सामग्री पर जाएँ

खोज परिणाम

  • ...|हर्षचरित]] में अष्टमांगलिक माला आभूषण का उल्लेख हुआ है। बाद के साहित्य और लोकजीवन में भी इन चिहों की मान्यता और पूजा सुरक्षित रही, किंतु इनके नामों में परिवर ...
    ५ KB (२८ शब्द) - ०६:३५, ५ मार्च २०२०
  • ...संवाद सूक्तों से प्रवाहित कथाधारा निरंतर प्रवाहित है किंतु इन सबका योग भी लोकजीवन में प्रचलित कहानियों की बराबरी तक नहीं पहुँच सकता। ...ानव" आदि। इस विशेषता के कारण लोककथाओं का श्रोता विशेष उलझन में नहीं पड़ता। लोकजीवन में कथा कहने के साथ ही उसे सुनने की शैली भी निर्धारित कर दी गई है। सुननेवाल ...
    २८ KB (१०२ शब्द) - १३:२५, २७ मई २०२१
  • ...और संगीत भी थे। १२वीं सदी में इसके माध्यम से फ्रांस ने मध्ययुगीन यूरोप के लोकजीवन, साहित्य और संस्कृति को प्रभावित किया। यूरोप में [[ईसाई धर्म]] के प्रचार के ...
    ८ KB (२३ शब्द) - ०२:५६, ७ मार्च २०२०
  • ...ा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई दे ...
    १५ KB (६४ शब्द) - १६:०२, ५ अगस्त २०२१
  • ..." "अब" खातून (16वीं शती) और अ"रिनिमाल (18वीं शती) हैं जिनके वेदनागीतों में लोकजीवन के विरह मिलन का वह करुण मधुर सरगम सुनाई पड़ता है जो एक का होते हुए भी प्रत् ...
    २७ KB (९४५ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
  • # भक्तिकाव्य और लोकजीवन - 1983 (इस नाम से वाणी प्रकाशन से; संशोधित-परिवर्धित संस्करण-2010 में '''भक ...
    २३ KB (१९७ शब्द) - १०:२५, ६ मई २०२१
  • ...गभग 4295 [[वार्तिक]] लिखे। पाणिनि की तरह उनका भी ज्ञान व्यापक था। उन्होंने लोकजीवन के अनेक शब्दों का संस्कृत में समावेश किया और [[न्याय|न्यायों]] तथा परिभाषाओ ...
    ३२ KB (२९८ शब्द) - २१:२४, २२ मार्च २०२१
  • ...था उनके विकास की परम्परा और साथ ही अर्थ विकास की शृंखला निर्धारित करने में लोकजीवन का विशेष महत्त्व है। बोलियों में जब कोई बोली शिक्षित लोगों के मुख्य नगर या ...
    ८१ KB (८११ शब्द) - १५:२३, ६ मई २०२१
  • ...ं पर ग्रंथ बनाना भी संस्कृत पंडितों ने नहीं छोड़ा था। एक बात और थी। भारतीय लोकजीवन में संस्कृत की ऐसी शास्त्रीय प्रतिष्ठा रही है कि ग्रंथों की मान्यता के लिए ...
    ४५ KB (८६० शब्द) - २२:२४, २७ अगस्त २०२१
  • ...ित है। इस साहित्य का बहु भाग यद्यपि जैनधर्म विषयक है, तथापि उसमें तत्कालीन लोकजीवन ऐसा प्रतिबिंबित है जैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इसमें नानाकालीन एवं नानादेशीय ऐत ...
    ६१ KB (१५३ शब्द) - १०:०८, ६ मई २०२१