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- ''पन्थ/सम्प्रदाय के अर्थ में धर्म के लिए [[धर्म (पंथ)]] देखें। ...प्रदाय [[हिंदू]], [[बौद्ध]], [[ईसाई]], [[इस्लाम]] आदि धर्मों में मौजूद है। सम्प्रदाय के अन्तर्गत [[गुरु]]-शिष्य परम्परा चलती है जो गुरु द्वारा प्रतिपादित परम्पर ...३ KB (६ शब्द) - ०९:२४, २२ जून २०२१
- ...्मांड से भी परे एक सर्वोच शक्ति के रूप में माना जाता है। [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त संप्रदा]] के अनुसार यह शक्ति मूल रूप में निर्गुण है, परंतु निराकार परमेश्वर ...क्ति के रूप में पुजा जाता है जिसमे दो कुल है काली कुल और श्री कुल।कुछ अन्य शाक्त, भगवती [[दुर्गा]] को ही आदि शक्ति मानते है। [[वैष्णव संप्रदाय]] वाले भगवती ...३ KB (२३ शब्द) - ०१:०३, २२ अगस्त २०२१
- ...व को सर्वोच्च इश्वर माना जाता है। [[शैवसिद्धान्त|शैव सिद्धांत]], [[शैव|शैव सम्प्रदाय]] के 6 मुख्य विचारधारा विद्यालयों में से एक है। शैव सिद्धांत के अनुसार [[शि ...६ KB (१२४ शब्द) - ०१:५६, ४ अक्टूबर २०२०
- यह अष्टगन्ध शैव सम्प्रदाय वालों को ही प्रिय होती है। यह अष्टगन्ध शाक्त व शैव दोनों सम्प्रदाय वालों को प्रिय है। ...४ KB (१७ शब्द) - २२:३२, २ मार्च २०२०
- ...े रूप में कही गई है, जिसकी उपासना की जाती है। इसके उपासक [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] कहे जाते हैं। यह शक्ति भी सृष्टि की रचना करनेवाली और पूर्ण सामर्थ्यसंपन्न ...७ KB (१९ शब्द) - ०९:३०, १३ अप्रैल २०२१
- [[श्रेणी:शाक्त सम्प्रदाय]] ...४ KB (५३ शब्द) - २१:५३, ९ अगस्त २०२०
- ...त्य है। परंतु यहाँ वैष्णव तंत्र के विषय में कुछ विस्तृत आलोचना न कर शैव और शाक्त आगमों की आलोचना ही प्रस्तुत है। *[[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] – [[काली]] परम्परा ([[Shaktism#Kalikula: family of Kali|Kālī]], Kālī Viṣṇ ...१९ KB (२८० शब्द) - १८:०३, २० जून २०२१
- ..., दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं। [[महाभारत]] में माहेश्वरों (शैव) के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं: (i) शैव (ii) [[पाशुपत]] (iii) कालदमन (iv) [[कापालिक]]। शैवमत (9) [[कापालिक]] संप्रदाय के ईष्ट देव [[भैरव]] थे, इस सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र 'शैल' नामक स्थान था। ...१० KB (९७ शब्द) - १४:१९, ११ अगस्त २०२१
- ...न धर्म में [[विष्णु]], [[शिव]] और [[शक्ति]] को समान माना गया और तीनों ही [[सम्प्रदाय]] के समर्थक इस [[धर्म]] को मानने लगे। सनातन धर्म का सारा [[साहित्य]] [[वेद] ...१६ KB (३९५ शब्द) - ०८:२८, ९ जून २०२१
- ...-kaalratri/|archive-date=15 जून 2017|url-status=dead}}</ref> [[शाक्त|शाक्त सम्प्रदाय]] की वह मुख्य देवी हैं जिनकी तुलना परम [[ब्रह्म]] से की जाती है। दुर्गा को ...में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय [[ईश्वर]] को देवी के रूप में मानता है)। [[वेद|वेदों]] में तो दुर ...२४ KB (३५६ शब्द) - १०:०६, २४ अगस्त २०२१
- [[श्रेणी:शाक्त सम्प्रदाय]] ...१३ KB (५४ शब्द) - १२:११, २७ जुलाई २०२१
- ...थों के वक्ता साधारणतयः [[शिव]]जी होते हैं। बौद्ध धर्म का [[वज्रयान|वज्रयान सम्प्रदाय]] अपने तन्त्र-सम्बन्धी विचारों, कर्मकाण्डों और साहित्य के लिये प्रसिद्ध है। ...और क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है । यह शास्त्र प्रधानतः [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्तों]] का ही है और इसके मंत्र प्रायः अर्थहीन और एकाक्षरी हुआ करते हैं । जैसे,— ...४९ KB (१,११८ शब्द) - १६:३३, २९ जून २०२१
- ...द्ध है कि यह पूर्णनंद परमहंस के पालक पिता थे। शिक्ष एवं दीक्षागुरु भी थे। 'शाक्तानंद तरंगिणी' और'तारा रहस्य' इनकी कृतियाँ हैं। ...थे। श्रीतत्वचिन्तामणि का रचनाकाल 1577 ई॰ है। 'श्यामा अथवा कालिका रहस्य', 'शाक्त क्रम', 'तत्वानंद तरंगिणी', 'षटकर्मील्लास' प्रभृति इनकी रचनाएँ हैं। प्रसिद्ध ...३५ KB (३९३ शब्द) - १०:००, ६ मई २०२१
- *[[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]], [[शैव]], [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]], [[कापालिक]], [[चक्रांकित]] और [[चार्वाक दर्शन|चार्वाक]] मत वेदों को नहीं ...४० KB (५२७ शब्द) - १५:२५, २७ फ़रवरी २०२१
- यह धर्म अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए हैं।<ref>{{cite web|url=https://blogs.timesofindia.india ...ा]] में इस धर्म का औपचारिक नाम "[[हिन्दु आगम]]" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नहीं है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है।<ref>{{Cite web |url=http://www. ...६८ KB (९७८ शब्द) - १७:५८, २० अगस्त २०२१
- ...्वारा मानव मात्र के कल्याण के लिए दिए गए हैं। वेदों में किसी भी मत, पंथ या सम्प्रदाय का उल्लेख न होना यह दर्शाता है कि वेद विश्व में सर्वाधिक प्राचीनतम साहित्य ...है। इसके अलावा अलग अलग विचार रखनेवाले और पृथक् पृथक् देवता मानने वाले कुछ सम्प्रदाय ये हैं-: ...९६ KB (६३९ शब्द) - १९:१०, २२ अगस्त २०२१
- ...हिन्दू दर्शन का ही खण्डन उपलब्ध होता है। [[महावीर|महावीर स्वामी]], जो जैन सम्प्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं, वे भी बुद्ध से प्राचीन थे। अतएव जैन दर्शन का बुद आगे चलकर वेदान्त के अनेकानेक सम्प्रदाय (अद्वैत, द्वैत, द्वैताद्वैत, विशिष्टाद्वैत आदि) बने। ...७६ KB (५०५ शब्द) - ०३:४८, १८ जुलाई २०२१
- ...ोग]] शास्त्रों के ऊर्जा स्रोत ([[ईड़ा|ईडा-]][[पिंगला]]), [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्तों]] के [[अर्धनारीश्वर|शिव-शक्ति]] के सिद्धांत इसके समानान्तर दीखते हैं। ...४२ KB (३६४ शब्द) - २३:३५, ४ मई २०२१
- ...देखे तो वहाँ प्राचीन यूनानी विचारकों से शुरू करके अब तक कई दर्जन दार्शनिक सम्प्रदाय बन-बिगड़ चुके हैं। यह स्थिति होने के कारण दर्शन के इतिहास में कई बार यह प्र ...ात्मक बोध के लिए बोलचाल की भाषा का आश्रय लेता है। यहाँ इन विभिन्न दार्शनिक सम्प्रदायों का विवरण देना अभीष्ट नहीं है। इस सन्दर्भ में हम दो एक अपेक्षित बातें कहकर ...७० KB (१८६ शब्द) - १३:४८, १३ अक्टूबर २०२०
- ...इनसे दर्शन की जो विभिन्न धाराएं निकली हैं, उनमें 'वेदान्त दर्शन' का अद्वैत सम्प्रदाय प्रमुख है। उपनिषदों के तत्त्वज्ञान और कर्तव्यशास्त्र का प्रभाव [[भारतीय दर् ...ा विषयक होने के कारण 'तांत्रिक' माने जाते हैं। ऐसे उपनिषदों में [[शैव]], [[शाक्त]], [[वैष्णव]] तथा [[योग]] विषयक उपनिषदों की प्रधान गणना है। ...४५ KB (४०७ शब्द) - १४:५१, २६ अगस्त २०२१