Deprecated: Caller from MediaWiki\Revision\RevisionStore::loadSlotRecordsFromDb ignored an error originally raised from MediaWiki\Extension\SmartCommons\Store\MetadataStore::updateMetadata: [1054] Unknown column 'scf_url' in 'SET' in /www/wwwroot/enwiki/w/includes/debug/MWDebug.php on line 385
"हिन्दू धर्म के मत" के परिणाम खोजें - भारतपीडिया सामग्री पर जाएँ

खोज परिणाम

देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)
  • ...ymbol.PNG|40px]]{{spaces|2}} [[चित्र:SriYantra color.svg|40px]]'''[[हिन्दू धर्म]]''' {{spaces|6}}• '''[[हिन्दू त्यौहार]]''' •{{spaces|6}} '''[[हिन्दू प ...हैं। [[इंडोनेशिया]] में इस धर्म का औपचारिक नाम "[[हिन्दु आगम]]" है। हिन्दू धर्म में चार वेद है। ...
    ३ KB (४६ शब्द) - १५:५२, ९ अक्टूबर २०२०
  • ...ंने १ जनवरी १९०१ से ३१ दिसंबर २००० तक के दरम्यां कभी भी नेतृत्व कियाा। अतः केवल उन नेताओं के नाम जोड़ें जिनका विकिपीडिया पर किसी पृष्ठ अथवा सूची में उल्ल ==बौद्ध धर्म== ...
    ३ KB (२ शब्द) - २१:३२, ११ मार्च २०२०
  • ...|रामानुजाचार्य]], [[मध्वाचार्य]] आदि बड़े-बड़े गुरुओं ने ऐसा कर के ही अपने मत का प्रतिपादन किया। [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...
    २ KB (९ शब्द) - ०८:२९, ४ अगस्त २०२१
  • ...इस [[धर्म]] में [[मूर्तिपूजा]] की प्रधानता नहीं है। धार्मिक उत्सवों के समय केवल एक पवित्र ग्रंथ चौकी पर रख दिया जाता है, इसे ही [[नैवेद्य]] तथा भक्ति निव ...कहते हैं। इस धर्म का मूल मंत्र है -''एक देव, एक सेव, एक बिने नाइ केव''। इस धर्म में कोई जाति-भेद ऊँच-नीच, धनी-दुखिया का भेद नहीं है। ...
    २ KB (१६ शब्द) - ०९:५७, ६ मई २०२१
  • ...BQ%26ved%3D0CCkQFjAD%26usg%3DAFQjCNG_kCc2J9ff_7P0yJwtJpZDQoXY4Q |title=जैन धर्म में गन्धर्व |access-date=14 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/w == हिन्दू धर्म में == ...
    ६ KB (११६ शब्द) - १०:२८, १२ जुलाई २०२१
  • ...बहुतों का मत है। प्रदक्षिणा के अंत में प्रणाम अवश्य करना चाहिये, बहुतों का मत है। किसी-किसी ग्रंथ में प्रदक्षिणा के विशेष नियम उपलब्ध होते है; [[विश्वासर [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...
    ३ KB (२० शब्द) - १०:४८, १५ जून २०२०
  • '''[[वेदान्त दर्शन|वेदांतियों]]''' के मत से [[ब्रह्म]] ही एकमात्र परमार्थ तत्त्व है। '''[[शून्यता|शून्यवादी बौद्धों]]''' के मत से शून्य या अभाव ही परम तत्त्व है, क्यों कि जो वस्तु है, वह पहले नहीं थी और ...
    ४ KB (१६ शब्द) - ०५:०७, ३ मार्च २०२०
  • ...इसकी चौहद्दी बनी। यहाँ प्रयागेश्वर का मंदिर है। [[काशीप्रसाद जायसवाल]] के मत से भारशिवों राजभर ने जिस स्थान पर दस अश्वमेघ किए वह यही भूमि है। सन् 1929 म [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...
    २ KB (११ शब्द) - २१:२२, ३० अप्रैल २०२१
  • ...के अनुयायी माने जाते हैं, क्योंकि प्रसिद्ध है कि [[जालंधरनाथ]] औघड़ थे और मत्स्येंद्रनाथ एवं गोरखनाथ कनफटे। कनफटे योगियों में विधवा स्त्रियाँ तथा योगियो ...है कि मत्स्येंद्र और गोरक्ष के पूर्व भी कर्णकुंडल धारण करने की प्रथा थी और केवल [[शिव]] की ही मूर्तियों में यह बात पाई जाती है। ...
    ५ KB (१४ शब्द) - १७:१५, २९ फ़रवरी २०२०
  • ...े अनुसार इनके पिता का नाम कुशाश्व था। इनकी माता पुरुकुत्स की कन्या थीं। एक मत से ये [[इन्द्र|इंद्र]] से उत्पन्न हुए थे। ये कान्यकुब्ज के राजा थे। इनकी कन [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...
    २ KB (२ शब्द) - ०५:३९, ८ मार्च २०२०
  • ...[[कृष्ण]] आदि अवतारों में मानकर उनकी पूजा कर मोक्ष की इच्छा रखता था। पहले मत के कबीर, नानक आदि मुख्य प्रचारक थे और दूसरे के तुलसी, सूर आदि। [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...
    २ KB (४ शब्द) - ०७:१८, २२ अगस्त २०१९
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - ०८:०४, १५ जून २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - १३:३४, १८ सितम्बर २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - १३:३५, १८ सितम्बर २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नहीं है समान्यत: उपनिषदों का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व मा ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२९० शब्द) - १६:३३, २८ सितम्बर २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - ०१:५३, १६ जून २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - ०७:४३, १५ जून २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - ०८:०७, १५ जून २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - १७:१८, १५ जून २०२०
  • ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...तरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केन<br />'''मध्यकालीन:''' केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्य<br />'''सांख्य एवं योग पर अधारित ...
    ८ KB (२८८ शब्द) - १३:२६, १८ सितम्बर २०२०
देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)