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  • ...ि नाना यागानुष्ठान) का विशद वर्णन है। [[वेद|वेदों]] के एकमात्र सर्वातिशायी भाष्यकार [[सायण]] [[तैत्तिरीय शाखा]] के ही अनुयायी थे और उन्होने सर्वप्रथम तैत्तिरीय [[श्रेणी:वेद]] ...
    २ KB (१३५ शब्द) - ०५:३५, १५ जून २०२०
  • ...अविद्या''' (ignorance) का नाश करने के साधन के रूप में जाने जाते हैं। [[वेद|वेदों]], [[ब्राह्मण ग्रन्थ|ब्राह्मणों]], एवं [[आरण्यक|आरण्यकों]] का [[सायणाचार् == भाष्यकार == ...
    ९ KB (१६१ शब्द) - २१:३३, १२ अगस्त २०२१
  • ===वेद=== ...अनुचित अनुवाद किया था। मुख्यतः चार वेद हैं- [[ऋग्वेद]], [[सामवेद]], [[यजुर्वेद]] और [[अथर्ववेद]]। ...
    ८ KB (८ शब्द) - १६:००, ३० मई २०२१
  • ...में बतलाई गई हैं उनमें '''मनन''' की सिद्धि उपपत्ति के ही द्वारा होती है। [[वेद]] के उपदेश को श्रुतिवाक्यों से प्रथमतः सुनना चाहिए (श्रवण) और तदनन्तर उनका ...हैं। प्रकाशित ग्रन्थों में, [[गोविंदस्वामी|गोविन्दस्वामी]] (८००ई) तथा चतुर्वेद प्रथूदकस्वामी (८६०ई) के टीका ग्रन्थों में उपपत्तियाँ मिलतीं हैं जिन्हें सबस ...
    १० KB (१४५ शब्द) - ०८:२२, १६ जून २०२०
  • ...त लोकप्रिय तथा प्रथित हुआ था। यह [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैत]] [[वेदान्त दर्शन|वेदान्त]] से सर्वथा विपरीत मान्यताएँ रखने वाला [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] है। इसकी ...दि जड़वादी दर्शनों की भाँति सांख्य न केवल जड़ पदार्थ ही मानता है और न अनेक वेदांत संप्रदायों की भाँति वह केवल चिन्मात्र ब्रह्म या आत्मा को ही जगत् का मूल ...
    ४२ KB (३६४ शब्द) - २३:३५, ४ मई २०२१
  • ...की [[संहिता]] में गीत या [[मन्त्र|मंत्र]] के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है (ऋग्वेद 8. 32.1, 8.71.14)। 'गै' (गाना) [[धातु]] से निष्पन्न होने के कारण गीत ही इसक ...5। 44। 5)। यद्यपि इसका पूर्वोक्त सामान्य अर्थ ही बहुश: अभीष्ट है, तथापि ऋग्वेद के इस मंत्र में इसका अपेक्षाकृत अधिक विशिष्ट आशय है, क्योंकि यहाँ यह नाराशं ...
    १५ KB (१५ शब्द) - ०९:५१, ६ मई २०२१
  • ...के सबसे प्राचीन साहित्य भी हैं। [[भारत की संस्कृति|भारतीय संस्कृति]] में वेद सनातन [[हिन्दू वर्ण व्यवस्था|वर्णाश्रम]] धर्म के, मूल और सबसे प्राचीन ग्रन् 'वेद' [[शब्द]] संस्कृत [[भाषा]] के विद् ज्ञाने धातु से बना है। इस तरह वेद का शाब्दिक अर्थ 'ज्ञान' है। इसी धातु से 'विदित' (जाना हुआ), 'विद्या' (ज्ञान ...
    ९६ KB (६३९ शब्द) - १९:१०, २२ अगस्त २०२१
  • इन चार प्रमाणों के अतिरिक्त मीमांसक, वेदांती और पौराणिक चार प्रकार के और प्रमाण मानते हैं—'''[[ऐतिह्य]], [[अर्थापत्त ...िये प्रतिज्ञा, हेतु और दृष्टांत इन्हीं तीनों को काफी समझते हैं। मीमांसक और वेदांती भी इन्हीं तीनों को मानते हैं। बौद्ध नैयायिक दो ही मानते हैं, प्रतिज्ञा ...
    ४८ KB (२७६ शब्द) - १६:३२, ३० अगस्त २०२०
  • ...मणों में है, ज्ञान का विवेचन उपनिषदों में। 'वेदान्त' का शाब्दिक अर्थ है - 'वेदों का अंत' (अथवा सार)। ...जाना जाता है।संत मे भी ज्ञानेश्वर महाराज, तुकाराम महाराज आदि. संत पुरुषोने वेदांत के ऊपर बहुत ग्रंथ लिखे है आज भी लोग संतो के उपदेशो के अनुकरण करते है। ...
    ४३ KB (५९ शब्द) - १४:३७, २ जून २०२१
  • ...ः दर्शनों]] में से एक है। इस शास्त्र काे 'पूर्वमीमांसा' और [[वेदान्त दर्शन|वेदान्त]] काे 'उत्तरमीमांसा' भी कहा जाता है। पूर्ममीमांसा में [[धर्म]] का विचार पक्ष-प्रतिपक्ष को लेकर [[वेद]]वाक्यों के निर्णीत अर्थ के विचार का नाम '''मीमांसा''' है। उक्त विचार पूर्व ...
    १०५ KB (२४६ शब्द) - २०:३५, २० अगस्त २०२०
  • |philosophy = [[वेद]]ों की ओर चलो, [[आधुनिक भारतीय दर्शन]] ...यासी तथा एक चिन्तक थे। उन्होंने [[वेदों]] की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना। 'वेदों की ओर लौटो' यह उनका प्रमुख नारा था। ...
    ६८ KB (५५३ शब्द) - १२:४०, ११ जुलाई २०२१
  • तन्त्रों को [[वेद|वेदों]] के काल के बाद की रचना माना जाता है जिसका विकास प्रथम सहस्राब्दी के मध्य | style="background: silver;"| 1700–1100 ईसापूर्व || ''[[ऋग्वेद]]'' X, 71.9 || वस्त्र बुनने का यन्त्र <ref name=Banerjee>Banerjee, S.C., 19 ...
    ४९ KB (१,११८ शब्द) - १६:३३, २९ जून २०२१
  • वेद,१०८ उपनिषद, ६ दर्शन,२० स्मृतिया और १८ पुराणों के भाष्यकार । पण्डित श्रीराम शर्मा ने लगभग 3200 ग्रथों की रचना की जिसमें चारों वेदों का सरल भाष्य, उपनिषद सहित अनेक सद्ग्रन्थ शामिल हैं। ...
    ४२ KB (६६२ शब्द) - १२:४६, १५ अगस्त २०२१