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शांतिनाथ

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साँचा:जैन तीर्थंकर

शांतिनाथ जैन घर्म में माने गए २४ तीर्थकरों में से अवसर्पिणी काल के सोलहवे तीर्थंकर थे।[] माना जाता हैं कि शांतिनाथ के संग ९०० साधू मोक्ष गए थे।

जीवन[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन हुआ था। तब भरणी नक्षत्र था। उनके पिता का नाम विश्वसेन था, जो हस्तिनापुर के राजा थे और माता का नाम महारानी ऐरा था।[]
जैन ग्रंथो में शांतिनाथ को कामदेव जैसा स्वरुपवान बताया गया है। पिता के बाद शांतिनाथ हस्तिनापुर के राजा बने। जैन ग्रन्थो के अनुसार उनकी ९६ हजार रानियां थीं। उनके पास ८४ लाख हाथी, ३६० रसोइए, ८४ करोड़ सैनिक, २८ हजार वन, १८ हजार मंडलिक राज्य, ३६० राजवैद्य, ३२ हजार अंगरक्षक देव, ३२ चमर ढोलने वाले, ३२ हजार मुकुटबंध राजा, ३२ हजार सेवक देव, १६ हजार खेत, ५६ हजार अंतर्दीप, ४ हजार मठ, ३२ हजार देश, ९६ करोड़ ग्राम, १ करोड़ हंडे, ३ करोड़ गायें, ३ करोड़ ५० लाख बंधु-बांधव, १० प्रकार के दिव्य भोग, ९ निधियां और २४ रत्न, ३ करोड़ थालियां आदि संपदा थीं एसा माना जाता है। []
वैराग्य आने पर इन्होने ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को दीक्षा प्राप्त की। बारह माह की छ्दमस्थ अवस्था की साधना से शांतिनाथ ने पौष शुक्ल नवमी को ‘कैवल्य’ प्राप्त किया। ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी के दिन सम्मेद शिखर पर भगवान शान्तिनाथ ने पार्थिव शरीर का त्याग किया था।

चिन्ह का महत्व[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

हरिण शान्तिनाथ भगवान का चिन्ह है। जैनधर्म की मान्यता अनुसार हरिण की यह शिक्षा है कि 'तुम भी संसार में संगीत के समान प्रिय लगने वाले चापलूसों / चमचों की दिल -लुभाने वाली बातों में न फ़ंसना, अन्यथा बाद में पछताना पडेगा। यदि तनाव -मुक्ति चाहते हो तो मेरे समान सरल -सीधा तथा पापों से बचों, चौकन्ना रहो।'[]

शांतिनाथ के मन्दिर[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

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राजस्थान के पाली जिले के नाडोल गांव में स्थित है अति प्राचीन मंदिर जहा उन्होंने लघु शांति पुस्तक की रचना की थी

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:तीर्थंकर

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

ग्रन्थ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

  • . Acarya Samantabhadra’s Svayambhustotra. विकल्प प्रकाशन.[१]
  1. "संग्रहीत प्रति".[२]Retrieved 1 नवंबर 2015.
  2. "संग्रहीत प्रति".[३]Retrieved 1 नवंबर 2015.
  3. "वेब दुनिया पर संपत्ति के विषय में दी गई जानकारी".[४]Retrieved 1 नवंबर 2015.
  4. "तीर्थकर की जानकारी".[५]Retrieved 1 नवंबर 2015.
  5. "संग्रहीत प्रति".[६]Retrieved 1 नवंबर 2015.
  6. karnatakaitihasaacademy.org/2014/09/17/shantinatha-jinalaya-at-nittur
  7. "संग्रहीत प्रति".[७]Retrieved 1 नवंबर 2015.