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इस विकि पर "प्रेम दर्शन" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...ा' का सरल दांपत्य प्रेम तथा पहाड़ की रमणी 'लछमा' का महादेवी के प्रति अनुपम प्रेम, यह सब प्रसंग महादेवी के चित्रण की अकूत क्षमता का परिचय देते हैं।<ref>{{cit ...४ KB (५२ शब्द) - १४:०८, २३ जून २०२१
- ;असरन सरन करन सुख दुःख हर महा प्रेम घन आनन्ददाई।। उक्त तीनों ग्रंथों में [[राधा]]-[[कृष्ण]] की प्रेम -लीलाओं का वर्णन करते समय रूपरसिक जी ने अपने उपास्य ,उपासना तथा उपासक भाव क ...६ KB (५० शब्द) - ११:४०, ६ मई २०२१
- [[श्रेणी:प्रेम दर्शन]] ...३ KB (२ शब्द) - १२:५७, २१ जुलाई २०२०
- | genre = [[नाटक|नाट्य]], [[काव्य| कविता]], [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]], [[इतिहास]], [[कथा]], [[भाषा-संस्कृति]]] [[जीवनचरित|जीवनी]] और [[काव्य|कव # [https://books.google.co.in/books?id=VBV7AgAAQBAJ युद्ध और प्रेम] (लंबी कविता) ...१० KB (४२३ शब्द) - ०६:४३, १६ जून २०२०
- ...्मा के आभ्यंतर जीवन का साझी बन सकता है। इस प्रकार ईश्वर का वास्तविक स्वरूप प्रेम ही है। मनुष्य की दृष्टि से वह दयालु पिता है जिसके प्रति प्रेमपूर्ण आत्मसमर् ...फलस्वरूप ईसाई तत्वज्ञ प्राय: [[प्लेटो|अफलातून]] अथवा [[अरस्तु|अरस्तू]] के दर्शन का सहारा लेकर [[आस्तिकता|ईश्वरवाद]] का प्रतिपादन करते हैं। ईश्वर का अस्तित् ...९ KB (१९ शब्द) - ०८:१५, ४ मार्च २०२०
- ...अनेक वर्षों से अर्जेन्टीना में [[हिंदी]] एवं [[संस्कृत]] भाषा तथा [[भारतीय दर्शन]] एवं संस्कृति के विषय में अनेक पाठ्यक्रम आयोजित करती रहीं हैं।<ref>{{cite ...४ KB (२८२ शब्द) - ०८:३६, ७ अक्टूबर २०२०
- [[बौद्ध धर्म ]] के बज्रयान सम्प्रदाय के [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] से सम्बन्धित एक शब्द है। ...े 'कालचक्रयान' नाम से भी जाना जाता है। कालचक्र अभिषेक द्वारा शांति, करुणा, प्रेम और अहिंसा की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। प्रसिद्ध ति ...४ KB (९५ शब्द) - १२:०३, २८ अगस्त २०२०
- ...धर्म में विशेषकर [[वैष्णव सम्प्रदाय]] में प्रमुख देवी हैं। वह [[कृष्ण]] की प्रेमिका और संगी के रूप में चित्रित की जाती हैं। इस प्रकार उन्हें [[राधा कृष्ण]] ...जोडी आज के नवयुगलों को उत्साहित करते है और राधा और कृष्ण के प्रेम गाथा से प्रेम मे समर्पित होने की प्रेरणा प्रदान करते है। ...१० KB (११६ शब्द) - १५:०७, २७ अगस्त २०२१
- ...ि रूप, उसका चीनी और जापानी परिवर्तित रूप, विशेष रूप से जेन सम्प्रदाय) चीनी दर्शन और प्राच्य-संस्कृति। यह भी कहा जा सकता है कि एक "हाइकु" में इन सब विचार-धार ...ा प्रदान की। हाइकु मात्सुओ बाशो के हाथों संवरकर १७ वीं शताब्दी में जीवन के दर्शन से जुड़ कर जापानी कविता की युगधारा के रूप में प्रस्फुटित हुआ। आज हाइकु जापा ...६ KB (६४ शब्द) - १७:४२, २४ अगस्त २०२१
- ...ावन-वैभव इनके हृदय में स्वतः स्फुरित हो उठा। वृन्दावन माधुरी के प्रत्यक्ष दर्शन करने के उपरान्त इनकी वाणी में एक प्रकार की मोहकता आ गई और राधा-वल्लभ की नि विविध आभूषणों से भूषित रसिक शिरोमणि श्रीकृष्ण का सौन्दर्य भी अपूर्व अथच दर्शनीय है: ...१० KB (१०७ शब्द) - ११:४४, ६ मई २०२१
- श्रीभट्ट जी के उपास्य वृन्दाविपिन विलासी [[राधा]] और [[कृष्ण]] हैं। ये सदा प्रेम में मत्त हो विविध कुंजों में अपनी लीलाओं का प्रसार करते हैं। भट्ट जी की यह ...ो मधुर रस की अनुभूति हो जाती है। अतः भट्ट जी सदा राधा-कृष्ण के इस विहार के दर्शन करना चाहते हैं और यही उनकी उपासना है। वे कहते हैं : ...८ KB (१४६ शब्द) - १०:५७, ६ मई २०२१
- ...और [[सिद्धान्त (थिअरी)|सिद्धान्तों]], और उनके कारणों की विवेचना करता है। [[दर्शन]] [[यथार्थ]] की परख के लिये एक [[दृष्टिकोण]] है। दार्शनिक चिन्तन मूलतः जीवन ...पर अपने-अपने अनुभवों एवं परिस्थितियों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के जीवन-दर्शन को अपनाया। ...२३ KB (१०८ शब्द) - ००:३०, १२ अगस्त २०२१
- ...्गुणों की उपेक्षा करके विषयोपभोग को ही प्रधानता देने लगे। आधुनिक पाश्चात्य दर्शन में जान लाक (1632-1704), डेविड ह्यूम (1711-1776), बेंथम (1739-1832) तथा जान [[भारत]] में [[चार्वाक दर्शन]] ने परलोक, ईश्वर आदि का खंडन करते हुए इस संसार में ही उपलब्ध आनंद के पूर्ण ...१५ KB (१२९ शब्द) - ०७:११, १६ जून २०२०
- चतुर्भुजदास के आराध्य नन्दनन्दन श्रीकृष्ण हैं। रूप, गुण और प्रेम सभी दृष्टियों से ये भक्त का मनोरंजन करने वाले हैं। इनकी रमणीयता भी विचित्र ...छवि को देखकर गोपियों का तन मन सभी कुछ पराया हो जाता है वे सदा श्रीकृष्ण के दर्शन करना चाहती हैं। इसी से उनके मन का संताप दूर होता है। श्रीकृष्ण से वे लोक- ...७ KB (१७३ शब्द) - ११:३४, ६ मई २०२१
- नहीं प्रेम नहिं द्वेष वहाँ विपरीत भाव जो धारे॥ '''जैन धर्म''' [[भारत]] की श्रमण परम्परा से निकला [[धर्म]] और [[दर्शन]] है । ...५ KB (३९ शब्द) - ०७:१०, २९ अक्टूबर २०१३
- ...विनोद खन्ना) से शादी की है। लेकिन शादी के बाद भी भगवान कृष्ण के प्रति उनका प्रेम बना रहता है और वह अपने आदर्शों और जीवन जीने के तरीके का पालन करती हैं जो भो |"ऐरी मैं तो प्रेम दीवानी" || वाणी जयराम ...१२ KB (१२२ शब्द) - १६:०९, १० जून २०२०
- | era = बीसवीं सदी का दर्शन | region = पाश्चात्य दर्शन ...१६ KB (१२२ शब्द) - २०:४६, १४ जून २०२१
- ...शती के अन्त से लेकर वर्तमान समय तक के [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] को '''समकालीन दर्शन''' (Contemporary philosophy) कहते हैं। ...तो अमेरिका, इंग्लैंड एव रूस में व्यपक रूप से विकसित हो चुकी थी। [[हीगेलीय दर्शन]] में ज्ञानोपलब्धि के लिए तर्क को सर्वोपरि स्थान दिया गया। वास्तविकता तर्कस ...३५ KB (१०८ शब्द) - २३:५३, १५ जून २०२०
- ...व के द्वारा सिद्धान्तों का निरूपण करता है और व्यक्तिगत अनुभूति व्यापक जीवन दर्शन की ओर उन्मुख होती है।<ref>डॉ॰ प्रेमशंकर, ''प्रसाद का काव्य'', राधाकृष्ण प्र ...अंत में ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित जो कविताएँ संकलित हैं, वे प्रसाद के जीवन दर्शन, देशप्रेम, सामयिक स्थिति, अन्तर्द्वन्द्व तथा नियतिबोध की कविताएँ हैं।"<ref> ...११ KB (८९ शब्द) - १८:१८, ८ अगस्त २०२१
- ...िसपर सर्वोदय का विशाल प्रासाद खड़ा है।''' ([[दादा धर्माधिकारी]] - "सर्वोदय दर्शन") == सर्वोदय दर्शन == ...१७ KB (४५ शब्द) - १७:३०, १८ मार्च २०२१