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- == रस धातु == रस धातु के सामान्य विकारों का सारांश ...२ KB (२२ शब्द) - ११:३८, २५ जून २०१७
- ...Mani Madhava Chakyar-Sringara-new.jpg|thumb|मणि माधव चाक्यार द्वारा शृंगार रस का प्रदर्शन]] ...ार रस''' [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]] में से एक प्रमुख [[रस (काव्य शास्त्र)|रस]] है। यह [[रति भाव]] को दर्शाता है। ...८ KB (२१ शब्द) - १४:३०, २५ जनवरी २०२१
- '''रस नटराज''' [[हिन्दी]] की एक फिल्मी साप्ताहिक [[पत्रिका]] है। यह वर्ष 1963से [ ...१,०२३ बाइट (१४ शब्द) - १८:३२, १५ जून २०२०
- ...द के [[षड्रस|छह रस]] प्रसिद्ध हैं उसी प्रकार हृदय के आस्वाद के नौ [[रस]] प्रसिद्ध हैं। जिह्वा के आस्वाद को लौकिक आनंद की कोटि में रखा गया है क्योंकि उसका ...दिया है और इसके विश्लेषण में पर्याप्त मनन चिंतन किया है। इस मनन चिंतन को पौरस्त्य काव्याचार्यों की अपेक्षा पाश्चात्य काव्याचार्यों ने विस्तारपूर्वक अभिव् ...५९ KB (१८५ शब्द) - १०:३४, ६ मई २०२१
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- == रस धातु == रस धातु के सामान्य विकारों का सारांश ...२ KB (२२ शब्द) - ११:३८, २५ जून २०१७
- [[रस (काव्य शास्त्र)|रस]] ...1519/http://www.gathjod.com/?L=blogs.blog&article=20 हिंदी काव्य के अवयव - रस, छंद तथा अलंकार] : हिन्दी चिट्ठा '''गँठजोड़''' पर लेख ...१ KB (३४ शब्द) - ०२:२९, १५ जून २०२०
- {{रस छन्द अलंकार}} ...४०९ बाइट (० शब्द) - ०१:२२, ८ मार्च २०२०
- ...े प्रकार में शल्य क्रिया से जब थाइराइड ग्रंथि काट दी गई हो तब रस की कमी या रस की अनुपस्थिति हो जाती है। पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियाँ इस रोग से अधिक पीड़ि ...है। चिकित्सा में थाइरॉइड ग्रंथि का निष्कर्ष (extract) दिया जाता है, जिससे रस की प्राकृतिक कमी पूरी हो जाय। ...५ KB (१७ शब्द) - २२:१७, १६ अगस्त २०२१
- ...Mani Madhava Chakyar-Sringara-new.jpg|thumb|मणि माधव चाक्यार द्वारा शृंगार रस का प्रदर्शन]] ...ार रस''' [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]] में से एक प्रमुख [[रस (काव्य शास्त्र)|रस]] है। यह [[रति भाव]] को दर्शाता है। ...८ KB (२१ शब्द) - १४:३०, २५ जनवरी २०२१
- छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस कलिमल हरनि विषय रस फीकी ...३ KB (४८ शब्द) - १४:१२, २६ जून २०२१
- ...ं से इस काव्य की भावभूमि का विस्तार हुआ है। [[वीर रस]] के साथ-साथ [[शृंगार रस]] की भी प्रधानता है। इसमें [[दोहा]], [[सवैया]], [[कवित्त]] आदि छंद प्रयुक्त ...३ KB (१५ शब्द) - १४:३७, २२ अगस्त २०२१
- '''रस नटराज''' [[हिन्दी]] की एक फिल्मी साप्ताहिक [[पत्रिका]] है। यह वर्ष 1963से [ ...१,०२३ बाइट (१४ शब्द) - १८:३२, १५ जून २०२०
- '''रसतरंगिणी''' (=रस की नदी) , [[रसविद्या|रसशास्त्र]] का एक ग्रन्थ है जिसकी रचना महामहोपाध्याय [[श्रेणी:रसायन शास्त्र]] ...१ KB (४६ शब्द) - १८:३२, १५ जून २०२०
- '''कर्पूरमंजरी''' [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के प्रसिद्ध नाटककार एवं काव्यमीमांसक [[राजशेखर]] द्वारा रचित [[प्राकृत]] का [[नाटक] ...पात्र ही प्राकृत भाषा में रचित होता है। उसमें अद्भुत [[रस (काव्य शास्त्र)|रस]] का वैशिष्ट्य होता है। अंक के लिए जवनिकांतर शब्द का प्रयोग होता है। शेष बा ...५ KB (४७ शब्द) - १०:२३, १६ जून २०२०
- [[हिन्दू]] लोग [[भगवान]] को छप्पनभोग का प्रसाद चढ़ाते हैं। इनमे निम्नलिखित भोग आते हैं: इन छ: रसों के मेल से रसोइया कितने वयंजन बना सकता है? ...३ KB (८१ शब्द) - १५:३१, ४ अप्रैल २०२१
- ...ाय के धर्मदर्शन की छाया में '''भक्तिरसशास्त्र''' का प्रवर्तन किया। "[[भक्तिरसामृत सिंधु]]" तथा "[[उज्ज्वलनीलमणि]]", जिसमें [[कामशास्त्र]] की परंपराओं का ...ादि के भेद से वर्णन है। अंत में मधुरा रति के स्वरूप तथा पक्षों का तथा मधुर रस (संयोग विप्रलंभ) के भेदोपभेदों का वर्णन सर्वथा मौलिक है। ...६ KB (६ शब्द) - ०२:३२, ३ मार्च २०२०
- * [[हास्य रस गोष्ठी]] ...१ KB (११ शब्द) - ००:३८, १७ जुलाई २०२१
- '''[[काव्य]]''' : रसात्मक वाक्य ही 'काव्य' कहलाता है। (''वाक्यं रसात्मकं काव्यम्'') '''[[रस (काव्य शास्त्र)|रस]]''' : ...५ KB (१५६ शब्द) - ११:४८, २० मार्च २०२१
- ये सातों द्वीप चारों ओर से क्रमशः खारे पानी, इक्षुरस, मदिरा, घृत, दधि, दुग्ध और मीठे जल के सात समुद्रों से घिरे हैं। === इक्षु रस सागर === ...५ KB (९ शब्द) - १३:३०, ३० मार्च २०१९
- ...काजू]] पेस्ट भी जोड़ा जा सकता है और रस मोटा कर देगा। सॉस तैयार होने के बाद रस और चिकन मिश्रित है, जब तक तैयार चिकन कटा और पकाया जाता है। [[श्रेणी:रसोई]] ...३ KB (५५ शब्द) - १०:२४, २० मई २०२०
- ...्नसमुच्चय''' [[रस चिकित्सा|रस चिकित्सा]] का सर्वांगपूर्ण ग्रन्थ है। इसमें रसों के उत्तम उपयोग तथा पारद-लोह के अनेक संस्कारों का उत्तम वर्णन है। यह [[वाग ...स्वर्ण, रजत आदि का निर्माण तथा विविध रोगों को दूर करने के लिये उत्तमोत्तम रस तथा कल्प अपनी सादृश्यता नहीं रखते। यह ग्रन्थ जितना उच्च है उतना ही गूढ़ और ...१४ KB (३१६ शब्द) - १८:३२, १५ जून २०२०
- ...विचार किया जाता है। प्राचीन [[काव्यशास्त्र]], जिसमें [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]], [[अलंकार|अलंकारों]] रीतियों आदि पर विचार किया जाता था, भी साहित्यशास्त ...२ KB (७४ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
- | नाम = बल्लभ रसिक '''बल्लभ रसिक ''' [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय|गौड़ीय सम्प्रदाय]] के भक्त कवि हैं।<ref name ...९ KB (६० शब्द) - ११:३८, ६ मई २०२१
- प्राचीन काव्याचार्यों के मतानुसार '''उपालम्भ काव्य''' मुख्यतः [[शृंगार रस|शृंगार]]काव्य का एक भेद, जिसमें [[नायिका]] की विश्वस्त सखी उपालम्भ (उलाहना) ...को उपलक्ष्य बनाकर कृष्ण को उपालम्भ देने का अत्यन्त सुन्दर वर्णन है। इसी प्रसंग को काव्य में '''[[भ्रमरगीत]]''' के नाम से अभिहित किया गया है। ...५ KB (७ शब्द) - २१:२४, ५ मई २०२१