Deprecated: Caller from MediaWiki\Cache\LinkCache::fetchPageRow ignored an error originally raised from MediaWiki\Extension\SmartCommons\Store\MetadataStore::updateMetadata: [1054] Unknown column 'scf_url' in 'SET' in /www/wwwroot/enwiki/w/includes/debug/MWDebug.php on line 385
प्रतिहार कला शैली - भारतपीडिया

प्रतिहार कला शैली मध्यकालीन मूर्ति शैली है, इस शैली की प्रतिमाओं में गुप्त काल की अनेक विशेषताएँ समाहित हैं। प्रतिहार कला शैली की प्रतिमाएँ मध्यकालीन शैली की अन्य कला शैलियों की तुलना में सबसे अधिक प्रभावशाली एवं सुन्दर हैं। इस शैली की प्रतिमाओं के मुख पर प्रसन्नता का भाव प्रदर्शित हुआ है। इन प्रतिमाओं के शरीर की सुडौलता पर विशेष ध्यान दिया गया है तथा अलंकरणों का कम प्रयोग हुआ है। उत्तर-प्रदेश के जिला झाँसी स्थित बरुआ सागर का विशाल मन्दिर प्रतिहार कला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मन्दिर के प्रवेश द्वार पर अनेक सुन्दर मूर्तियाँ उकेरी गईं हैं। इस मन्दिर की कलाकृतियों को देखने से स्पष्ट होता है कि उस समय के कलाकार मूर्तियों के अंग-प्रत्यंग की सुडौलता के प्रति अत्यन्त सजग थे तथा इनके निर्माण में सिद्धहस्त थे।[]

प्रतिहार कला दीर्घा सम्पादित करें

सन्दर्भ सम्पादित करें

  1. डॉ॰ एस०डी० त्रिवेदी, बुन्देलखण्ड की मूर्ति सम्पदा, "उत्तर-प्रदेश" पत्रिका, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उत्तर-प्रदेश, लखनऊ, संस्करण 1981, पृष्ठ-107
  2. History of Gopāchala. Bharatiya Jnanpith.पृ. 31.ISBN 978-81-263-1155-2.