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मैराथन का युद्ध

भारतपीडिया से

साँचा:ज्ञानसन्दूक सैन्य संघर्ष

मैराथन का युद्ध (साँचा:Lang-el) प्राचीन यूनान में लडा गया जिसमें फारस की सेना परास्त हुई। इस घटना की सूचना देने हेतु एक सेनिक ने पहली बार मैराथन की दोड लगाई थी।

मैराथन का युद्ध[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

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मैराथन की मूर्ति

यह युद्ध 490 ई.पू. में यूनान व फारस के बीच मैराथन के मैदान में हुआ था। डेरियस फारस का राजा था। वह अत्यंत पराक्रमी था। पश्चिम में इजियन सागर से लेकर, पूर्व में सिंधु नदी तक, व उत्तर में सिथियन के मैदानों से लेकर, दक्षिण में मिस्र की नील नदी तक उसके राज्य का विस्तार था।

कारण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

उसकी साम्राज्य लिप्सा, दिनोंदिन बढ़्ती ही जा रही थी। जब उसने एशिया के पश्चिमी किनारे पर बसे ग्रीक लोगों, जिन्हें आयोनियन कहा जाता था, को अधीनता का सन्देश भेजा, तो उनमें से थीब्स व इजीना की जनता ने तो स्वीकार कर लिया, परन्तु एथेंसस्पार्टा के लोगों ने विरोध प्रकट कर दिया। तब डेरियस ने भारी जहाजी सेना सहित यूनान पर चढ़ाई कर दी। इसी से मैराथन के युद्ध का आरंभ हुआ।

वास्तविक संघर्ष[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

ईरानी सेना ने मार्ग में आने वाले टापू भी जीत लिये, यूबिया में आकर इरिट्रीया को घेरकर उसमें आग लगा दी। फिर मैराथम]] के मैदान में पड़ाव डाल दिया। प्लेटिका के यूनानी लोगों ने स्पार्टा को सहयोग संदेश भेजा। संदेश वाहक 150 मील 48 घंटों में पहुंचे। तब स्पार्टा के सहयोग से, तथा प्रतिभाशाली मिलिटियाड्स के कुशल नेतृत्व में 11000 की यूनानी सेना ने, 20000 की फारसी सेना को बुरी तरह हरा दिया।

इस युद्ध में, यूनानी सेना में, बहुत से गुलाम भी थे, जिन्हें कहा गया था, कि युद्ध जीतने पर, उन्हें मुक्त कर दिया जायेगा। इस युद्ध से सेनापति मिलियाड्स की प्रसिद्धि बहुत बढ़ गयी। और डेरियस को बहुत आघात पहुंचा, व उसने बदला लेने की जोरदार तैयारी की, परन्तु उससे पहले ही उसका देहांत हो गया।


सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

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