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शैतान

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शैतान

शैतान (अंग्रेज़ी :Satan सेटन या Devil डेविल), इब्रानी :שָׂטָן शातान, अरबी :شيطان शैतान । शाब्दिक अर्थ : दुश्मन, विरोधी या अभियोगी) इब्राहिमी सम्प्रदायों में सबसे दुष्ट अस्तित्वी का नाम है, जो दुनिया की सारी बुराई का प्रतीक है। इन सम्प्रदायों में ईश्वर को सारी अच्छाई प्रदान की जाती है और बुराई शैतान को। हिन्दू पन्थ में शैतान जैसी चीज का कोई अस्तित्व नहीं है, क्योंकि दुनिया में पाप और दुख मनुष्य स्वयं अपने कर्मो और अपने अज्ञान द्वारा उत्पन्न करता है। ईसाई, इस्लाम और यहूदी मतों के अनुसार शैतान पहले ईश्वर का एक फ़रिश्ता था, जिसने ईश्वर से विद्रोह किया और इसके बदले ईश्वर ने उसे स्वर्ग से निकाल दिया। शैतान पृथ्वी पर मानवों को पाप के लिये उकसाता है। कई उसे नरक का राजा भी मानते हैं। शैतान शब्द अन्य दुष्ट भूत-प्रेतों और दुष्ट देवों के लिये भी प्रयुक्त होता है। शैतानी धर्म में शैतान की पूजा की जाती है।

परिचय[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

बाइबिल में इस शब्द के अर्थ में क्रमिक विकास हुआ है। इब्रानी पूर्वार्ध में इसका अर्थ है - अभियोक्ता, विरोधी, आक्रामक। प्रारंभ में इसका प्रयोग किसी भी मानवीय विरोधी के लिए हुआ है। इय्योब नामक काव्यग्रंथ में शैतान एक पारलौकिक सत्व है जो ईश्वर के दरबार में इय्योब पर पाखंड का आरोप लगाता है। यहूदियों के निर्वासनकाल के बाद (छठी शताब्दी ई. पू.) शैतान एक पतित देवदूत है जो मनुष्यों को पाप करने के लिए प्रलोभन देता है।

बाइबिल के उत्तरार्ध में शैतान बुराई की समष्टिगत अथवा व्यक्तिगत सत्ता का नाम है। उसको पतित देवदूत, ईश्वर का विरोधी, दुष्ट, प्राचीन सर्प, परदार साँप (ड्रैगन), गरजनेवाला सिंह, इहलोक का नायक आदि कहा गया है। जहाँ मसीह अथवा उनके शिष्य जाते, वहाँ शैतान अधिक सक्रिय बन जाता क्योंकि मसीह उसको पराजित करेंगे और उसका प्रभुत्व मिटा देंगे। किंतु मसीह की वह विजय संसार के अंत में ही पूर्ण हो पाएगी (दे. कयामत)। इतने में शैतान को मसीह और उसके मुक्तिविधान का विरोध करने की छुट्टी दी जाती है। दुष्ट मनुष्य स्वेच्छा से शैतान की सहायता करते हैं। संसार के अंत में जो ्ख्राीस्त विरोधी (ऐंटी क्राइस्ट) प्रकट होगा वह शैतान की कठपुतली ही है। उस समय शैतान का विरोध अत्यंत सक्रिय रूप धारण कर लेगा किंतु अंततोगत्वा वह सदा के लिए नर्क में डाल दिया जाएगा। ईसा पर अपने विश्वास के कारण ईसाई शैतान के सफलतापूर्वक विरोध करने में समर्थ समझे जाते हैं।

बाइबिल के उत्तरार्ध तथा चर्च की शिक्षा के अनुसार शैतान प्रतीकात्मक शैली की कल्पना मात्र नहीं है; पतित देवदूतों का अस्तित्व असंदिग्ध है। दूसरी ओर वह निश्चित रूप से ईश्वर द्वारा एक सृष्ट सत्व मात्र है जो ईश्वर के मुक्तिविधान का विरोध करते हुए भी किसी भी तरह से ईश्वर के समकक्ष नहीं रखा जा सकता।

संदर्भ ग्रंथ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

  • डब्ल्यू. बौवर : ग्रीक इंग्लिश लेक्सिकोन ऑव दि न्यू टेस्टामेंट, शिकागो, 1963

इन्हें भी देखिये[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]