिन्दी अकादमी]] का साहित्यकार सम्मान, [[केन्द्रीय हिन्दी संस्थान]] का [[आत्माराम पुरस्कार]], [[बिहार]] का ...
    ९ KB (२२२ शब्द) - २०:१८, २९ जून २०२१
  • | कार्यक्षेत्र = साहित्यकार ...की तर्कपूर्ण व्याख्या उनकी लेखन-शैली के विशेष गुण हैं। मूलरूप से विचारक और साहित्यकार होने के कारण उनकी अभिव्यक्ति की अपनी शैली थी, जिसे वह हिंदी-गुजराती, [[मराठ ...
    १९ KB (२४६ शब्द) - २०:००, २५ जुलाई २०२१
  • ...ं 1947 में रांची से प्रकाशित ‘आदिवासी’ पत्रिका में छपी। सुप्रसिद्ध आदिवासी साहित्यकार [[वंदना टेटे]] ने आपकी कहानियों को ढूंढ निकाला जिसे 2015 में ‘एलिस एक्का की ...ी जिसमें आदिवासियों की रचनाएं छपा करती थीं। अथक श्रम और शोध के बाद आदिवासी साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी [[वंदना टेटे]] ने उनकी अनेक कहानियां और दूसरी रचनाएं खोज न ...
    १९ KB (२८७ शब्द) - ११:४८, २० अगस्त २०२१
  • [[श्रेणी:दलित साहित्यकार]] ...
    १० KB (२५६ शब्द) - १९:५७, २३ जून २०२१
  • ...के साथ सम्मान प्रतीक, शॉल आदि प्रदान किया जाता है। अब तक यह पुरस्कार निम्न साहित्यकारों की पुरस्तकों पर प्रदान किया गया है- [[श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत राजस्थानी भाषा के साहित्यकार]] ...
    १० KB (५७ शब्द) - १८:५२, ६ नवम्बर २०२०
  • | occupation = हिन्दी साहित्यकार, आलोचक तथा नाटककार '''डॉ॰ प्रभाकर श्रोत्रिय''' (जन्म १९ दिसम्बर १९३८) [[हिन्दी]] साहित्यकार, आलोचक तथा नाटककार हैं। हिंदी आलोचना में प्रभाकर श्रोत्रिय एक महत्वपूर्ण ना ...
    ११ KB (२३६ शब्द) - १०:५०, १५ जून २०२०
  • [[श्रेणी: साहित्यकार]] ...
    ७ KB (३०३ शब्द) - १६:४७, १७ जून २०२१
  • == [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] से सम्मानित मराठी साहित्यकार == मराठी साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए हर साल मराठी साहित्यकारों को साहित्य अकादमी की ओर से साहित्य अकादमी पुरस्कार दिए जाते हैं। ...
    ४४ KB (३०१ शब्द) - १०:१५, ६ मई २०२१
  • ...mu पियो जिरिमू] ने प्रस्तुत की थी जिसे दुनिया के अधिकांश आदिवासी लेखकों और साहित्यकारों ने स्वीकार किया। इनमें अफ्रीका के [https://web.archive.org/web/2015010303 दूसरी अवधारणा उन आदिवासी लेखकों और साहित्यकारों की है जो जन्मना और स्वानुभूति के आधार पर आदिवासियों द्वारा लिखे गए साहित् ...
    २४ KB (३४० शब्द) - १६:३३, २८ जून २०२१
  • [[श्रेणी:साहित्यकार]] ...
    १६ KB (२४४ शब्द) - ०१:१६, २४ जनवरी २०२१
  • [[श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार]] ...
    ३१ KB (२१५ शब्द) - ११:१५, २० जुलाई २०२१
  • ...जमाने में एक नई ही बात थी। उनके साहित्य और नवीन विचारों ने उस समय के तमाम साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों को झकझोरा और उनके इर्द-गिर्द राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्र {{हिन्दी साहित्यकार (जन्म १८५०-१९००)}} ...
    ६२ KB (७०० शब्द) - १८:०६, २ मई २०२१
  • ...्धिनी रचनाएँ प्रस्तुत की हैं। इस युग के प्रारंभिक दिनों के सर्वाधिक यशस्वी साहित्यकार हैं भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र। इनके नाटकों में विशुद्ध हास्यरस कम, वाग्वैदग् ...जी राज्य अपने गौरव पर था जिसकी प्रत्यक्ष आलोचना खतरे से खाली नहीं थी। अतएव साहित्यकारों ने, विशेषत: व्यंग्य और उपहास का मार्ग ही पकड़ था और स्यापा, हजो, वक्रोक्त ...
    ५८ KB (५१ शब्द) - १०:३४, ६ मई २०२१
  • इस युग के प्रारंभिक दिनों के सर्वाधिक यशस्वी साहित्यकार हैं [[भरतेन्दु हरिश्चन्द्र|भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र]]। इनके नाटकों में विशु ...जी राज्य अपने गौरव पर था जिसकी प्रत्यक्ष आलोचना खतरे से खाली नहीं थी। अतएव साहित्यकारों ने, विशेषत: व्यंग्य और उपहास का मार्ग ही पकड़ था और स्यापा, हजो, वक्रोक्त ...
    ५९ KB (१८५ शब्द) - १०:३४, ६ मई २०२१
  • ...श्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूस ...
    २९४ KB (१,६७९ शब्द) - १७:५०, १३ अगस्त २०२१