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इस विकि पर "जैन उत्सव" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- {{जैन धर्म}} ...जाता है। इस बारे में बहुत ही कम लोगों को विदित है। मान्यतानुसार [[दीपावली (जैन)|दीपावली]] को [[महावीर स्वामी]] का निर्वाण हुआ था। ...५ KB (२४७ शब्द) - ०३:३८, १५ जून २०२०
- ...[वाराणसी]] है। पहले केवल इसी को समर्पित संगीत समारोह हुआ करते थे जिसे चैता उत्सव कहा जाता था। आज यह संस्कृति लुप्त हो रही है, फिर भी चैती की लोकप्रियता संगी ...indi.org/snibandh/2008/chaiti.htm चैत मास का विशेष गीत '''चैती'''] - शांति जैन ...४ KB (१३० शब्द) - १७:२१, २० सितम्बर २०२०
- |अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], [[जैन धर्म|जैन]] |उत्सव = ...११ KB (८७ शब्द) - २१:०३, २५ अगस्त २०२०
- [[जैन धर्म]] के दिगम्बर अनुयायियों द्वारा आदर्श अवस्था में अपनाये जाने वाले गुणों जैन ग्रन्थ, [[तत्त्वार्थ सूत्र]] में १० धर्मों का वर्णन है। यह १० धर्म है: ...२१ KB (१५३ शब्द) - १५:५५, २ अक्टूबर २०२०
- ...०० से ५०० ईसा में लिपिबद्ध किया गया था। [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] और [[जैन धर्म|जैन]] ग्रंथों और कई तांत्रिक ग्रंथों, विशेष रूप से [[कालिका पुराण]] (१० वीं शता परम्परागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि उत्सव के [[षष्ठी]] को उनकी पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन '[[आज्ञा चक्र]]' मे ...१२ KB (५५ शब्द) - १८:२६, २१ जुलाई २०२१
- ...'' मनाते हैं। [[श्वेताम्बर]] संप्रदाय के पर्यूषण 8 दिन चलते हैं। ८ वें दिन जैन धर्म के लोगो का महत्वपूर्ण त्यौहार संवतसरी महापर्व मनाया जाता है। इस दिन यथ जैन धर्म के दस लक्षण होते है। जैन धर्म के दस लक्षण इस प्रकार है:- ...२५ KB (५९ शब्द) - १३:१७, ३ अक्टूबर २०२०
- |उत्सव = [[आगम (जैन)|जैन आगम]] में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। [[महावीर|भगवान ...१५ KB (१२४ शब्द) - ०८:५४, १६ मई २०२१
- ...संप्रदायों, शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, सोर, बौद्ध, (विशेषकर वज्रयान) एवं जैन आदि धार्मिक संप्रदायों में अपनी अपनी धारणाओं के अनुसार प्रतिमा में देवों एव ...्षिण भारत में इन चला प्रतिमाओं के चार विशेष वर्ग उल्लेखनीय हैं, कौतिक बेर, उत्सव बेर, बलिबेर, तथा स्नपन बेर (बेर का अर्थ प्रतिमा है)। अचला प्रतिमाओं को आगमो ...२० KB (२२ शब्द) - ०९:१५, ६ मई २०२१
- । उसी प्रकार का नवरात्र उत्सव मिस्र में भी होता है। जिस तरह पूजन में यहां .सरस्वती हिन्दू और जैन दोनों ही सरस्वती को वाग्देवी मानते हैं। प्राचीन ...३८ KB (८९ शब्द) - १४:०९, १४ नवम्बर २०२०
- | type = हिन्दु, बुद्ध, जैन == जैन धर्म<ref>{{Cite web|url=http://www.ijarch.org/Admin/Articles/5-Sarasvati%20 ...५३ KB (८८४ शब्द) - १६:४०, ९ अगस्त २०२१
- |अनुयायी = [[हिन्दू]], [[सिख]], [[जैन]] और [[बौद्ध]] <ref>Charles M Townsend, The Oxford Handbook of Sikh Studies |उद्देश्य = धार्मिक निष्ठा, उत्सव ...९९ KB (३,००७ शब्द) - १४:४५, २१ जून २०२१
- ...मा|first=उषा|title=Festivals In Indian Society|trans-title=भारतीय समाज में उत्सव|publisher=मित्तल पब्लिकेशन्स|year=2008|volume=2|chapter=Mahalaya (महालय)|ur ...पूर्वकर्मानुसार निर्धारित होता है। पुनर्जन्म में विश्वास हिंदू, बौद्ध तथा जैन तीनों चिंतनप्रणलियों में पाया जाता है। हिंदू दर्शन की चार्वाक पद्धति इस दिश ...२२ KB (१६२ शब्द) - २१:०४, २० सितम्बर २०२०
- |अनुयायी = [[हिंदू धर्म]] व [[जैन धर्म]] |उत्सव = राखी बाँधना, उपहार, भोज ...६५ KB (१,४३० शब्द) - १८:११, २३ अगस्त २०२१
- |उत्सव = ...त्यु की गोद में उन्हें भी सोना पड़ा। चाहे भगवान राम हों, कृष्ण हों, बुध और जैन सभी को निश्चित समय पर पृथ्वी लोक आ त्याग करना पड़ता है। मृत्युपरान्त क्या ह ...३२ KB (३३ शब्द) - ११:३९, १५ जुलाई २०२०
- ...प्राप्त हुआ जिन्होंने फिर उन्हें लिपिबद्ध किया। [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] और [[जैन धर्म|धर्मों]] के अलग हो जाने के बाद वैदिक धर्म में काफ़ी परिवर्तन आया। नये ...वर के प्रतीक के रूप में स्थापित की जाती थी। एक नज़रिये के मुताबिक बौद्ध और जैन धर्मों द्वारा बुद्ध और महावीर की मूर्तियों और मन्दिरों द्वारा पूजा करने की ...६८ KB (९७८ शब्द) - १७:५८, २० अगस्त २०२१