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काष्ठ संघ

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काष्ठा संघ के भट्टारकों द्वारा नक्काशी करके बनायी गयीं जैन मूर्तियाँ (ग्वालियर)

काष्ठा संघ दिगंबर जैन सम्प्रदाय का एक उपसम्प्रदाय था जो उत्तरी एवं पश्चिमी भारत के अनेक भागों में व्याप्त था। काष्ठा संघ मूल संघ की एक शाखा माना जाता है। कहा जाता है कि इस संघ की उत्पत्ति 'काष्ठा' नामक नगर से हुई थी। दिल्ली क्षेत्र के कई ग्रन्थों एवं शिलालेखों में लोहाचार्य को इस संघ का प्रणेता बताया गया है। []

साँचा:Quote box

कई जैन समुदाय काष्ठा संघ से सम्बद्ध थे। अग्रवाल जैन इसके सबसे बड़े समर्थक थे। मुनि सभा सिंह, अपने ग्रन्थ पद्मपुराण में लिखते हैं-[]

काष्ठा संघी माथुर गच्छ, पहुकर गण में निरमल पछ॥
महा निर्ग्रन्थ आचारज लोह, छांड्या सकल जाति का मोह॥
अग्रोहे निकट प्रभु ठाढे जोग, करैं वन्दना सब ही लोग॥
अग्रवाल श्रावक प्रतिबोध, त्रेपन क्रिया बताई सोध॥

काष्ठासंघ में कई उपपन्थ थे[]

  • नन्दितात् गच्छ
  • मथुरा संघ
  • लता-बागड़ गच्छ

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

नोट[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:जैन साधू

  1. "मुनि सभाचन्द्र एवं उनका पद्मपुराण" Archived 26 जुलाई 2011 at Web Archive (पीडीएफ).
  2. मुनि सभाचन्द्र एवं उनका पद्मपुराण, 1984
  3. काष्ठासंघ तथा इससे संबद्ध संघ एवं गण-गच्छ, शांतिलाल जैन जांगड़ा, अर्हत वचन जुलाई सितम्बर २००६, पृ १७-२२