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देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)
  • ...हित्य के एक प्रमुख कवि, आलोचक, कहानीलेखक एवम दार्शनिक हैं। '''भुखी पीढी''' आन्दोलन के प्रथम मेनिफेस्टो घोषणाकारीयों में वह प्रधान थे। '''हवा ४९''' साहित्यपत्र * '''हंगरी, श्रुति एवम शास्त्रविरोधी आन्दोलन''' (१९८६)। डक्टर उत्तम दाश, महादिगन्त पबलिशर्स, कोलकाता ७०० १४४। ...
    ६ KB (६६ शब्द) - २३:५६, १५ जून २०२०
  • ...सितम्बर 1887 - 12 जून 1976) [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के विद्वान और महान [[दार्शनिक]] थे। १९१४ में पुस्तकालयाध्यक्ष से आरम्भ करते हुए वे १९२३ से १९३७ तक [[वारा उन्नीसवीं शती के धार्मिक पुनर्जागरण और बीसवीं शती के स्वातन्त्र्य-आन्दोलन से अनुप्राणित उनकी जीवन-गाथा में युगचेतना साकार हो उठी है। प्राचीनता के सम् ...
    ७ KB (६६ शब्द) - ०१:०२, १५ जून २०२०
  • ...ग्रहण कर रहे थे कि [[महात्मा गांधी|महात्मा गाँधी]] जी ने उसी समय [[असहयोग आन्दोलन]] आरम्भ कर दिया और दादा धर्माधिकारी ने १९२० में विद्यालय छोड़ दिया। उन्होंन [[श्रेणी:दार्शनिक]] ...
    ७ KB (२०३ शब्द) - ०९:०५, २९ अगस्त २०२०
  • ...बर १९६१ को एक मेनिफेस्टो (घोषणापत्र) के जरिये आन्दोलन की घोषणा की। बाद में आन्दोलन में योगदान देनेवाले कवि, लेखक एवं चित्रकार थे [[उत्पलकुमार बसु|उतपलकुमार बस ...उनका कहना है कि यह आन्दोलन भारत के उत्तर-उपनिवेशबादी समाज का प्रतिफलन है। आन्दोलन के कवि एवं लेखक भाषा में अनुप्रबेश किये हुये उपनिबेशिय मनन-चिन्तन को झकझोर ...
    २६ KB (१२१ शब्द) - १०:१४, ६ मई २०२१
  • राष्ट्रीय आन्दोलन में लगे हुए विद्यार्थियों को शैक्षिक सुविधाएं प्रदान करने हेतु [[कोलकाता|कल १९०८ ई में राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेने के कारण अरविन्द गिरफ्तार हुए व जेल में रहे। उन पर मुकदमा चलाया ...
    २६ KB (९३ शब्द) - ०३:२५, ६ मार्च २०२०
  • ...क आचार्यांने [[भाष्य]] भी लिखे हैं। ब्रह्मसूत्र में [[उपनिषद|उपनिषदों]] की दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विचारों को साररूप में एकीकृत किया गया है। ...कठिन है। वेदान्त सूत्र 'समन्वय' के सिद्धांत का सहारा लेकर उपनिषदों में एक दार्शनिक दृष्टि का प्रतिपादन करता है। पर ये सूत्र स्वयं इतने संक्षिप्त है कि बिना व् ...
    २३ KB (१,३४२ शब्द) - ०७:५१, २६ अगस्त २०२१
  • ...दोलन [[भूखी पीढ़ी|भूखी पीढ़ी (हंगरी जनरेशन)]] के जन्मदाता माने जाते है। इस आन्दोलन ने [[बाङ्ला भाषा|बांग्ला]] साहित्य को एक नयी दिशा दी और पूरे भारत में उथलपु आन्दोलन के सिलसिले में मलय को उनहे कविता लिखने के कारण कारावास का दण्ड मिला था। वे ...
    २४ KB (२६१ शब्द) - १५:५१, १५ जून २०२०
  • |आन्दोलन = [[भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] ...र्जी''' (जतीन्द्रनाथ मुखोपाध्याय) था। वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कार्यकारी दार्शनिक क्रान्तिकारी थे। वे [[युगान्तर पार्टी]] के मुख्य नेता थे। युगान्तर पार्टी [ ...
    १५ KB (४५६ शब्द) - १४:४७, २४ अगस्त २०२०
  • ...]] की [[भक्ति]] का प्रचार-प्रसार किया गया। [[सिख धर्म]] के उद्भव में भक्ति आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। <ref> Johar, Surinder (1999). Guru Gobin ...रूप ग्रहण कर लिया। किन्तु यह धारा दक्षिण भारत से उत्तर भारत कैसे आई, उसके आन्दोलनात्मक रूप धारण करने के कौन से कारण रहे, इस पर विद्वानों में पर्याप्त मतभेद ह ...
    ४३ KB (१६० शब्द) - १०:०३, १४ जुलाई २०२१
  • ...ंग्ला]]: শ্রী অরবিন্দ, [[जन्म]]: १८७२, [[मृत्यु]]: १९५०) एक [[योगी]] एवं [[दार्शनिक]] थे। वे १५ अगस्त १८७२ को [[कोलकाता|कलकत्ता]] में जन्मे थे। इनके पिता एक डा ...में आ गये। उन्होंने [[किशोरगंज]] (वर्तमान में बंगलादेश में) में [[स्वदेशी आन्दोलन]] प्रारम्भ कर दिया। अब वे केवल धोती, कुर्ता और चादर ही पहनते थे। उसके बाद उ ...
    २२ KB (६९४ शब्द) - १२:४९, १५ अगस्त २०२१
  • प्रयोजनवाद एक नवीनतम् दार्शनिक विचारधारा है। वर्तमान युग में [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] एवं [[शिक्षा]] के विभि ...नव-मस्तिष्क में अति प्राचीन काल में ही हो गया था। यथार्थवाद किसी एक सुगठित दार्शनिक विचारधारा का नाम न होकर उन सभी विचारों का प्रतिनिधित्व करता है जो यह मानते ...
    ४९ KB (४४८ शब्द) - २२:२५, १५ जून २०२०
  • ...ortrait Gandhi.jpg|right|thumb|200px|[[महात्मा गाँधी|गाँधीजी]] महान शिक्षा-दार्शनिक भी थे।]] ...का हित सम्पादित हुआ है। शैक्षिक समस्या के प्रत्येक क्षेत्र में उस विषय के दार्शनिक आधार की आवश्यकता अनुभव की जाती है। [[जोहान्न गोत्त्लिएब फिचते|फिहते]] अपनी ...
    ५० KB (३२० शब्द) - ०८:२५, ११ जून २०२१
  • ...्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] भाषाओं में पुस्तकों का प्रकाशन किया। विख्यात ऋषि और दार्शनिक [[राम स्वरूप]] उनके गुरु और सहयोगी थे। १९४० के दशक में उनका झुकाव [[मार्क्स ...] आश्रम के लिये काम करते थे। [[आर्य समाज]], हरिजन एवं [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|भारत का स्वतंत्रता संग्राम]] के लिये उनके जुड़ाव के कारण तथा [[महात्मा गांध ...
    ११ KB (५२५ शब्द) - १०:३०, ६ मई २०२१
  • ...िको, दालों, मोरो, आर्प, ब्रेतों, मासं आदि प्रधान हैं। कला में इस सृष्टि का दार्शनिक निरूपण 1924 में [[आंद्रे ब्रेतों]] ने अपनी अतियथार्थवादी घोषणा (सर्रियलिस्ट [[श्रेणी:कला के आन्दोलन|अतियथार्थवाद]] ...
    १६ KB (४९१ शब्द) - ०१:३१, ३ अक्टूबर २०२०
  • ...के लिए किया गया था? या लोगों की सेवा और उनके दोस्त, गाइड किया जा रहा है और दार्शनिक के लिए अपना जीवन devoting एक सामाजिक सेवक बनाने के लिए अपने उद्देश्य था? यह === द्वितीय काण्ड: धम्म दीक्षाओं का आन्दोलन === ...
    २८ KB (४२८ शब्द) - १७:०७, ५ अप्रैल २०२१
  • ...्बर २५, १९७२) [[भारत]] के [[अधिवक्ता|वकील]], [[लेखक]], [[राजनीति]]ज्ञ और [[दार्शनिक]] थे। वे राजाजी नाम से भी जाने जाते हैं। वे स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्न ...र्यकारिणी की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद 1942 में '[[भारत छोड़ो आन्दोलन]] प्रारम्भ हुआ, तब भी वह अन्य कांग्रेसी नेताओं के साथ गिरफ्तार होकर जेल नही ...
    १६ KB (२१२ शब्द) - ०३:२९, २२ जनवरी २०२१
  • '''प्रकृतिवाद''' (Naturalism) पाश्चात्य दार्शनिक चिन्तन की वह विचारधारा है जो [[प्रकृति]] को मूल तत्त्व मानती है, इसी को इस यूनानी दार्शनिक [[थेल्स]] (६४० ईसापूर्व-५५० इसापूर्व) का नाम सबसे पहले प्रकृतिवादियों में आ ...
    ४८ KB (२३ शब्द) - १७:३९, १६ अप्रैल २०२१
  • ...र्थक हैं। किन्तु यह आदर्शवादी दृष्टिकोण समय-समय पर अनेक और विविध प्रकार के दार्शनिक विचारों से प्रभावित हुआ है। ...में आदर्शवादी और कार्य की योजना तथा पद्धति में प्रयोजनवादी है-- एक शिक्षा दार्शनिक के रूप में गांधी जी की महत्ता इस तथ्य में है कि उनके दर्शन में प्रकृतिवादी, ...
    ४२ KB (११९ शब्द) - १४:४९, १५ जून २०२०
  • ...ा किया जा सके। उनका व्यक्तित्व एक साधु पुरुष, [[आध्यात्म]] विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। ...धि]] स्थिति को प्राप्त राष्ट्र देवता के पुजारी को बेहोश होना स्वीकृत था पर आन्दोलन के दौरान उनने झण्डा छोड़ा नहीं जबकि, फिरंगी उन्हें पीटते रहे, झण्डा छीनने क ...
    ४२ KB (६६२ शब्द) - १२:४६, १५ अगस्त २०२१
  • ...' ([[लैटिन]] भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है ['''2''' ], कुछ नहीं), एक [[दार्शनिक]] सिद्धांत है जो [[जीवन]] के एक या अधिक [[अर्थपूर्ण]] पहलुओं को [[नकारता]] ...ला जाना चाहिए. उदाहरण के लिए, ब्रेट डब्ल्यू डेविस लिखते हैं, "नास्तिवाद के दार्शनिक विकास के विचार को शुरू करने के आमतौर पर फ्रेडरिक जैकोबी को जिम्मेदार माना ज ...
    ८७ KB (१,६६४ शब्द) - १५:५२, २ जनवरी २०२१
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