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  • == आदिकालीन लौकिक साहित्य == [[हिंदी साहित्य]] के [[आदिकाल]] में लौकिक साहित्य विपुल मात्रा में रचा गया था। ...
    २ KB (० शब्द) - १८:०८, ३ मार्च २०२०
  • ...ृत्यु]]: संवत 1249 तदनुसार 1192 ई० [[ग़ज़नी|गज़नी]]) [[हिन्दी साहित्य]] के आदिकालीन [[कवि]] तथा [[पृथ्वीराज चौहान]] के मित्र थे। उन्होने [[पृथ्वीराज रासो]] न ...जो बातें होती थीं, सब में सम्मिलित रहते थे। पृथ्वीराज चौहान ने चंदबरदाई को केई बार लाख पसाव, करोड़ पसाव, अरब पसाव, देकर सम्मानित किया था, यहाँ तक कि मुहम ...
    ९ KB (३४ शब्द) - ००:०१, २७ अगस्त २०२१
  • ...''' कहा गया। इस काव्य की शृंगारी प्रवृत्तियों की पुरानी परंपरा के स्पष्ट संकेत [[संस्कृत]], [[प्राकृत]], [[अपभ्रंश]], [[फारसी]] और हिंदी के आदिकाव्य तथा ...युग में शृंगार की प्रधानता रही। यह युग मुक्तक-रचना का युग रहा। मुख्यतया [[कवित्त]], [[सवैये]] और [[दोहे]] इस युग में लिखे गए। ...
    १९ KB (९३ शब्द) - १६:५८, ८ अगस्त २०२१
  • ..., [[प्रयोगवादी युग]], नई कविता युग और [[साठोत्तरी हिन्दी साहित्य|साठोत्तरी कविता]] इन नामों से जाना गया, छायावाद से पहले के पद्य को [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र == भारतेंदु हरिश्चंद्र युग की कविता (1850-1900) == ...
    १७ KB (१४८ शब्द) - २३:१९, १९ मई २०२१
  • | विधा = कविता |publisher= [[इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र]] ...
    २४ KB (७९८ शब्द) - १७:४७, ३ मई २०२१
  • ...्ष की अवस्था में खुसरो के पिता का देहान्त हो गया। किशोरावस्था में उन्होंने कविता लिखना प्रारम्भ किया और २० वर्ष के होते होते वे कवि के रूप में प्रसिद्ध हो : ''गोरी सोये सेज पर, मुख पर डाले केश'' ...
    १८ KB (२५४ शब्द) - १४:३१, २३ जून २०२१
  • === आदिकाल (1250-1400) === ...हैं जो शैव सिद्धों द्वारा कश्मीरी भाषा के लोकग्राह्य उपयोग की ओर निश्चित संकेत करते हैं। ...
    २७ KB (९४५ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
  • ...}}</ref> इस प्रकार 200 कि॰मी॰ का सँकरा पहाड़ी रास्ता तय करके गंगा नदी [[ऋषिकेश]] होते हुए प्रथम बार मैदानों का स्पर्श [[हरिद्वार]] में करती हैं।<ref>{{Ci ...ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व सभ्यता-संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत, बल्कि समस्त संसार आलोकित हुआ। पाषाण या प्रस्तर युग का जन्म और विकास ...
    ९२ KB (१,८५८ शब्द) - ०१:४६, ९ अगस्त २०२१
  • ...इसका उल्लेख किया गया है। संस्कृत साहित्य में वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं। ...क मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं मुसलमान भी मनाते हैं। सबसे प्रामाणिक इतिहास की तस्वीरें हैं ...
    ६८ KB (१,६३८ शब्द) - २१:५४, २५ अगस्त २०२१