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इस विकि पर "अँग्रेजी साहित्य" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- [[श्रेणी:साहित्य]] ...२५५ बाइट (० शब्द) - १८:३१, १३ सितम्बर २०१४
- ...93 में [[बंगाली]] उपन्यास सम्बा के अनुवाद के लिए [[साहित्य अकादमी पुरस्कार|साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार]] से पुरस्कृत किया गया था।<ref name="ORM">{{cite web [[श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत]] ...५ KB (२०३ शब्द) - १५:००, ३ अक्टूबर २०२०
- ...ास ‘ए स्टार्ट इन लाइफ’ वर्ष १९८१ में प्रकाशित हुआ था। वर्ष १९९० में इन्हें साहित्य सेवा के लिए 'कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर' से सम्मानित किया गया था। [[श्रेणी:अँग्रेजी साहित्य]] ...४ KB (१९७ शब्द) - ०१:२५, १७ सितम्बर २०२०
- | कार्यक्षेत्र = हिन्दी साहित्य * [[उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ]] द्वारा साहित्य भूषण (1999) ...१२ KB (२७६ शब्द) - ०४:५५, ८ अगस्त २०२०
- ...्षा सेवा में चुन लिए गए और कलकत्ता, [[पटना]] तथा उत्कल में क्रमश: अँग्रेजी साहित्य व इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे। सबसे लंबा काल पटना में (1902-1917, 1923-1926 ...११ KB (६० शब्द) - १७:५५, १५ जून २०२०
- ...। उनके बहुत से उपन्यासों का अनुवाद अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में हो चुका है। साहित्य अकादमी में उर्दू सलाहकार बोर्ड की वे दो बार सदस्य भी रहीं। विजिटिंग प्रोफेस * [[१९६७|1967]] [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]], उपन्यास ‘आख़िरी शब के हमसफ़र’ के लिए ...१७ KB (२०६ शब्द) - १९:११, १६ अगस्त २०२१
- | subject = साहित्य ...ो चुकी थी। बंगाल के बाहर, राष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर उनका अभिनन्दन और उनके साहित्य में साक्षात्कार देश के लिए गौरवपूर्ण अनुभव प्रमाणित हुआ। ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार ...३४ KB (१,०९० शब्द) - ०४:०८, २७ अगस्त २०२०
- ...or1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantik ...or1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantik ...४० KB (५२७ शब्द) - १५:२५, २७ फ़रवरी २०२१
- ...A5%80_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%90%E0%A4%82 |title=हिन्दी साहित्य में स्थान बनाती जापानी विधाऐं |access-date=18 अप्रैल 2016 |archive-url=http ...१५ KB (६२६ शब्द) - २३:४३, १ सितम्बर २०२०
- ...र्मा 'उद्भ्रांत' हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि और साहित्यकार है, जिन्होंने साहित्य की गद्य-पद्य की सभी विधाओं पर प्रचुर मात्रा में कार्य किया है । उद्भ्रांत न ...विशेषांक है। इनकी रचना ‘लेकिन यह गीत नहीं’ को हिंदी अकादमी दिल्ली् द्वारा ‘साहित्यिक कृति सम्मान’ दिया गया। ‘स्वपयंप्रभा’ पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने ‘जय ...२५ KB (१८८ शब्द) - २३:५६, ८ नवम्बर २०२२
- ...हैं - इसमें लोककथाएँ, काव्य और भजन, उपदेश और नीतिकथाएँ आदि अनेक प्रकार के साहित्यिक रूप पाए जाते हैं। अध्ययन तथा व्याख्यान करते समय प्रत्येक अंश की अपनी शैली मनुष्य की कृति होने के कारण अन्य लौकिक साहित्य की तरह बाइबिल का अध्ययन किया जाना चाहिए; अत: ...४६ KB (९२ शब्द) - २१:०९, १० मई २०२१
- ...स्पेक्टर नियुक्त हुए। १८५८ ई. में मतभेद होने पर फिर त्यागपत्र दे दिया। फिर साहित्य तथा समाजसेवा में लगे। १८८० ई. में सी.आई.ई. का सम्मान मिला। ...ासागर, त्यागमूर्ति ईश्वरचंद्र ने अपने व्यक्तित्व और कार्यक्षमता से शिक्षा, साहित्य तथा समाज के क्षेत्रों में अमिट पदचिह्न छोड़े। ...३३ KB (४९३ शब्द) - २१:०३, २५ अगस्त २०२१
- ===आर्श वाङ्मय (समग्र साहित्य)=== ===क्रांतिधर्मी साहित्य=== ...४२ KB (६६२ शब्द) - १२:४६, १५ अगस्त २०२१
- ...नुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही य ...ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोन ...२९४ KB (१,६७९ शब्द) - १७:५०, १३ अगस्त २०२१
- ...or1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantik ...or1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantik ...२०७ KB (४,८९८ शब्द) - १०:२४, २२ अगस्त २०२१
- ...न भारतीय विज्ञान तथा तकनीक|विज्ञान]], [[भारतीय कला|कला]], [[भारतीय साहित्य|साहित्य]], [[भारतीय गणित|गणित]], [[खगोलशास्त्र]], [[प्राचीन प्रौद्योगिकी]], [[धर्म] ...ा है। कुछ लोग इसे भारतीय पारंपरिक मूल्यों का हनन भी मानते हैं। विज्ञान तथा साहित्य में अधिक प्रगति न कर पाने की वजह से भारतीय समाज यूरोपीय लोगों पर निर्भर होत ...१७० KB (५,३९६ शब्द) - १७:०६, १ अगस्त २०२६