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इस विकि पर "हिन्दू मत" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...|रामानुजाचार्य]], [[मध्वाचार्य]] आदि बड़े-बड़े गुरुओं ने ऐसा कर के ही अपने मत का प्रतिपादन किया। ...२ KB (९ शब्द) - ०८:२९, ४ अगस्त २०२१
- ...द|वेदों]] पर आधारित [[धर्म]] है जो अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय, और दर्शन समेटे हुए है। हिन्दू धर्म [[विज्ञान]] के नियम पर आधारि ...३ KB (४६ शब्द) - १५:५२, ९ अक्टूबर २०२०
- ====पुराना कैथोलिक मत==== ...३ KB (२ शब्द) - २१:३२, ११ मार्च २०२०
- ...बहुतों का मत है। प्रदक्षिणा के अंत में प्रणाम अवश्य करना चाहिये, बहुतों का मत है। किसी-किसी ग्रंथ में प्रदक्षिणा के विशेष नियम उपलब्ध होते है; [[विश्वासर ...३ KB (२० शब्द) - १०:४८, १५ जून २०२०
- ...के अनुयायी माने जाते हैं, क्योंकि प्रसिद्ध है कि [[जालंधरनाथ]] औघड़ थे और मत्स्येंद्रनाथ एवं गोरखनाथ कनफटे। कनफटे योगियों में विधवा स्त्रियाँ तथा योगियो ...मूर्ति आदि अनेक पुरातात्विक सामग्रियों की परीक्षा कर निष्कर्ष निकाला है कि मत्स्येंद्र और गोरक्ष के पूर्व भी कर्णकुंडल धारण करने की प्रथा थी और केवल [[शि ...५ KB (१४ शब्द) - १७:१५, २९ फ़रवरी २०२०
- '''[[वेदान्त दर्शन|वेदांतियों]]''' के मत से [[ब्रह्म]] ही एकमात्र परमार्थ तत्त्व है। '''[[शून्यता|शून्यवादी बौद्धों]]''' के मत से शून्य या अभाव ही परम तत्त्व है, क्यों कि जो वस्तु है, वह पहले नहीं थी और ...४ KB (१६ शब्द) - ०५:०७, ३ मार्च २०२०
- ...इसकी चौहद्दी बनी। यहाँ प्रयागेश्वर का मंदिर है। [[काशीप्रसाद जायसवाल]] के मत से भारशिवों राजभर ने जिस स्थान पर दस अश्वमेघ किए वह यही भूमि है। सन् 1929 म ...२ KB (११ शब्द) - २१:२२, ३० अप्रैल २०२१
- इस मत के अधिकांश अनुयायी [[असम]] में निवास करते हैं। इस धर्म में श्रवण-[[कीर्तन]] ...२ KB (१६ शब्द) - ०९:५७, ६ मई २०२१
- ...े अनुसार इनके पिता का नाम कुशाश्व था। इनकी माता पुरुकुत्स की कन्या थीं। एक मत से ये [[इन्द्र|इंद्र]] से उत्पन्न हुए थे। ये कान्यकुब्ज के राजा थे। इनकी कन ...२ KB (२ शब्द) - ०५:३९, ८ मार्च २०२०
- ...[[कृष्ण]] आदि अवतारों में मानकर उनकी पूजा कर मोक्ष की इच्छा रखता था। पहले मत के कबीर, नानक आदि मुख्य प्रचारक थे और दूसरे के तुलसी, सूर आदि। ...२ KB (४ शब्द) - ०७:१८, २२ अगस्त २०१९
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - ०८:०४, १५ जून २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - १३:३४, १८ सितम्बर २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - १३:३५, १८ सितम्बर २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नहीं है समान्यत: उपनिषदों का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व मा ...८ KB (२९० शब्द) - १६:३३, २८ सितम्बर २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - ०७:४३, १५ जून २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - ०८:०७, १५ जून २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - ०१:५३, १६ जून २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - १७:१८, १५ जून २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - १३:२६, १८ सितम्बर २०२०
- ...ैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना ...८ KB (२८८ शब्द) - १३:१५, १८ सितम्बर २०२०