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- * [[संघ (समुच्चय सिद्धान्त)|समुच्चयों का संघ]] * [[सर्वनिष्ठ (समुच्चय सिद्धान्त)]] ...१ KB (१७ शब्द) - १८:५१, ३ अगस्त २०२०
- ...न्त भी है और न्यायधीशों द्वारा मामलों का निर्णय कैसे किया जाय, इसका मानकीय सिद्धान्त भी। ...है कि न्यायधीशों को निर्णय तक पहुँचने के लिये तथ्यों से सम्बन्धित अविवादित सिद्धान्तों का प्रयोग करना चाहिये। ...१ KB (६ शब्द) - १८:०८, २२ जनवरी २०१७
- सभी धनात्मक एवं ऋण आत्मक संख्याओं को पूर्णांक संख्या कहते हैं जैसे - -1,-2,0,1,2 सभी पूर्णांकों में समूचे स [[श्रेणी:बीजीय संख्या सिद्धान्त]] ...२ KB (१६ शब्द) - १७:३६, १४ फ़रवरी २०२१
- [[श्रेणी:आव्यूह सिद्धान्त]] ...१ KB (१८ शब्द) - १४:४९, ७ दिसम्बर २०१५
- [[चित्र:Three apples.svg|right|thumb|प्राकृतिक संख्याओं से गणना की सकती है। उदाहरण: (ऊपर से नीचे की ओर) एक सेब, दो सेब, तीन सेब, ...क संख्याएँ''' ([[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]: natural numbers) कहते हैं। ये संख्याएँ वस्तुओं को [[गणना|गिनने]] ("मेज पर 5 किताबें हैं") अथवा [[पूर्ण क्रम|क्रम ...४ KB (५८ शब्द) - १७:२९, २४ जुलाई २०२१
- ...राज्ज्य व्यवस्था थी। मण्डल का शाब्दिक अर्थ 'वृत्त' (सर्कल) होता है। मण्डल सिद्धान्त वर्तमान युग के एकीकृत राजनीतिक शक्ति के विपरीत राजशक्ति का मॉडल है। ==चाणक्य का मण्डल सिद्धान्त== ...५ KB (१७ शब्द) - १५:०२, १८ सितम्बर २०२०
- ...]] आदि) को समझने के लिये एक सरलीकृत [[भौतिक मॉडल|मॉडल]] है। सार रूप में यह सिद्धान्त कहता है कि गैसों का दाब उनके अणुओं के बीच के स्थैतिक प्रतिकर्षण (static rep == अणुगति सिद्धान्त की मान्यताएँ (Postulates) == ...८ KB (२९५ शब्द) - २१:५०, २४ सितम्बर २०२०
- ...tics) [[गणित]] की तीन बड़ी शाखाओं में से एक है। [[अंक|अंकों]] तथा [[संख्या|संख्याओं]] की गणनाओं से सम्बंधित गणित की शाखा को अंकगणित कहा जाता हैं। यह गणित की ...अंकों को एक के पास एक रखने से संख्या बनती है। अंक केवल दस होते हैं, किन्तु संख्याएँ अनन्त हैं। उदाहरण के लिए ३४७२ (तीन हजार चार सौ बहत्तर) एक संख्या है जिसम ...८ KB (७५ शब्द) - ०८:३२, ९ जून २०२१
- डीरिख्ले श्रेणी [[विश्लेषी संख्या सिद्धान्त]] में विभिन्न प्रकार से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। [[रीमान जीटा फलन]] क |trans-title=डीरिख्ले श्रेणियों का सामान्य सिद्धान्त ...६ KB (२५४ शब्द) - ०४:४०, १५ जून २०२०
- ...' के अन्तर्गत किसी भी प्रकार की वस्तुओं का संग्रह सम्भव है, किन्तु समुच्चय सिद्धान्त मुख्यतः गणित से सम्बन्धित समुच्चयों का ही अध्ययन करता है। स्थूल रूप से [[अं ...के लगभग सभी वस्तुओं (यथा- [[फलन]]) को परिभाषित करने के काम आती है। समुच्चय सिद्धान्त के आरम्भिक कांसेप्ट इतने सरल हैं कि इन्हें प्राथमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम ...१७ KB (६१२ शब्द) - ०८:४२, ३१ जनवरी २०२१
- ...य '''नहीं''' माना जाता है। क्योकि १ न तो भाज्य है और न अभाज्य है २५ अभाज्य संख्याएं नीचे दी गयीं हैं- ...्व यह है कि किसी भी अशून्य प्राकृतिक संख्या के [[गुणनखण्ड]] को केवल अभाज्य संख्याओं के द्वारा व्यक्त किया जा सकता है और यह गुणनखण्ड एकमेव (unique) होता है। इ ...९ KB (५१३ शब्द) - १५:२०, ३१ दिसम्बर २०२०
- ...ंकि इसका [[परमाणु नाभिक|नाभिक]] '''बोसॉन''' होता है और [[पॉली एक्सक्ल्युसन सिद्धान्त]] का पालन करने बाध्य नहीं होता इसलीए यह अपने में आरपार गुजर सकता है। ...३ KB (२२ शब्द) - २२:१९, २ अगस्त २०२१
- ...ित]] में '''समिश्र संख्याएँ''' (complex number) [[वास्तविक संख्या|वास्तविक संख्याओं]] का विस्तार है। किसी वास्तविक संख्या में एक ''काल्पनिक भाग'' जोड़ देने स ..., के रूप में व्यक्त किया जा सकता है जिसमें ''a'' और ''b'' दोनो ही वास्तविक संख्याएं हैं। ''a'' + ''bi'' में ''a'' को वास्तविक भाग तथा ''b'' को काल्पनिक भाग क ...१५ KB (१,१७१ शब्द) - १४:०९, ७ दिसम्बर २०२०
- ...[https://books.google.co.in/books?id=1StVBAAAQBAJ&pg=PT18 १८]}}</ref> इस सिद्धान्त के प्रथम प्रवर्तक [[मध्वाचार्य]] (1199-1303) थे। ...ष्टि के अन्तिम सत् दो हैं। इसका एकत्वाद या [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवाद]] के सिद्धान्त से मतभेद है जो केवल एक ही सत् की बात स्वीकारता है। द्वैतवाद में [[जीव]], [[ ...१० KB (७३ शब्द) - १५:५५, २३ मई २०२१
- ...वं सीमित होती है। इन प्रतीकों को विविध प्रकार से व्यस्थित करके भिन्न-भिन्न संख्याएँ निरूपित की जाती हैं। नीचे दो संख्याओं का उदाहरण दिया गया है, जो क्रमशः दशमलव पद्धति तथा बाइनरी पद्धति में है- ...१० KB (१०८ शब्द) - १५:१८, १७ अगस्त २०२१
- '''शून्य''' (0) एक [[अंक]] है जो संख्याओं के निरूपण के लिये प्रयुक्त आजकी सभी [[स्थानिक मान|स्थानीय मान पद्धतियों]] शून्य, पहली प्राकृतिक पूर्णांक संख्या है। यह अन्य सभी संख्याओं से विभाजित हो जाता है। यदि <math>a</math> कोई वास्तविक या समिश्र संख्या ह ...९ KB (३८३ शब्द) - ०९:१४, १३ अगस्त २०२१
- *(१) '''तन्त्र''' या '''सिद्धान्त''' - गणित द्वारा ग्रहों की गतियों और नक्षत्रों का ज्ञान प्राप्त करना तथा उन ...है । मात्र ग्रहगणित की दृष्टि से देखा जाय तो इन तीनों में कोई भेद नहीं है। सिद्धान्त, तन्त्र या करण ग्रन्थ के जिन प्रकरणों में ग्रहगणित का विचार रहता है वे क्रम ...१२ KB (६५ शब्द) - ११:२४, २३ मार्च २०२१
- [[चित्र:NumberSetinC.svg|300px|thumb|right|[[समिश्र संख्या|समिश्र संख्याओं]] के उपसमुच्चय]] ...े बारे में कहा है कि आप किसी परिघटना के बारे में कुछ नहीं जानते यदि आप उसे संख्याओं के द्वारा अभिव्यक्त नहीं कर सकते। ...१४ KB (२५५ शब्द) - २०:५८, २६ अप्रैल २०२१
- '''बीजगणित''', [[भास्कराचार्य|भास्कर द्वितीय]] की रचना है और [[सिद्धान्त शिरोमणि|सिद्धान्तशिरोमणि]] का द्वितीय भाग है। सिद्धान्तशिरोमणि के अन्य भाग यह विश्व की पहली पुस्तक है जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि धनात्मक संख्याओं के '''दो''' [[वर्गमूल]] होते हैं। ...४ KB (६६ शब्द) - १२:५६, १५ जून २०२०
- यहाँ, ''a''<sub>0</sub> एक [[पूर्णांक]] है तथान्य सभी संख्याएँ ''a''<sub>''i''</sub> (''i'' ≠ 0) धनात्मक [[पूर्णांक]] हैं। यदि उपरोक्त व * '''कैलेण्डर सिद्धान्त''' - ग्रेगरी कैलेण्डर के किस वर्ष में ३६५ दिन और किस वर्ष में ३६६ दिन होंगे ...६ KB (३३१ शब्द) - २१:३४, १५ जून २०२०