Deprecated: Caller from MediaWiki\Revision\RevisionStore::loadSlotRecordsFromDb ignored an error originally raised from MediaWiki\Extension\SmartCommons\Store\MetadataStore::updateMetadata: [1054] Unknown column 'scf_url' in 'SET' in /www/wwwroot/enwiki/w/includes/debug/MWDebug.php on line 385
"शुक्र ग्रह" के परिणाम खोजें - भारतपीडिया सामग्री पर जाएँ

खोज परिणाम

देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)
  • भारतीय फलित ज्योतिष में ग्रह की किसी भाव में स्थिति के कारण ग्रह को '''आवासीय बल''' प्राप्त होता है। इस सम्पूर्ण सांख्यिकी को ज्ञात करने के ...्रह कहते हैं। पूर्ण बली ग्रह को एक रुपा अंक दिये जाते हैं। तथा इसके विपरीत ग्रह अपने नीच बिन्दु पर शून्य बल प्राप्त करता है। ...
    ६ KB (३ शब्द) - २०:५८, १८ नवम्बर २०१७
  • ...्थात 10 वें भाव में, शनि पश्चिम दिशा में अर्थात सांतवें भाव में, चन्द्र और शुक्र उतर दिशा अर्थात चतुर्थ भाव में दिगबली होते है। ...
    १ KB (० शब्द) - २३:३६, १३ सितम्बर २०१४
  • ...शित करता है। नवांश कुण्डली में नवग्रहो सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि के वर्गोत्तम होने पर व्यक्ति क्रमश: प्रतिष्ठावान, अच्छी स्मरण शक्ति, उ ...
    २ KB (२ शब्द) - ०८:२०, २८ जनवरी २०१७
  • == सूर्य के ग्रहों का परिक्रमण काल == ! ग्रह !! परिक्रमण काल ...
    १ KB (१८ शब्द) - १६:३४, २९ फ़रवरी २०२०
  • ;[[शुक्र मण्डल]] बुद्ध मण्डल से एक लाख योजन ऊपर शुक्र मण्डल है। ...
    ४ KB (९ शब्द) - १६:२४, ८ अगस्त २०२१
  • प्रत्येक ग्रह विषुवत रेखा के उतर या दक्षिण में स्थित होता है और अपनी स्थिति के अनुसार बल ग्रह की विषुवत रेखा से कोणीय दूरी ही क्रान्ति कहलाती है। सूर्य, मंगल, शुक्र और गुरु जब उतरायन में चलते हुए अपने अधिकतम क्रान्ति तक पहुंचते है तो इनका ब ...
    २ KB (४२ शब्द) - ०६:११, १६ जून २०२०
  • ...प्रैल 2015 |url-status=live }}</ref> पृथ्वी द्रव्यमान अक्सर चट्टानी स्थलीय ग्रहों के द्रव्यमान का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है | [[सौर मण्डल|सौर मंडल]] के चार [[स्थलीय ग्रह]]ों, [[बुध (बहुविकल्पी)|बुध]], [[शुक्र]], [[पृथ्वी]] और [[मंगल]] के द्रव्यमान क्रमशः ०.०५५, ०.८१५, १.००० और ०.१०७ ...
    ४ KB (२३२ शब्द) - १४:४९, २४ जून २०२१
  • ...ार रात्रि के तीनों भागों में से पहले भाग का स्वामित्व चन्द्र, दुसरे भाग का शुक्र और तीसरे भाग का स्वामित्व मंगल को दिया गया है। गुरु दिन तथा रात्रि दोनों सम ...े लिये व्यक्ति का जन्म दिनमान या रात्रिमान के जिस भाग में उस भाग के स्वामी ग्रह को बल दिया जाता है। ...
    २ KB (१ शब्द) - २१:४८, १३ सितम्बर २०१४
  • ...इस से अधिक वेग रखने से कोई भी यान हमारा ग्रह छोड़कर [[सौर मण्डल]] के दूसरे ग्रहों की ओर जा सकता है। | [[शुक्र]] || [[शुक्र]] || align="right" | 10.3 ...
    ६ KB (११० शब्द) - १७:०५, २५ जुलाई २०२१
  • [[चित्र:Shukra cropped.jpg|right|thumb|250px|शुक्र ग्रह के रूप में शुक्राचार्य की मूर्ति]] ...े पुत्र जो '''शुक्राचार्य''' के नाम से अधिक विख्यात हैं। इनका जन्म का नाम 'शुक्र उशनस' है। [[पुराण|पुराणों]] के अनुसार यह [[असुर|असुरों]] ( [[दैत्य]] , [[दा ...
    ५ KB (२९ शब्द) - १७:२४, १७ अगस्त २०२१
  • | Exaltation= कोई ग्रह नहीं | Fall= कोई ग्रह नहीं ...
    ६ KB (३५ शब्द) - ००:०९, ७ मई २०२०
  • ...३, १२, २, भावों के नामान्तर, फणफर, आपोक्लिम सज्ञा, उपचय और अनुपचय संज्ञा, ग्रहों की मूल त्रिकोण राशि, उच्च नीचादि ज्ञान, राशियों की ह्रस्व, दीर्घ, मध्योदय ..., द्रेष्काण बल, दिन रात्रि विभाग बल, नैसर्गिक बल, सात प्रकार के बल का कथन, ग्रहों की असफलता. ...
    ३६ KB (५८ शब्द) - ००:३१, १६ जून २०२०
  • ...िड]], [[मार्स]], [[मरक्युरी]], [[प्लूटो]], [[सैटर्न]], [[वुल्कन]], [[वरुण (ग्रह)|नेप्चून]], [[मिथ्रास]] ([[मित्र]]), इत्यादि । रोमन देवताओं में बाद के रोमन ...[[जूनो]], [[मिनर्वा]], [[सिरीस]], [[फ़्लोरा]], [[फ़ोर्तूना]], [[डायना]], [[शुक्र|वीनस]], इत्यादि। ...
    ३ KB (२१ शब्द) - ०६:०९, ११ मार्च २०२१
  • ...are us.png|thumb|right|350px|हमारे सौरमण्डल के ग्रह - दायें से बाएं - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण ,यम]] [[चित्र:Star-sizes.jpg|thumb|200px|सौर मंडल के ग्रहों, सूर्य और अन्य पिंडों के तुलनात्मक चित्र]] ...
    २१ KB (१,७१४ शब्द) - १०:१०, १० अगस्त २०२१
  • ...कते हैं और चर का मतलब होता है चलना. इस तरह गोचर का सम्पूर्ण अर्थ निकलता है ग्रहों का चलना. ...ेकर राहु केतु तक सभी ग्रहों की अपनी गति है। अपनी-अपनी गति के अनुसार ही सभी ग्रह राशिचक्र में गमन करने में अलग-अलग समय लेते हैं। नवग्रहों में चन्द्र का गोचर ...
    ७ KB (४७ शब्द) - ११:३५, ६ अप्रैल २०२१
  • ...वितीय चरण में शुक्र-बुध, तॄतीय चरण में शुक्र-शुक्र, और भरणी चतुर्थ चरण में शुक्र-मंगल, कॄत्तिका के प्रथम चरण में सूर्य-गुरु हैं। * '''दूसरे चरण''' के अधिपति केतु-शुक्र, जातक को ऐसो आराम की जिन्दगी जीने के लिये मेहनत वाले कार्यों से दूर रखता है ...
    १३ KB (३५ शब्द) - १६:३७, १ अक्टूबर २०२०
  • ...्य]] नक्षत्र के दूसरे चरण के मालिक शनि-बुध हैं, शनि कार्य और बुध बुद्धि का ग्रह है, दोनो मिलकर कार्य करने के प्रति बुद्धि को प्रदान करने के बाद जातक को होश ...है, तो शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है। शनि अधिक वासना देता है, तो शुक्र भोगों की तरफ़ जाता है। ...
    १४ KB (१५ शब्द) - २०:२४, ११ जून २०२०
  • ...नक्षत्र के प्रथम चरण के स्वामी चन्द्रमा-मंगल, दूसरे चरण के स्वामी चन्द्रमा-शुक्र, तीसरे चरण के स्वामी चन्द्रमा-बुध, चौथे चरण के स्वामी चन्द्रमा-चन्द्रमा, है * रोहिणी के दूसरे चरण के मालिक चन्द्र-शुक्र जातक को अधिक सौन्दर्य बोधी और कला प्रिय बनादेता है। जातक कलाकारी के क्षेत्र ...
    १६ KB (२७ शब्द) - १५:०८, १७ जून २०२१
  • | caption =सौर मंडल का मुख्य रूप - 8 [[ग्रह]], 1 [[बौना ग्रह]], क्षुद्रग्रह पट्टी तथा एक [[धूमकेतू]] को दर्शाता हुआ (पैमाने के अनुसार नह ...=3 जुलाई 2017 |url-status=live }}</ref>}} और |{{smaller|347 [[हीन ग्रह|हीन ग्रहीय]]<ref name="MPMJohnston">{{cite web |date=12 April 2018 |title=Asteroids ...
    ४८ KB (१,१२२ शब्द) - १३:०१, ६ अगस्त २०२१
  • {{ज्ञानसंदूक ग्रह '''टाइटन''' (Titan), या '''[[शनि]] षष्टम''', [[सौर मंडल]] के [[शनि]] ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा है। यह सौर मंडल के सभी [[प्राकृतिक उपग्रह|चंद्रमाओं]] ...
    १६ KB (५१४ शब्द) - ०८:०६, २९ अगस्त २०२०
देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)