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- ...]" तथा "[[उज्ज्वलनीलमणि]]", जिसमें [[कामशास्त्र]] की परंपराओं का रिक्थ है, वैष्णव रसशास्त्र के मौलिक और उपजीव्य ग्रंथ हैं। ...६ KB (६ शब्द) - ०२:३२, ३ मार्च २०२०
- ...प्रदाय आते हैं। मान्यता अनुसार पौराणिक काल में विभिन्न देवी-देवताओं द्वारा वैष्णव महामंत्र दीक्षा परंपरा से इन संप्रदायों का प्रवर्तन हुआ है। वर्तमान में ये मध्यकालीन वैष्णव आचार्यों ने भक्ति के लिए सभी वर्ण और जाति के लिए मार्ग खोला, ...७ KB (१३७ शब्द) - १३:३३, १६ जून २०२१
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- 'स्वयं भगवान' शब्द का प्रयोग प्रायः [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय|गौडीय वैष्णव सम्प्रदाय]] के लोग अधिक करते हैं। ...९८९ बाइट (६ शब्द) - ०४:५४, ३ मार्च २०२०
- ..., जिसके रचयिता रघुनंदन भट्टाचार्य। जो ११ वैदिक उपनिषद में से नहीं है।जिसे वैष्णव लोग 'महामन्त्र' कहते हैं। १५वीं शताब्दी में [[चैतन्य महाप्रभु]] के भक्ति आन गौड़ीय वैष्णव परम्परा एवं 'अन्तर्राष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ' के संस्थापकाचार्य श्री ...२ KB (१८ शब्द) - १९:२९, १० जून २०२१
- ...[[असमिया भाषा|असमिया]] : ''একশৰণ ধৰ্ম'') [[शंकरदेव]] के [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव संप्रदाय]] का एक पन्थ है। इसे '''नववैष्णव धर्म''' भी कहते हैं। इस [[धर्म]] ...२ KB (१६ शब्द) - ०९:५७, ६ मई २०२१
- '''बल्देव विद्याभूषण''' गौणीय वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध आचार्य थे। इनका समय सं. 1750 से सं. 1840 के मध्य है। ...रदाय के विरुद्ध यह कहकर भड़का दिया गया कि यह मत अवैदिक था। इस पर जयपुर में वैष्णव समाज बुलाया गया। इन्होंने स्वसंप्रदाय तथा परकीयावाद को वेदानुकूल प्रतिपादित ...३ KB (१९ शब्द) - १२:०६, १५ जून २०२०
- ...प्रदाय आते हैं। मान्यता अनुसार पौराणिक काल में विभिन्न देवी-देवताओं द्वारा वैष्णव महामंत्र दीक्षा परंपरा से इन संप्रदायों का प्रवर्तन हुआ है। वर्तमान में ये मध्यकालीन वैष्णव आचार्यों ने भक्ति के लिए सभी वर्ण और जाति के लिए मार्ग खोला, ...७ KB (१३७ शब्द) - १३:३३, १६ जून २०२१
- शैवाश्च वैष्णवाश्चैव शाक्ताः सौरास्तथैव च | *(२) [[वैष्णव सम्प्रदाय]] ...३ KB (६ शब्द) - ०९:२४, २२ जून २०२१
- ...ी कंब रामायण को केवल वैष्णव संप्रदाय का ग्रंथ नहीं मानते। इसीलिए शैवों तथा वैष्णवों में कंब रामायण का समान आदर हुआ और दोनों संप्रदायों के पारस्परिक वैमनस्य क ...५ KB (१० शब्द) - १९:२७, ५ जुलाई २०१६
- ...द्|उपनिषद]] है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता मध्यकालीन वैष्णव कवि है ( ५०० वर्ष पूर्व ) परन्तु मुख्यत [[वेदव्यास]] जी को कई उपनिषदों का | author = वैष्णव कवि ...८ KB (२८८ शब्द) - १०:२७, १६ जून २०२०
- ...]" तथा "[[उज्ज्वलनीलमणि]]", जिसमें [[कामशास्त्र]] की परंपराओं का रिक्थ है, वैष्णव रसशास्त्र के मौलिक और उपजीव्य ग्रंथ हैं। ...६ KB (६ शब्द) - ०२:३२, ३ मार्च २०२०
- ...रों के नाम एवं क्रम में धर्म-शास्त्रीय ग्रंथों में अंतर मिलता है। प्रख्यात वैष्णव ग्रंथ [[भागवत पुराण|श्रीमद्भागवत महापुराण]] में ही भगवान् विष्णु के 22 अवता ...३ KB (२३ शब्द) - १८:१९, २४ जनवरी २०१८
- ...लकित मन से मडंलाकार स्थिति होकर उनके साथ रासलीला प्रारंभ की। इस रासलीला को वैष्णव भक्त दिव्य क्रीड़ा मानते हैं और इसका आध्यात्मिक अर्थ प्रस्तुत करते हैं। श्र ...में बहुत माना जाता है। इसकी कथा कहने की भी परिपाटी पड़ गई है। संक्षेप में, वैष्णव भक्ति के समर्पण भाव को स्थापित करनेवाला यह प्रधान प्रसंग है जो भागवत पुराण ...७ KB (८ शब्द) - १०:१९, ६ मई २०२१
- ...य महाप्रभु'''(1486-1533) भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। इन्होंने वैष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखी। भजन गायकी की एक नयी शैली को जन्म दिया ...ंग, गौर हरि, गौर सुंदर आदि भी कहते थे। चैतन्य महाप्रभु के द्वारा [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय]] की आधारशिला रखी गई। उनके द्वारा प्रारंभ किए गए महामंत्र नाम संकी ...३ KB (८ शब्द) - १०:४७, १५ जुलाई २०१४
- ...है। वैदिक धर्म में उपास्य देवता की भिन्नता के कारण इसके तीन प्रकार है: '''वैष्णव आगम''' ([[पंचरात्र]] तथा [[वैखानस]] आगम), '''शैव आगम''' (पाशुपत, शैवसिद्धां वैदिक धर्म में उपास्य देवता की भिन्नता के कारण इसके तीन प्रकार है: '''वैष्णव आगम''' (पाँचरात्र तथा वैखानस आगम), '''शैव आगम''' (पाशुपत, शैवसिद्धांत, त्रि ...८ KB (५८ शब्द) - ०७:०२, १६ जून २०२०
- ...ने भतीजे कल्याणराव को सौपकर गुरुआज्ञा से अपनी सबसे छोटी रानी सीताजी के साथ वैष्णव-धर्म प्रचार-यात्रा पर निकल पडे। [[श्रेणी:वैष्णव]] ...९ KB (७० शब्द) - २१:२७, ७ अगस्त २०२१
- ...'कापालिक' कहलाए। इससे तथा बहुत सी अन्य कथाओं के द्वारा [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव संप्रदाय]] से कापालिक या शैव संप्रदाय का विरोध लक्षित होता है। वैसे, डॉ॰ भं ...८ KB (२० शब्द) - ००:२८, १२ मार्च २०२०
- ...था,जिससे पता चलता है कि वैष्णव आगम का भी अति विशाल साहित्य है। परंतु यहाँ वैष्णव तंत्र के विषय में कुछ विस्तृत आलोचना न कर शैव और शाक्त आगमों की आलोचना ही प *[[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] – [[वैखानस]], [[पंचरात्र|पञ्चरात्र]], [[कृष्ण]] और [[राम]] की [[भक्ति]]-स ...१९ KB (२८० शब्द) - १८:०३, २० जून २०२१
- ...ल और श्री कुल।कुछ अन्य शाक्त, भगवती [[दुर्गा]] को ही आदि शक्ति मानते है। [[वैष्णव संप्रदाय]] वाले भगवती को राधा मान कर पूजते है, जबकि [[शैव]] संप्रदा माता [[ ...३ KB (२३ शब्द) - ०१:०३, २२ अगस्त २०२१
- ...संप्रदाय]] के प्रवर्तक थे। इन्हें [[ललिता सखी]] का अवतार माना जाता है। वे वैष्णव भक्त थे तथा उच्च कोटि के संगीतज्ञ भी थे। वे प्राचीन शास्त्रीय संगीत के अद्भ ...४ KB (१८ शब्द) - १३:१०, २९ मई २०२१
- ...7 मई 1937, [[मृत्यु]]: 22 मई 2007) श्री [[रामानुज]]ाचार्य द्वारा स्थापित [[वैष्णव सम्प्रदाय]] के एक प्रख्यात हिन्दू सन्त थे जिन्हें तपोबल से असंख्य सिद्धियाँ ...ारे समस्त जगद्गुरुओं, पीठाधीश्वरों, त्रिदण्डी स्वामियों, आचार्यो तथा समस्त वैष्णव समुदाय के समक्ष उन्हें जगद्गुरु रामानुजाचार्य के पद पर विभूषित कर, इस पद की ...१४ KB (६३ शब्द) - ०१:१०, १६ जून २०२०
- |प्रमुख [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] संत, प्रारंभिक उपस्थिति में सहायक और [[हरे कृष्ण]] का प्रसार ...१० KB (९५० शब्द) - ०७:५७, १६ जून २०२०