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इस विकि पर "माधुर्य भक्ति के कवि" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...सिक ''' की [[निंबार्क संप्रदाय|निम्बार्क सम्प्रदाय]] के प्रसिद्ध रसिक भक्त कवियों में गणना की जाती हैं।<ref name="hindisahityainfo.blogspot.in">http://hin == माधुर्य भक्ति का वर्णन== ...६ KB (५० शब्द) - ११:४०, ६ मई २०२१
- नागरीदास के स्फुट पद ,कवित्त ,सवैये आदि वाणी में संकलित हैं। ==माधुर्य भक्ति== ...६ KB (१३ शब्द) - १०:५२, ६ मई २०२१
- इनके पद ,कवित्त और सवैये स्फुट रूप में उपलब्ध हैं। इनकी समस्त वाणी सिद्धांत के पद और शृं ==माधुर्य भक्ति का वर्णन == ...६ KB (२५ शब्द) - १०:५७, ६ मई २०२१
- *चालीस स्फुट पद एवं कवित्त ==माधुर्य भक्ति का वर्णन == ...६ KB (५५ शब्द) - २१:३४, १५ जून २०२०
- '''गंगाबाई (कवि ) '''[[बल्लभ सम्प्रदाय]] की कवियों में गंगाबाई का स्थान प्रमुख है।<ref name="hindisahityainfo.blogspot.in"> ...AC%E0%A4%BE%E0%A4%88%20(%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%20)&f=false गंगाबाई का कविता संग्रह]</ref> नाम पुष्टि-मार्ग के वर्षोत्सव ग्रंथों में संकलित हैं। नमें ...७ KB (११६ शब्द) - ००:००, १५ जून २०२०
- किन्तु ब्रजभाषा में हरिव्यासदेव जी की केवल एक रचना महावाणी उपलब्ध होती है।<ref name="hindisahityainfo.blogspot.in"/> ==माधुर्य भक्ति का वर्णन == ...८ KB (१७३ शब्द) - ११:४४, ६ मई २०२१
- ...नागरीदास '''की [[राधावल्लभ संप्रदाय|राधावल्लभ सम्प्रदाय]] के प्रमुख भक्त कवियों में गणना की जाती है ...ावल्लभ सम्प्रदाय के नागरीदास जी के नाम के पूर्व नेही उपाधि के कारण आप अन्य कवियों से सहज ही अलग हो जाते हैं। नागरीदास जी का जन्म पँवार क्षत्रिय कुल में ग् ...९ KB (३१ शब्द) - ११:३६, ६ मई २०२१
- '''चतुर्भुजदास''' की वल्लभ सम्प्रदाय के भक्त कवियों में गणना की जाती है<ref>http://hindisahityainfo.blogspot.in/2017/06/blog ==माधुर्य भक्ति का वर्णन== ...७ KB (१७३ शब्द) - ११:३४, ६ मई २०२१
- ...अपने दोनों पुत्रों को स्वयं शिक्षा और दीक्षा दी। इस आधार पर वल्लभ रसिक का कविताकाल वि ० सं ० १६५० के आस पास स्वीकार किया जा सकता है। क्योंकि गदाधर भट्ट क ==माधुर्य भक्ति का वर्णन == ...९ KB (६० शब्द) - ११:३८, ६ मई २०२१
- ...इनकी रस-नीति,विरक्ति और शील-स्वभाव का वर्णन केवल हरिदासी सम्प्रदाय के भक्त कवियों ने नहीं,अपितु अन्य सम्प्रदाय के भक्तों ने भी क्या है। ==माधुर्य भक्ति का वर्णन == ...९ KB (३५ शब्द) - १०:५२, ६ मई २०२१
- '''श्रीभट्ट ''' की [[निम्बार्क सम्प्रदाय]] के प्रमुख कवियों में गणना की जाती है।<ref name="hindisahityainfo.blogspot.in">http://hind माधुर्य के सच्चे उपासक श्रीभट्ट केशव कश्मीरी के शिष्य थे। ...८ KB (१४६ शब्द) - १०:५७, ६ मई २०२१
- ...एक सन्त कवि थे। वे [[पुष्टिमार्ग|वल्लभ संप्रदाय]] ([[पुष्टिमार्ग]]) के आठ कवियों ([[अष्टछाप]] कवि) में से एक प्रमुख कवि थे। ये [[गोस्वामी विट्ठलनाथ]] के ==माधुर्य भक्ति का वर्णन== ...१० KB (७५ शब्द) - ०९:३६, ८ अगस्त २०२१
- '''ध्रुवदास ''' का [[राधावल्लभ संप्रदाय|राधावल्लभ सम्प्रदाय]] में भक्त कवियों में प्रमुख स्थान है। राधावल्लभ सम्प्रदाय में ध्रुवदास का भक्त कवियों में प्रमुख स्थान है। इस सम्प्रदाय भक्ति-सिद्धान्तों का जैसा सर्वांगपूर्ण ...९ KB (८९ शब्द) - ११:३६, ६ मई २०२१
- '''माधुरीदास ''' [[गौड़ीय सम्प्रदाय]] के अंतर्गत ब्रजभाषा के अच्छे कवियों में गणना है।<ref name="hindisahityainfo.blogspot.in">http://hindisahitya *माधुरीदास ने केलि-माधुरी का रचना काल अपने इस दोहे में दिया है : ...११ KB (८३ शब्द) - ११:३९, ६ मई २०२१
- ...्चय पर रीझ गए और स्वप्न में राधा-मन्त्र दिया ,जिसके प्रभाव से श्यामा-श्याम केलि तथा वृन्दावन-वैभव इनके हृदय में स्वतः स्फुरित हो उठा। वृन्दावन माधुरी के *सेवक वाणी (दोहे ,कवित्त पद आदि स्फुट रूप में ) ...१० KB (१०७ शब्द) - ११:४४, ६ मई २०२१
- '''गदाधर भट्ट '''[[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय|गौड़ीय संप्रदाय]] के प्रमुख भक्त कवियों में गिने जाते हैं।<ref name="hindisahityainfo.blogspot.in">http://hindis ...महाप्रभु और षट्गोस्वामियों के संपर्क के कारण आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इनका कविता कल वि ० सं ० १५ ८० से १६०० के कुछ बाद तक अनुमानित किया है<ref name="hindi ...१० KB (१४४ शब्द) - ११:३४, ६ मई २०२१
- ==माधुर्य भक्ति का वर्णन== ...र्वस्व हैं। इनके आश्रय में ही जीव को सुख की प्राप्ति हो सकती है,अन्यत्र तो केवल दुःख ही दुःख है। इसीकारण अपने उपास्य के चरणों में दृढ़ विश्वास रखकर सुख स ...१२ KB (१७० शब्द) - ११:४४, ६ मई २०२१
- ...े बस जाने पर उन्होंने मानसरोवर, वंशीवट, सेवाकुंज और रासमंडल नामक चार सिद्ध केलिस्थलों का प्राकट्य किया। ...नापद्धति अन्य वैष्णव भक्ति संप्रदायों से भिन्न तथा अनेक रूपों में नूतन है। माधुर्योपासना को नया देने में सबसे अधिक योग इन्हीं का माना जाता है। हरिवंश के मतानु ...१४ KB (८६ शब्द) - २३:०१, ७ मई २०२१
- ...ग्वालियर]] में हुआ। वे जाति के माथुर चौबे (चतुर्वेदी) थे। उनके पिता का नाम केशवराय था। जब बिहारी 8 वर्ष के थे तब इनके पिता इन्हे [[ओरछा]] ले आये तथा उनका ...े का विचार स्पष्ट होता है और यदि 'मोर मुकुट कटि काछिनि'-इस दोहे को लें, तो केवल एक विशेष बानकवाली कृष्णमूर्ति ही बिहारी की अभीष्टोपास्य मूर्ति मुख्य ठहरत ...३३ KB (३६३ शब्द) - १५:२६, २५ अगस्त २०२१
- ...दी मंच। २ अक्टूबर २००९। अजय सिंह</ref> उन्होंने 'हरिश्चंद्र चन्द्रिका', '[[कविवचनसुधा]]' और 'बाला बोधिनी' पत्रिकाओं का संपादन भी किया। वे एक उत्कृष्ट कवि, ...f name="जोशी"/> उनके पिता गोपालचंद्र एक अच्छे कवि थे और 'गिरधरदास'उपनाम से कविता लिखा करते थे। [[१८५७]] में [[१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|प्रथ ...६२ KB (७०० शब्द) - १८:०६, २ मई २०२१