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- ...ों में विभक्त है किंतु वास्तव में समस्त प्रोटेस्टैंट के 94 प्रतिशत पाँच ही संप्रदायों में सम्मिलित हैं, अर्थात: लूथरन, कैलविनिस्ट, [[आंग्लिकाई ऐक्य|एंग्लिकन]], *1. इस संधि से 1530 ई. में लूथरवादी संप्रदाय का जो सैद्धांतिक स्वरूप निर्दिष्ट किया गया था उसे 1555 ई. की इस संधि द्वारा ...२० KB (२४४ शब्द) - ०९:२१, १८ अगस्त २०२१
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- ...नाम [[जगमोहन गोस्वामी]] के नाम पर पड़ा जो इसके प्रवर्तक माने जाते हैं। इस संप्रदाय के लोग निर्गुण उपासक हैं। गुरु की पूजा इनकी उपासना का मुख्य अंग है। इसके दो ...७६६ बाइट (३ शब्द) - १९:३२, १४ फ़रवरी २०१३
- ...्ति कश्मीर मे हुई थी तथा सौतांत्रिक तंत्र मंत्र से संबंधित था। सौतांत्रिक संप्रदाय का सिद्धांत मंजूश्रीमूलकल्प एवं गुहा सामाज नामक ग्रंथ मे मिलता है। ...३ KB (५ शब्द) - १६:१०, २५ जुलाई २०२१
- ...ौद्ध धर्म]] के महायान संप्रदाय का सूत्रग्रंथ है। यह चीनी बौद्ध धर्म के चान संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। शूरां = 'वीरों का' ; गम् = जाना (अर्थात, वीरत्व प्राप्त ...१ KB (११० शब्द) - २३:०१, १५ जून २०२०
- ...की पर रख दिया जाता है, इसे ही [[नैवेद्य]] तथा भक्ति निवेदित की जाती है। इस संप्रदाय में [[दीक्षा]] की व्यवस्था नहीं है। ...२ KB (१६ शब्द) - ०९:५७, ६ मई २०२१
- '''स्वामी गुणभद्र आचार्य''', [[दिगंबर जैन]] संप्रदाय के सेनसंघ में अवतीर्ण [[जिनसेन]] आचार्य के प्रधान शिष्य और [[उत्तरपुराण]], ...६३१ बाइट (२ शब्द) - १९:०१, २९ जनवरी २०१७
- ...रदायों में बटे हैं, जैसे [[कैथोलिक कलीसिया|रोमन कैथोलिक]], [[प्रोटेस्टेंट संप्रदाय|प्रोटेस्टेंट]] और [[पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च|ऑर्थोडॉक्स]]। ''देखिये : [[ईसाई ...६९९ बाइट (५ शब्द) - १४:३३, २८ जनवरी २०२१
- '''कूका''' एक [[सिख]] संप्रदाय है जिसे '''नामधारी''' भी कहते हैं। इस सम्प्रदाय की स्थापना [[रामसिंह कूका|र ...निधन हुआ। इसके बाद कूकापंथ का विद्रोहात्मक रूप समाप्त हो गया किंतु धार्मिक संप्रदाय के रूप में पंजाब में आज भी [[लोहार]], [[जाट]] आदि अनेक लोगों के बीच इसका मह ...४ KB (५ शब्द) - १०:२३, १५ मई २०२०
- ...ंत्र दीक्षा परंपरा से इन संप्रदायों का प्रवर्तन हुआ है। वर्तमान में ये सभी संप्रदाय अपने प्रमुख आचार्यो के नाम से जाने जाते हैं। यह सभी प्रमुख आचार्य दक्षिण भा '''(४) कुमार संप्रदाय''' जिसके आद्य प्रवर्तक सनतकुमार गण और प्रमुख आचार्य निम्बार्काचार्य हुए जो ...७ KB (१३७ शब्द) - १३:३३, १६ जून २०२१
- '''मेथोडिज्म''' [[प्रोटेस्टेंट संप्रदाय|प्रोटेस्टैण्ट]] ईसाइयत से सम्बन्धित धार्मिक आन्दोलन है। यह अनेकानेक नामों व *[[प्रोटेस्टेंट संप्रदाय]] ...४ KB (४३ शब्द) - १४:२९, ३ मार्च २०२०
- ...एक संप्रदाय, जिसके अनुयायी अलख अगोचर तत्व का ध्यान करते हैं। '[[अलखनामी]]' संप्रदाय। ...३ KB (२५ शब्द) - ११:००, ३ मार्च २०१७
- ...ी हरिदास''' (1478-1573) भक्त कवि, शास्त्रीय संगीतकार तथा कृष्णोपासक [[सखी संप्रदाय]] के प्रवर्तक थे। इन्हें [[ललिता सखी]] का अवतार माना जाता है। वे वैष्णव भक ये महात्मा वृन्दावन में निंबार्क सखी संप्रदाय के संस्थापक थे और अकबर के समय में एक सिद्ध भक्त और संगीत-कला-कोविद माने जात ...४ KB (१८ शब्द) - १३:१०, २९ मई २०२१
- ...थ हैं, इस कारण इन्हें लकुटीश कहते हैं। डॉ॰ रा.गो. भंडारकर के अनुसार पाशुपत संप्रदाय की उत्पत्ति का समय ई.पू. दूसरी शताब्दी है। ...मूलत: [[वज्रयान|व्रजयानी परंपराओं]] से हुआ अथवा शैव या [[नाथ सम्प्रदाय|नाथ संप्रदाय]] से। यक्ष-देव-परंपरा के देवताओं और साधनाओं का सीधा प्रभाव शैव और बौद्ध काप ...८ KB (२० शब्द) - ००:२८, १२ मार्च २०२०
- 'स्वयं भगवान' शब्द का प्रयोग प्रायः [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय|गौडीय वैष्णव सम्प्रदाय]] के लोग अधिक करते हैं। ...९८९ बाइट (६ शब्द) - ०४:५४, ३ मार्च २०२०
- ...1533) भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। इन्होंने वैष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखी। भजन गायकी की एक नयी शैली को जन्म दिया तथा राजनैतिक अस्थिरत ...हरि, गौर सुंदर आदि भी कहते थे। चैतन्य महाप्रभु के द्वारा [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय]] की आधारशिला रखी गई। उनके द्वारा प्रारंभ किए गए महामंत्र नाम संकीर्तन का अ ...३ KB (८ शब्द) - १०:४७, १५ जुलाई २०१४
- ...वृंदावन जयपुर नरेश जयसिंह द्वितीय के प्रभावक्षेत्र में था, जिन्हें गौड़ीय संप्रदाय के विरुद्ध यह कहकर भड़का दिया गया कि यह मत अवैदिक था। इस पर जयपुर में वैष्ण ...३ KB (१९ शब्द) - १२:०६, १५ जून २०२०
- * [[थेरवाद]] संप्रदाय का पालि संस्करण ...्रदाय और उससे निकला संप्रदाय जैसे कि कोरियाली, भियतनामी और जापान के रित्सु संप्रदाय प्रयोग करते है ...५ KB (९२ शब्द) - ११:४९, १८ सितम्बर २०२०
- ...nand 2004, pp. 19–20, 272–275.</ref>शैव में शाक्त, नाथ, दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं। [[महाभारत]] में माहेश्वरों (शैव) के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं: (i) शै (7) वामन पुराण में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई है: ...१० KB (९७ शब्द) - १४:१९, ११ अगस्त २०२१
- '''कनफटा''' [[नाथ सम्प्रदाय|गोरख संप्रदाय]] के योगियों का एक वर्ग है। दीक्षा के समय [[कान]] छिदवाकर उसमें मुद्रा या क [[नाथ सम्प्रदाय|नाथयोगी संप्रदाय]] में ऐसे योगी, जो कान नहीं छिदवाते और कुंडल धारण नहीं करते, [[औघड़]] कहलात ...५ KB (१४ शब्द) - १७:१५, २९ फ़रवरी २०२०
- ...r,_1529.jpg|200px|right|thumb|मार्टिन लूथर (१४८३ - १५४६) एक [[प्रोटेस्टेंट संप्रदाय|प्रोटेस्टैंट]] पादरी थे जो [[कैथोलिक कलीसिया|कैथोलिक पंथ]] की निन्दा करते ...]] ने कई नियम बानाए व घोषणाएँ की जिनका पालन करा जाता था। जब [[प्रोटेस्टेंट संप्रदाय|प्रोटेस्टैंट पंथ]] उभरा तो उसकी कई शाखाओं ने सोला स्क्रिप्तूरा के सिद्धांत ...४ KB (१४८ शब्द) - ०७:४९, ३ फ़रवरी २०२१
- ...को लोकभाषा में [[धर्म]] के मर्म की बात समझाकर, एक सूत्र में पिरोने में इस संप्रदाय से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ...एवं ग्राह्य था। आगे चलकर मानवीय मूल्यों से सम्पन्न इसी धर्म को "रामस्नेही संप्रदाय' की संज्ञा से अभिहित किया गया। ...५ KB (६१ शब्द) - २१:४७, २७ अगस्त २०२१